देवास: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर की बसों में सफर करने वाले दिव्यांगजनों के लिए किराए में 50% की भारी छूट देने का ऐलान किया है। परिवहन विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि यह आदेश अभी तक बस मालिकों तक पहुँचा ही नहीं है, वहीं बस संचालकों ने इस छूट के बदले राज्य सरकार से टैक्स में राहत की मांग कर दी है।
क्या है सरकार का आदेश?
परिवहन आयुक्त मुकेश जैन द्वारा सभी क्षेत्रीय, अतिरिक्त क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों (RTO/DTO) को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं:
- UDID कार्ड अनिवार्य: दिव्यांगजनों को किराए में 50% की छूट का लाभ लेने के लिए अपना यूनीक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा।
- परमिट होगा रद्द: यदि कोई बस संचालक या कंडक्टर कार्ड देखने के बाद भी छूट देने में आनाकानी या बहानेबाजी करता है, तो उस बस का परमिट तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।
- लाभार्थियों की संख्या: इस महत्वपूर्ण योजना से मध्य प्रदेश के करीब 15.5 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल: “कागजों में उलझा आदेश”
इस मामले में कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “दिव्यांगजनों को किराए में छूट देने संबंधी आदेश तो भोपाल से जारी हो गया है, लेकिन हकीकत यह है कि यह आदेश अभी तक बस मालिकों तक पहुँचा ही नहीं है।”
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि इस योजना का सीधा लाभ दिव्यांगजनों को तभी मिल पाएगा, जब सरकार बस मालिकों के साथ बैठकर इस योजना का धरातल पर उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करे।
बस मालिकों की दो टूक: “हमें भी चाहिए टैक्स में छूट”
सरकारी आदेश और कांग्रेस के आरोपों के बीच बस ऑपरेटरों ने अपना अलग पक्ष रखा है। देवास बस ऑपरेटर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
बस संचालकों ने सरकार के सामने अपनी एक बड़ी मांग रख दी है:
“हमारी बसों में रोजाना औसतन 10 से 20 दिव्यांगजन सफर करते हैं। अगर हम उन्हें किराए में 50% की छूट देते हैं, तो इससे होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार को हमें भी टैक्स (Tax) में छूट देनी चाहिए।”
















