सुन्द्रेल बिजवाड (दीपक शर्मा)। बच्चों के भविष्य को संवारने में माता पिता किसी परमात्मा से कम नहीं है क्योंकि माता-पिता ही बचपन में वह संस्कार दे सकते हैं जिससे कि जीवन पर्यंत चाहे कैसी भी कठिनाई हो पर आने वाली पीढ़ी अपना जीवन एक आदर्श जीवन स्थापित कर सकती है और विपरीत परिस्थितियों में भी एक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उक्त वचन बज्जाहेड़ा में चल रही श्री मद्द्भागवत कथा के पंचम दिवस श्री पवनकृष्ण जी शर्मा बृजधाम कुड़ाना वालों ने कही। कृष्ण प्रसंग सुनाते हुए आपने कहा कि पुतना सब कुछ जानते हुए भी जगत के जहर को पीने वाले साक्षात परमात्मा को विष पिलाने आयी,पर परिणाम यही रहा कि अपने प्राण की आहूति देनी पड़ी। यही मानव जीवन की पीड़ा हैं कि मोह, माया-ईर्ष्या रूपी जहर जानबूझकर प्रतिदिन पीते जा रहे हैं और जो वास्तविक जीवन हैं उससे हम हमारा परिचय नहीं कर पा रहें हैं। आज इंसान को इंसान से खतरा बढ़ता जा रहा हैं हम सभी एक ही हैं पर न जाने कौन सी पाश्चात आंधी में बहे जा रहे हैं और समाज व राष्ट्र तो दूर हम हमारे परिवार को भी वह संस्कार नहीं दे पा रहे हैं जिससे कि आने वाले समय में वह अपने परिवार को सही तरीके से मार्गदर्शन दे सके। आपके द्वारा बताया गया कि हम आत्मसात करें या न करें, लेकिन हम हमारे कर्म-धर्म व मार्ग से भटक चुके हैं और इसका परिणाम हमें देर सबेर भुगतना तय हैं














