सालभर से ज्यादा समय से बच्चे स्कूल से दूर, मानसिक, बौद्धिक, तार्किक व शारीरिक क्षमता पर पड़ रहा भारी असर
देवास। भारत में बीते वर्ष 27 जनवरी को केरल में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आया जिसके बाद कोरोना लगातार भारत में अपने पैर पसारता चला गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार द्वारा सख्त कदम उठाते हुए पूरे देश में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू व उसके बाद पुर देश मे पूर्ण लॉकडाउन भी लगाया गया। लॉकडाउन से पूरा देश मानो थम गया और बच्चा, बूढ़ा, व्यस्क सभी अपने घरो में कैद हो गए। जिससे देश की अर्थव्यवस्था को तो नुकसान हुआ ही परंतु देश का आने वाले भविष्य को लगभग 1 साल से ज्यादा समय तक स्कूलों से दूर रहना पड़ा है। जिससे बच्चों की बौद्विक, मानसिक व शारारिक क्षमता पर भारी असर दिख रहा है। हालाँकि इस दौरान कुछ युवाओं ने मौके का सदउपयोग कर के अपनी कला एवं हुनुर को निखारा है परन्तु ऐसे युवाओ की संख्या सीमित है। वही इस दौरान स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लासेस संचालित की गयी परंतु यह हम सभी जानते है कि ऑनलाइन क्लास में बच्चो द्वारा कैसी और कितनी पढ़ाई की गयी। इतने लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने से बच्चो की तार्किक बुद्धि व मानसिक क्षमता पर भी प्रभाव पड़ा है। इस बीच समय-समय पर स्कूल संस्थानो द्वारा स्कूल खोलने की मांग उठाई गई परन्तु बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा स्कूल नही खोले गए। जब देश में कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली और देशवासियों को कोरोना से बचाव का टीका लगना शुरू हुआ तो जनता को लगा अब कोरोना से राहत मिलेगी और कोरोना का टीका लगने से कुछ समय के लिये देश में कोरोना मामले का आँकड़ा कम भी हुआ परंतु लगभग ठीक 1 साल बाद फिर कोरोना ने अपना रौद्र रूप दिखाया और पहले से भी ज्यादा तेज़ी से अपना संक्रमण फैला रहा है। जिसको देखते हुए फिर से कुछ शहरो में लॉक डाउन की शुरुआत हुई। अभी जारी कोरोना की दूसरी लहर में बुजुर्ग के साथ – साथ बच्चे भी कोरोना संक्रमित हो रहे है। स्कूल व कॉलेजो को जो छुट मिली थी उनपर केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा फिर से पाबंदीया लगाई गई । फिर से स्कूल बंद हुए और बच्चों की परीक्षाएं भी ऑनलाइन व ओपनबुक पद्धति के माध्यम से हुई तथा होगी जिससे कोरोना से तो बचा जा सकता है परंतु बच्चो के बौद्धिक ज्ञान पर इसका काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है क्योकि ओपन बुक पद्धति के माध्यम से बच्चो को ना पढ़ना तो नही पड़ता और परीक्षा में पास भी अच्छे अंको से हो जाते है। ओपन बुक पद्धति से घर बैठकर परीक्षा देने से बच्चे कोरोना से तो बच सकता है परंतु अपने बौद्धिक ज्ञान का विकास नही कर सकता है। इसलिए ऐसा लगता है कि कोरोना ने देश का तो काफी नुकसान किया ही परंतु स्कूल व कॉलेज के बच्चो के बौद्धिक, मानसिक, तार्किक ज्ञान पर असर डाल कर देश के भविष्य से साथ भी खेल रहा है
