भौंरासा नि, प्र(अभय नागर) , पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. देश की प्रमुख जगहों जैसे हरिद्वार, गया आदि जाकर पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं, वहीं भौरासा में बाबा भंवरनाथ महाराज मंदिर पर सामुदायिक पिंडदान नगर पुरोहित संजय जोशी व मनोज जोशी ने मंदिर परिसर में सामुहिक पिंडदान वेदिका मंत्र उच्चारण के साथ करवाया भवर नाथ की मान्यता है शास्त्रों में ऐसा कहा गया है जहां पर वटवृक्ष शिव परिसर जलकुंड तालाब सरोवर यहां पर सभी का समावेश होने के कारण पूर्णिमा के दिन पितरों को श्राद्ध में लिया जाने का शास्त्र प्रमाण है और पूर्णिमा के दिन पित्र तर्पण साथ में किया जाता है तो अपने पूर्वजों के पित्र सभी जल ग्रहण करते हैं इन दिनों में कुछ कार्य ऐसे हैं, जिनकी करने की मनाही है
20 सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष, 15 दिन तक पत्तल में ही करें भोजन, किसी जानवर या पक्षी को न करें परेशान
पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से शुरू होकर पितृमोक्षम अमावस्या तक चलते हैं. 20 सितंबर यानी आज से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है, जो कि 6 अक्टूबर को खत्म होगा. पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. देश की प्रमुख जगहों जैसे हरिद्वार, गया आदि जाकर पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते है
15 दिन आसपास रहते हैं पितृगण
शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में पितृ 15 दिन तक पृथ्वी पर रहने के बाद अपने लोक लौट जाते हैं. इस दौरान पितृ अपने परिजनों के आसपास रहते हैं. इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे पितृ नाराज हों नगर पुरोहित संजय जोशी ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान शाकाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए. अगर आप नॉन-वेज और शराब आदि का सेवन करते हैं, तो इनसे बचना चाहिए.
इन कार्यों से नाराज होते हैं पितृ
श्राद्ध कर्म करने वाले सदस्य को इन दिनों बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए. उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए. श्राद्ध कर्म हमेशा दिन में करें. सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करना अशुभ माना जाता है. इन दिनों में लौकी, खीरा, चना, जीरा और सरसों का साग नहीं खाना चाहिए. जानवरों या पक्षी को सताना या परेशान भी नहीं करना है.
पितृ को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम
पितृ पक्ष में अगर कोई जानवर या पक्षी आपके घर आए, तो उसे भोजन जरूर कराना चाहिए. मान्यता है कि पूर्वज इन रूप में आपसे मिलने आते हैं. पितृ पक्ष में पत्तल पर भोजन करें और ब्राह्राणों को भी पत्तल में भोजन कराएं, तो यह फलदायी होता है.
नहीं करें ये शुभ काम
पितृ पक्ष में कोई भी शुभ काम जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, घर के लिए महत्वपूर्ण चीजों की खरीददारी नहीं करें. नए कपड़े या किसी प्रकार की खरीददारी को भी अशुभ माना जाता है. इस दौरान बेहद सादा जीवन जीने और सात्विक भोजन करने के लिए भी कहा गया है.
