देवास। सन 1971 से नवरात्रि समापन पर ग्यारहवें दिन माता दुर्गा का ऐतिहासिक विर्सजन चल समारोह शहर में बढ़ी धूमधाम के साथ निकलता आ रहा है। इस वर्ष 2020 को चल समारोह का 49 वां वर्ष था। लेकिन कोविड 19 के कारण इस बार ऐतिहासिक चल समारोह नही निकल पाया। जो कि दुर्भाग्यपूर्ण होकर सनातनधर्म में आस्था रखने वाले भक्तों के लिए दुखद निर्णय था। लेकिन माँ के भक्तों ने चल समारोह निकाला और परम्परा को कायम रखा। प्रशासन द्वारा कोरोना के कारण चल समारोह निकालने की अनुमति नही दी गई। जहां एक ओर नेताओं की सभा में जमकर लोग एकत्रित हो रहे है व कोरोना के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। वहीं दूसरी और माँ की भक्ति के लिए निकलने वाले चल समारोह की अनुमति प्रशासन द्वारा नही दी जाना आश्चर्य का विषय है। प्रशासन चाहता तो चल समारोह को सूक्ष्म रूप से निकालने की अनुमति दे सकता था। ऐसे में जिम्मेदार जनप्रतिनिधीयों का मौन होना भी कहीं ना कही संशय पैदा करता है। शहर की कुछ समितियों ने वर्षों की परम्परा को कायम रखते हुए कोरोना के नियमों का पालन कर माताजी की प्रतिमाएं सूक्ष्म जुलूस के रूप सयाजीद्वार से शहर के मुख्य मार्गों से निकाली। समितियों के प्रमुखों का श्री खेड़ापति मारुति मंदिर पर दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया गया। ढोल ढमाके व गुलाल में झुमते नाचते हुए युवाओं ने माता रानी को विदा किया। छोटे रूप में निकले चल समारोह में कुल 12 से 15 माता की प्रतिमाएं शहर के प्रमुख मार्गो से निकली।
✍️✍️ धीरज सेन
