गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के दौरान लोगों को इसके दुष्प्रभाव के प्रति किया जागरूक

देवास/ बागली (सुनील योगी) – वर्तमान समय में फसलों के साथ-साथ गाजर घास की पैदावार दिखाई देना आम बात हो गई है! अनेक प्रकार के उपाय करने के बावजूद भी गाजर घास से निजात नहीं मिल रही, ईसका विस्तार इतना अधिक हो चुका है! कि गांव शहर यहां तक कि जंगल में भी गाजर घास बड़ी तेजी से फैलने वाली यह घासं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो रही है! कृषि विज्ञान केंद्र देवास द्वारा जिले भर में गाजर घास उन्मूलन सप्ताह के दौरान इस से होने वाले दुष्परिणाम के विषय में तथा इसे समूल नष्ट करने के उपाय की जानकारी साझा की जा रही है !कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी डॉक्टर सविता कुमारी द्वारा गाजर घास के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर गाजर घास का कितना घातक दुष्प्रभाव पड़ता है! एलर्जी ,बुखार, सांस की परेशानी त्वचा की परेशानी के साथ पेयजल में भी इसकी मात्रा नुकसानदायक साबित हो रही है! पर्यावरण तथा फसल उत्पादन पर भी इसका विपरीत प्रभाव गिर रहा है! यह सब जानकारी सोशल मीडिया तथा गोष्टी करके किसानों को दी जा रही है! साथ में गाजर घास खत्म करने के साथ-साथ इसके सार्थक उपाय भी बताए जा रहे हैं ! डॉक्टर महेंद्र वैज्ञानिकद्वारा बताया गया कि गाजर घास में फूल आने के पहले ही इसे उखाड़ कर पृथक करें ,और वर्मी कंपोस्ट के रूप में इसे खाद में परिवर्तित कर इसका उपयोग भी उचित रूप से करें कृषि विज्ञान देवास से जुड़े डॉ मनीष कुमार ने जैविक विधि मैक्सिकन बीटल के माध्यम से इसे नियंत्रित करने की जानकारी साझा की, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार दीक्षित ने बताया कि किसान प्राथमिकता के तौर पर खेतों के आसपास या रहवासी बस्ती के आसपास गाजर घास का होना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है! इसलिए इसका उन्मूलन बेहद
आवश्यक है !जागरूकता अभियान के तहत ही इसे नष्ट किया जा सकता है! एक तरह का धीमा जहर है! यह घास