देवास। रामराज्य की कल्पना को सार्थक करना है तो पहले देश में मर्यादा को स्थापित करें। सनातन धर्म का पालन करें, जिस राष्ट्र में युद्ध और कलेश नहीं है वही अयोध्या है। सरयू की धारा की तरह ह्रदय में भक्ति प्रवाहित करें तो यह शरीर सरयू का तट बन पाए। अपने इंद्री रूपी अश्वो को नियंत्रित करके शरीर रथ को योग्य मार्ग पर चलाओगे तो रामचंद्र पधारेंगे। आत्मा को नंद, शरीर को मथुरा और हृदय को गोकुल बनाकर निष्काम भाव से भक्ति का प्रादुर्भाव होगा तब यह बाल कृष्ण पधारेंगे। यह आध्यात्मिक विचार श्री सिद्धिविनायक भक्त मंडल द्वारा का कालानी बाग में हो रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भागवताचार्य मझले मुरारी बापू ने प्रभु राम और कृष्ण के अवतार का वर्णन करते हुए कहें। आपने कहा कि संपत्ति शक्ति और भोग की उपस्थिति होने पर मन को बचाए रखना ही सच्चा संयम है। भगवान की भक्ति आसान नहीं है पर स्त्री और पर संपत्ति की आशक्ति को छोड़े बिना भक्ति का आरंभ नहीं हो सकता। मनुष्य जब तक भोगबुद्धि है तब तक ईश्वर की भक्ति नहीं हो सकती। सच्चे मन से परमात्मा का नाम एक बार भी लिया तो आप की पुकार वह सुन लेगा। क्योंकि वह दयानिधि है। अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा था। अंत काल में उसने अपने पुत्र को पुकारा, किंतु भगवान ने उसकी करूणा सुनकर उसका उद्धार किया। बापू ने कथा प्रसंगों का आध्यात्मिक विश्लेषण करते हुए विभीषण के जन्म की कथा, प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के पीछे उद्देश्यो को शास्त्रोक्त तथ्य के अनुसार बड़े ही सुंदर ढंग से व्यक्त कर अनेक रहस्यों को उजागर किया। भगवान कृष्ण के जन्म उत्सव पर जब वसुदेव बने गोविंद चौधरी अपने सर पर रखी टोकरी में कृष्ण बने छोटे से बालक अनय जोशी को लेकर पांडाल में आए तो पंडाल में उपस्थित श्रोता जय-जय कार के साथ बालकृष्ण के दर्शन के लिए लालायित हो गए और नृत्य के लिए झूमने लगे। समूचा वातावरण कृष्णमय हो गया। इस अवसर पर व्यासपीठ से बापू ने समस्त श्रोताओं को दस-दस रूपए की बधाई भेंट करते हुए कहा कि यह बधाई जो अपने पास रखता है उसे कभी धन की कमी नहीं होती। इस अवसर पर चॉकलेट, लड्डू, माखन मिश्री लूटाई गई। व्यासपीठ की पूजा राजेन्द्र पंड्या, आयोजक प्रदीप चौधरी, कथा प्रभारी विशाल यादव ने की। आरती में विशेष रूप से पत्रकार योगेश निगम, आभा निगम, पीएन तिवारी, मुकेश वर्मा, सतीश दुबे, चेतन उपाध्याय, सुरेश चौधरी, एडवोकेट राजेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित थे।
