भारत देश के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच में स्थित मालवा व मालवा के मध्य में स्थित दो देवियों का वास देवासिनी अर्थात देवास नगर अपनी प्राचीन धरोहर को सजाए व संजोए ये शहर अपने आप में इतिहास के कई अनछुए पहलुओं को छुता नजर आता है। प.कुमार गंधर्व सा.स्व.रज्जबअली खां सा.,स्व.गणपतराव पवार सा.,स्व.अमानतअली खां. सा.(लता मंगेशकर के गुरु),स्व.अफजल सा.ऐसे कई कला-साहित्य के विद्वान लोगों से भरी पड़ी, ये औद्योगिक नगरी देवास में एक ही समय में दो पवार राजवंश के शासकों ने राज किया। देवास पूर्व में दो भागों में बंटा हुआ था सीनियर तथा जुनियर रियासत। इस नगर का प्राचीन नाम देवासिनी भी था। देवी-वासिनी अर्थात देवी के रहने का स्थान जो आगे चलकर देवी का वास देवास हो गया।ओर दूसरी मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि दीवासा बानिया नामक व्यक्ति ने इस नगर को बसाया था इस नगर की सबसे महत्वपुर्ण बात जो पुरे भारत देश में एक अलग स्थान या प्रसिद्धि इस नगर को दिलवाती है वो है उंची पहाड़ी पर शक्तिपीठ के रुप में विराजित दो देवी श्री तुलजा भवानी (बड़ी माता) श्री चामुण्डा देवी (छोटी माता) का मंदिर जो प्राचीन-पुराना और ऐतिहासिक है उंची पहाड़ी पर होने के कारण इसे टेकरी माता मंदिर कहा जाता है। इन दोनों देवियों के बारे में कहा जाता है कि इनमें सगी बहनों का रिश्ता है यह दो देवी उंची पहाड़ी पर (घने जंगलों के बीच पूर्व में) साथ में रहती थी। एक दिन किसी बात को लेकर दोनों बहनों में बहस -विवाद अथवा मनमुटाव हो गया। यह सब इतना अधिक हो गया था कि दोनों बहनें अपने स्थान से जाने लगी। बड़ी माता तुलजा भवानी पाताल में समाने लगी तथा छोटी माता चामुण्डा अपना स्थान छेाड़कर जाने लगी। दोनों देवियों को दुखी आक्रोश उदास देखकर दोनों देवियों के समक्ष उपस्थित श्री हनुमानजी और भैरवबाबा ने उनके क्रोधित रुप को देखकर क्रोध शांत करने की विनती के साथ वहीं रुकने की प्रार्थना-निवेदन किया। हनुमान जी और भैरवबाबा की प्रार्थना पर दोनों ही माता जिस हाल में थी उसी हाल में रुक गई। तुलजा भवानी माता का शरीर का आधा भाग पाताल में समा चुका था तो वे जैसी थी वैसी ही अवस्था में पहाड़ी पर रुक गई तथा चामुण्डा माता पहाड़ी से उतर रही थी उनके रास्ते में रुकावट होने के कारण वो गुस्सा हो गई अत:वह जिस स्थिति में नीचे उतर रही थी उसी अवस्था में वे पहाड़ी पर रुक गई। आज भी उंची पहाड़ी (टेकरी) पर जंगल जैसा सौंदर्य के बीच दोनों देवी अपने उसी स्वरुप में विराजित है। आज भी ये दोनों माता जाग्रत और स्वंभू स्वरुप में है। ऐसी मान्यता है। यहां पर आज भी सच्चे मन से जो मांगे वह मुरादें पुरी होती है। बड़ी माता से दर्शन प्रारंभ होकर प्राकृतिक सौंदर्य के बीच पुरी पहाड़ी (टेकरी) की परिक्रमा करते हुए छोटी माता पर पूर्ण होती है। वर्षभर टेकरी पर लाखों श्रद्धालुओं का आना जाना बना रहता है नवरात्रि में टेकरी पर दोनों माताओं के दर्शन का विशेष महत्व होता है। यहा देशभर के लोग विशेष कर नवरात्रि के समय आते है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन अनुमानित 50 हजार से 70 हजार या अधिक भी,कभी-कभी तो 1 लाख तक भी लोग दर्शन करने आते है। इस बार कोविड 19 महामारी को देखते हुए कुछ नियम प्रशासन द्वारा बनाए गए है। उसी नियम के अंतर्गत इस बार दर्शन भक्त कर पाएंगे।
✍️ अमित राव पवार , देवास
