राज्य सरकार के वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में पिछले साल की तुलना में 28 हजार करोड़ रु. की कमी आई है। कोरोना के बावजूद स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में 48 करोड़ की कमी कर दी गई है। बड़े विभागों के बजट में 10 से 15% तक की कटौती की गई है। इससे अप्रैल-मई और जून में टैक्स कलेक्शन में 65% की कमी आई। सरकार का मानना है कि 5 माह में राजस्व संग्रहण और केंद्रीय करों में मिलने वाली राज्य की हिस्सेदारी, जीएसटी और अनुदान की राशि में कमी नहीं आई और 70 से 80 फीसदी रिकवरी हुई तो बजट में तय किए लक्ष्य प्राप्त हो जाएंगे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को इस साल के 2 लाख 5 हजार 397 करोड़ के विनियोग अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। इसे आगामी विधानसभा के सत्र में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। इसके साथ ही पिछले तीन महीने के खर्चों का लाया गया अध्यादेश निरस्त कर दिया गया है। पिछले साल 2019-2020 में 2 लाख 33 हजार करोड़ रुपए का बजट लाया गया था, जबकि वर्ष 2020-21 का बजटलाख 6 हजार 297 करोड रुपए का है। इस तरह यह पहला मौका है जब बजट में करीब 15 फीसदी तक कम हुआ है, जबकि हर साल बजट में 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होती रही है। प्रदेश में जब कोविड-19 की महामारी जब चरम पर है, तब स्वास्थ्य सेवाएं, चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग के बजट में 48 करोड़ रुपए की कटौती की गई है, जिसका स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत असर पड़ेगा। इसके साथ ही निर्माण संबंधी विभागों का बजट कम होने से नई सड़कों के निर्माण नहीं हो पाएंगे। कर्मचारियों के साल भर के वेतन मद के लिए इंतजाम किया गया है, लेकिन वेतन वृद्धि, बकाया डीए की अदायगी और एरियर की राशि के भुगतान के लिए 4 हजार करोड़ रुपए की जरूरत नहीं थी जिसका अतिरिक्त प्रावधान नहीं किया गया है।
