देवास। शहर में सुतार बाखल स्थित श्री चंदाप्रभु माणिभद्र जैन श्वेतांबर मंदिर में आज शुक्रवार को श्री पद्मावति माता जी की शुक्रवारीय आरती समन्वय संघ के प्रेरक राष्ट्रीय संत आचार्य प्रवर प.पू. डॉ श्री दिवानन्दसुरीश्वर जी महाराज साहब की पावन नीश्रा में संपन्न हुई जिसमें बड़ी संख्या में जैन श्री संघ के लोग उपस्थित थे।
आरती के पूर्व महाराज साहब ने मंदिर जी में मौजूद लोगो को प्रवचन भी दिए। प्रवचन में महाराज साहब ने कहा कि कुल 108 देवियां है। जिसमे से ही एक पद्मावती देवी हे। पद्मावती देवी सुख समृद्धि और लब्धि देने वाली है। सुख समृद्धि और लब्धि प्राप्त करने के लिए पद्मावती देवी की आराधना करनी चाहिए। इस अवसर पर महाराज साहब ने भक्ति के साथ मंत्रो के जाप भी कराए। महाराज साहब ने कहा आज के समय में व्यक्ति पैसे कमाता तो है फिर यह कहता है की मै पैसे तो कमाता हूं परंतु बरकत/लब्धि ही नही रहती इस पर महाराज सा ने कहा कि व्यक्ति के पास बरकत/लब्धि न होने का कारण उसकी इच्छा शक्ति है। व्यक्ति के पास जैसे ही पैसा आता हे वह अपने जीवन में अधिक सुख की तलाश करने और मनोरंजन के लिए अधिक खर्च करता है जो उसके पास हे और पर्याप्त है परंतु पैसे आ जाने पर वह उससे भी और अच्छा प्राप्त करने की और बढ़ता है। जिस वजह से वह पैसा तो खूब कमाता है परंतु बचता कुछ नही। इस पर महाराज सा ने कहा कि अगर मनुष्य अपनी ईच्छा शक्ति पर काबू करे तो उसके पास भी पैसों की बरकत/लब्धि बनी रहेगी। महाराज सा ने कहा हमारी इच्छा शक्ति पर हमारा काबू देखो में आज भी ऐसे ही सफेद रंग के वस्त्र पहनता हूं जैसे 30 वर्ष पहले पहनता था। आज के समय में तो व्यक्ति दिन में 2 से 3 बार कपड़े बदलता है और अगर घर में शादी/समारोह हो तो पांच बार तक भी। इसके बाद महाराज सा. ने पद्मावती देवी की आराधना के सही तरीके और धर्म से जुड़ी अनेक बाते कही। आयोजन में जैन श्री संघ के श्रद्धालु भारी संख्या में उपस्थित रहे।















