• परमात्मा पुण्य का पावर हाऊस है- जैनाचार्य श्री विजय मुक्तिप्रभसूरिजी
देवास। मध्यप्रदेश का प्रांत प्राचीन जैन मंदिरों व जैन तीर्थो की भूमि है। इस में देवास का भी बड़ा स्थान है। देवास शहर में श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन शासन ज्योर्तिधर-परमशासनप्रभावक-बीसवीं सदी के सुप्रसिद्ध महान जैनाचार्य श्री विजयरामचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. के समुदाय के वरिष्ठ जैनाचार्य श्री विजय मुक्तिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., जैनाचार्य श्री विजय अक्षयभद्रसूरीजी म.सा. एवं जैनाचार्य विजय पुण्यप्रभसूरिजी म.सा. आदि करीबन 50 जैन साधु-साध्वी भगवंतों का 19 मार्च को देवास नगर आगमन हुआ। प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि देवास जैन संघ के ट्रस्टी व युवक सयाजी द्वार पर जैनाचार्यो का स्वागत करने हेतु उपस्थित हुए।
शहर के प्राचीन जिनालयों के दर्शन करते हुए सुबह 8 बजे श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ जैेन श्वेताम्बर मंदिर पहुंचे। विजय रामचंद्र सूरीश्वरजी आराधना भवन में जैनाचार्यो ने स्थिरता की। सुबह 9.30 बजे जैनाचार्यो की उपस्थिति में धर्मसभा का मंगल प्रारंभ हुआ। मुक्ति प्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने मंगल प्रवचन में बताया कि अपनी आत्मा दूध जैसी है। दूध में से दही बन सकता है। मक्खन बन सकता है ओर घी भी बन सकता है। दूध से ज्यादा कीमत दही की है, दही से ज्यादा कीमत मक्खन की है और मक्खन से भी ज्यादा कीमत घी की होती है। इसी प्रकार से आत्मा धर्मात्मा बन सकती है, महात्मा बन सकती है एवं परमात्मा भी बन सकती है। आत्मा को क्या बनना है वह अपनी समझदारी से अपेक्षित है। परमात्मा पुण्य का पावर हाऊस है। इसलिए परमात्मा से आत्मा जुड़ जाएगी तो परमात्मा में भरा हुआ पुण्य का पावर हाऊस अपनी आत्मा में प्रवाहित हो जाएगा। भूतकाल में किये हुए पुण्य के प्रभाव से ही हमें वर्तमान में सुख की प्राप्ति होती है। लेकिन यदि हम उस पुण्य का उपयोग करते ही जाएंगे, नया पुण्य उपार्जित नहीं करेंगे तो भूतकाल का किया हुआ पुण्य निश्चित ही समाप्त होता जाएगा और हम दुख की ओर अग्रसर हो जाएंगे। जिस प्रकार गाड़ी चलती है तो पेट्रोल खत्म होता जाता है, यदि उसमें नया ईंधन नहीं डालेंगे तो एक समय आएगा जब गाड़ी बंद हो जाएगी। उसी प्रकार हमें भी जीवन में समय समय पर पुण्य का ईंधन डालने की की सख्त आवश्यकता है।
युवा प्रवचनकार पन्यास श्री पुण्यरक्षित विजयजी म.सा. ने परमात्मा भक्ति की महिमा विषय में कहा कि जिस तरह बिना भोजन अपने शरीर में शक्ति नहीं आती उसी तरह भक्ति बिना अपनी आत्मा की मुक्ति होने वाली नहीं है। परमात्मा ही मुक्ति की दूती है। प्रभुु के प्रति प्रेम एवं अहोभाव जाग्र्रत करके ही प्रभु भक्ति से जुड़ा जा सकता है। भगवान के साथ अपना संबंध परमानेंट होना चाहिये। शार्ट टाईम का नहीं। तालाब में पानी के साथ भैस का संबंध शार्र्ट टाइम का होता है लेकिन पानी के साथ मछली का संबंध जन्म से मरण तक का परमानेंट होता है। अपने जीवन में सिर्फ दुख में नहीं किंतु सुख में भी भगवान को भूलना नहीं चाहिये। विजय रामचंद्रसूरीश्वरजी आराधना भवन के विजय यशोदेवसूरि प्रवचन हॉल का पूरा हॉल श्रावक श्राविकाओं से भर गया था। जैनाचार्यो के धर्मप्रवचन से हर्षोल्लास का अपूर्व माहौल था। तत्पश्चात हुए युवा शिविर में पन्यासी महाराज का जैन कहा क्यूंं होवे विषय पर युवाओं एवं श्रावक भाईयों के लिये प्रेरणादायी प्रवचन हुआ। जैनाचार्य अहमदाबाद से कोलकाता तक करीबन 2 हजार किमी पैदल यात्रा कर रहे हैं। हर शहर-गांव में पदार्पण व प्रवचन से जैन धर्म की बड़ी प्रभावना हो रही है। देवास जैन संघ की ओर से जैनाचार्यो को पुन: देवास पधारने का आग्रह किया गया। श्री संघ की ओर से ट्रस्ट मंडल ने जैनचार्यो को काम्बली अर्पित की।














