आज गिरिराज धरण की झांकी के साथ लगेगा छप्पन भोग
सतवास : संसार एक सरोवर के समान है और हम सब जीव हैं। जब जीव भगवान के चरण कमल का आश्रय ले लेता है तो भगवान उसे इस संसार सागर से पार कर देते हैं। उसकी नैया डूबती नहीं है, उसे प्रभु उबार लेते हैं। गजेंद्र मोक्ष की कथा आपकी हमारी है। ग्राह ने गजेंद्र का पांव पकड़ा और जब उसे कोई नहीं बचा पाया तब उसने भगवान की स्तुति की। भगवान आए और सुदर्शन चक्र से ग्राह का मस्तक धड़ से अलग कर दिया। भगवान से पहले ग्राह का उद्धार किया।
यह विचार दिगंबर जैन मंदिर में वाघेला परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य मृदुलकृष्ण शास्त्री ने गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। उन्होंने सागर मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि विपत्ति के समय धैर्यवान व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने शत्रु से भी मित्रता कर लें। देवताओं ने सागर मंथन का प्रस्ताव रखा, जिसे दैत्यों ने स्वीकार कर लिया। मंथन में सर्वप्रथम जहर निकला, जिसे भोलेनाथ ने अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ हो गए।
आचार्यश्री ने भक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि भक्ति में ही शक्ति है जो परमात्मा को सेवक बना देती है। सनातन संस्कृति पर चर्चा करते हुए कहा कि सनातन धर्म में जैसा विंब होगा, वैसा ही प्रतिबिंब होगा। कथा में बुधवार को गिरिराज धरण की झांकी के साथ छप्पन भोग लगाया जाएगा।
मंगलवार को चतुर्थ दिवस कथा पंडाल में छोटे बालक एकांश राठौर को कृष्णरूपी वेशभूषा पहनाकर सुसज्जित कर कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। हो! ब्रज में हे रही जय-जयकार… नंद के घर लाला आयो है…, गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है… जैसे भजनों पर श्रद्धालु भजनों की धुनों पर थिरकते दिखाई दिए। कथा पंडाल में नृसिंह अवतार के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की झांकी का चित्रण किया गया। चतुर्थ दिवस खातेगांव विधायक आशीष शर्मा, पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व विधायक गणपत पटेल ने आरती में सम्मिलित होकर व्यासपीठ का पूजन किया। सनातन संस्कृति का इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भागवत प्रवक्ता मृदुलकृष्ण शास्त्री ने व्यासपीठ पर दुपट्टा पहनाकर कलमकार लक्ष्मीकांत जोशी, राजेश जोशी, बंटी जोशी, पवन सोनी, हरिओम तिवारी, दीपिल व्यास, बाबूलाल यादव, योगेश शर्मा, बाबूलाल गुर्जर का सम्मान कर आशीर्वाद दिया।
