देवास। श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर तुकोगंज रोड पर तीन दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव के द्वितीय दिवस धर्मसभा, नाकोड़ा भैरवजी का पूजन, सम्मान समारोह के साथ भुवनभानु की जीवनगाथा डाक्युमेंट्री का प्रदर्शन किया गया ।
यह महोत्सव टेकरी स्थित शत्रुंजयावतार आदेश्वर जैन मंदिर पर गुरूदेव भुवनभानु सूरि जी एवं नाकोड़ा भैरवजी की प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। प्रभु, गुरू एवं धर्म की सेवा करने के साथ ही साथ प्रेेरणादायी कार्य के रूप में मंदिर के अस्वस्थ कर्मचारी कैलाश सिसोदिया को संपूर्ण समाज द्वारा 2 लाख 64 हजार का आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। इस अवसर पर गुुरूदेव भुवनभानु सूरि के जीवन चारित्र पर आधारित समर्पण से मिलते हैं गुरूवर नामक विशाल धर्मसभा को उपदेशित करते हुए अनुयोगाचार्य श्री वीररत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि संत अपनी पांचों इंद्रियों से परोपकार का कार्य ही करते हैं। सच्चा संत वही है जो अच्छाई का दर्शन और सच्चाई का श्रवण करे। संत के चेहरे पर हमेशा प्रसन्नता, हृदय में दया, अंतरमन में कोमलता ओर जुबा से अमृत ही बरसता रहता है। स्वाध्याय ही संत का सच्चा सुख है। ऐसे ही गुरूदेव थे भुवनभानु सूरिश्वर जी। गुरूवर ने अपने जीवन में 108 वर्धमान ओली तपस्या की, आपके 108 शिष्य थे और आपने 108 ग्रंथोंं की रचना की। गुरूदेव की प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में हम गुरू से यही कामना करें कि आपके जीवन के सद्गुण हमारे जीवन में समाहित हो जाए और हम भी आत्मा से महात्मा ओर महात्मा से परमात्मा बनने का सफर तय कर सकें। प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि महोत्सव केे द्वितीय दिवस प्रतिष्ठा के अंतर्गत लाभ लेने वाले सभी पुण्यशालियों का सम्मान किया गया। दोपहर 12.39 बजे से प्रतिष्ठित होने वाले नाकोड़ा भैरव जी का महापूजन एवं हवन किया गया। शाम को स्वामिवात्सल्य का आयोजन हुआ । जिसका लाभ भाग्यश्री परिवार ने प्राप्त किया। रात्रि महाआरती के पश्चात भुवनभानु की जीवनगाथा वृत्तचित्र के साथ बच्चों एवं महिलाओं ने मनभावन नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।
