जो अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाता है वही ‘गुरु’ – किंकर विठ्ठल रामानुज जी महाराज

देवास नगर आगमन पर महाराज श्री ने सुनाएं प्रवचनदेवास। अखिल भारत जय गुरु संप्रदाय के सर्वाधिक और ओंकार नाथ मिशन’ के संस्थापक परम पूज्यनीय गुरुदेव श्री किंकर विठ्ठल रामानुज जी महाराज का देवास नगर आगमन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में शिष्यों और भक्तों ने गुरुदेव के आशीर्वचन और दर्शन लाभ प्राप्त कर धन्य हुए। श्री किंकर विठ्ठल रामानुज जी महाराज ने गुरु मंत्र जाप समझाते हुए बताया की ‘गु’ शब्द का अर्थ है अंधेरा और ‘रु’ का अर्थ है उजाला, जो अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाता है वही ‘गुरु’ है।

उन्होंने अपने गुरुदेव परम पूज्यनीय श्री श्री सीतारामदास ओमकारनाथ देव जी महाराज के बारे में बताते हुए कहा की इसी गुरु मंत्र के जाप से उन्हें भगवान शिव और पार्वती जी के दर्शन एवं प्राप्ति हुई थी। गुरु मंत्र या किसी भी भगवान के नाम का जाप, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी, किसी भी समय जाप कर सकता है। गुरुदेव ने भगवान के नाम की महिमा पर भी विशेष जोर देते हुए बताया की राम, कृष्ण, काली, दुर्गा, शिव जो भी भगवान पसंद हो उनके नाम का जाप हर समय करना चाहिए। इस कलयुग में मात्र भगवान के नाम जाप से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त हो जाते हैं। गुरुमंत्र सभी के लिए जनरल प्रिस्क्रिप्शन की तरह है। गुरु की कृपा से कुंडलिनी शक्ति मूलाधार चक्र में जागृत होती है, जो मेरुदंड से  होती  हुई  ऊपर  की और उर्ध-गमन करती हुई स्वाधिष्ठान चक्र, आज्ञा चक्र और आदि चक्रों को पार करते हुए अंत में जब मस्तिष्क में पहुंचती है तो सहस्त्रार चक्र में शिव और शक्ति का मिलन होता है, और यही परमात्मा या इष्ट या भगवान की प्राप्ति है। देवास प्रवास के दौरान महाराज  श्री गायत्री मंदिर के पास साकेत नगर में ठा. योगेंद्र सिंह चावड़ा के निवास पर भी पधारे और उन्होंने शिष्यों और भक्तों का उद्धार और कल्याण किया। इस अवसर पर पूज्य महाराज श्री का समस्त चावड़ा परिवार ठिकाना पटाड़ी द्वारा स्वागत व सम्मान कर आशीर्वाद लिया गया। 

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