गायत्री शक्ति पीठ पर नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन।

देवास हाटपिपलिया(नरेंद्र चौहान) – स्थानीय गायत्री तीर्थ पर नौ दिवसीय गायत्री अनुष्ठान और नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन विजयादशमी पर्व पर हुआ।
मुख्य अतिथि इंदौर जोन के प्रभारी श्री कृष्ण शर्मा थे। अतिथियों का स्वागत मूलचंद पांचाल, ने पुष्पहार और शाल ओढ़ाकर किया।
मुख्य अतिथि श्री शर्मा जी ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि धर्म की महत्ता आचरण में है एवं सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।
यज्ञ का संचालन करते हुए मनोहर गुरु ने कहा व्यक्ति परिवार और समाज में असूर प्रवृत्तियों की वृद्धि ही अनर्थ पैदा करती है। रावण अर्थात असुरता कुविचार, दुर्बुद्धि, दुष्ट प्रवृत्तियों के संचय का नाम रावण है।
अब कोई रावण सीता रूपी देव संस्कृति का हनन न करने पाए यही है विजय दशमी पर्व का संदेश। विजयदशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, पशुता पर मानवता, बुराइयों पर अच्छाइयां, असुरत्व पर देवत्व की विजय का पर्व है। महायज्ञ की पूर्णाहुति में सभी परिजनों ने साधना, स्वाध्याय, संयम और सेवा को जीवन में अपनाने और दुर्गुणों को छोड़ने का संकल्प लिया।
युग संगीत और मंत्रोच्चार की प्रस्तुति रवि गुरु, जितेंद्र गुरु और मणि शंकर नागर ने दी।
सभी के सहयोग के लिए श्री मनोहर गुरु ने आभार व्यक्त किया और विजयादशमी की शुभकामनाएं दी।
यज्ञ समापन के पश्चात बड़ी संख्या में परिजनों ने महा प्रसाद ग्रहण किया यह जानकारी गायत्री परिवार के श्री गिरीश चंद्र गुरु ने दी।