फिल्म देखने उमड़ रही भारी भीड़, टॉकीज में बढ़ाए गए शो
देवास। देशभर के साथ साथ देवास में भी द कश्मीर फाईल्स एक जन आन्दोलन बनकर उभर रही है। वर्ष 1990 में आतंकवादियों, अलगाववादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों पर किये गये अत्याचार, नरसंहार को दर्शाती विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म को देखने के लिये शहर के अभिनव टॉकीज में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
11 मार्च को रिलीज हुई द कश्मीर फाईल्स के दो शो चलाए जा रहे थे। एक शो दोपहर 12 बजे एवं दुसरा रात्रि साढ़े 9 बजे दिखाया जा रहा था, लेकिन दर्शकों की भारी भीड़ के चलते वर्तमान में
दिनभर में फिल्म के चार शो चलाए जा रहे है। युवा एवं पुरूष वर्ग ही नहीं महिलाएॅ भी बड़ी संख्या में फिल्म देखने पंहुच रही है। लगभग तमाम सोशल साईट्स फिल्म के प्रचार प्रसार एवं विविध प्रकार की प्रतिक्रियाओं से भरी पड़ी हुई नजर आ रही है। सोशल माध्यमो से यह भी व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है कि द कश्मीर फाईल्स को किसी लिंक के माध्यम से नहीं देखी जाए, बल्कि टॉकीज में जाकर ही देखे, ताकि यह फिल्म कमाई के सारे रिकार्ड तोड़कर उन लोगो को करारा जवाब दे, जिन्होने इसका प्रमोशन तक करने से इंकार कर दिया। लोगो द्वारा समूह बनाकर 50 से लेकर 100-150 तक टिकट एक साथ खरीदे जा रहे है। अनेक लोग तो ऐसे थे, जिन्होने पिछले 30-35 वर्षो से टॉकीज में फिल्म नहीं देखी। विविध संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओें, युवा विद्यार्थियों के साथ ग्रामीणंचल से भी बड़ी संख्या में लोग फिल्म देखने आ रहे है। जो लोग फिल्म देखकर टॉकीज से ठंडी श्ंवास लेते हुए निकलते, कुछ बोल पाने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे है। कई दर्शकों की आंखो में तो आंसु तक भरे दिखाई दे रहे है। रिलीज होने के साथ ही तमाम सोशल मीडिया पर इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया गया।
शहर में तमाम संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा इस फिल्म को बड़ी संख्या में जा कर देखा जा रहा है।
देवास प्रेस क्लब के सदस्यों द्वारा बड़ी संख्या में इस फिल्म को देखा गया।

भारत तिब्बत समन्वय संघ के सैकड़ों कार्यकर्ता फिल्म देखने पहुंचे।

बीटीएसएस के प्रांत महामंत्री निर्माण सोलंकी अफसोस प्रकट करते, रूंघे हुए गले से इक्का दुक्का दर्शक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कह रहे है कि द कश्मीर फाईल्स 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के 43 वर्षो बाद हिन्दू समाज की फूटी हुई तकदीर को बयॉ करती है। सपरिवार फिल्म देखने गये व्यवसायी पवन विजयवर्गीय केन्द्र एवं राज्य की सरकारों द्वारा कश्मीरी पंडितों को आंतकियों, अलगाववादियों के हाथो लूटने, पीटने, मरने के लिये बेसहारा छोड़ दिया गया था। सिर्फ तत्कालीन सरकारों एवं राजनेताओं ने ही नहीं अपितु कश्मीर में लागू धारा 370 भी समाज के उत्पीड़न का कारण बनी, जिसे वर्तमान सरकार द्वारा हटाया गया। उनके साथ फिल्म देखकर निकले पवन खंडेलवाल कहते है कि सिर्फ इतना ही नहीं उसके बाद की युवा एवं छात्रपीढ़ी को झुठा इतिहास पढ़ाते, कश्मीर की कड़वी सच्चाई को छिपाते हुए दिग्भ्रमित किया गया। आतंकवादियों द्वारा बच्चे, बुढ़े, जवान, स्त्रियों को एक पंक्ति में खड़ाकर गोलियों से भून दिया गया और षड़यंत्रपूर्वक इस दुष्कृत्य का दोषारोपण भारतीय सेना पर किया जाता रहा। द कश्मीर फाईल्स इस असत्य का पर्दाफाश करते हुए सच्चाई से अवगत कराती है। बीटीएसएस के अन्य कार्यकर्ता बताते है कि द कश्मीर फाईल्स एक और जहां विघटनकारी राजनीति के दुष्परिणाम स्वरूप कश्मीर में निर्दोषो के लहूलूहान दूश्य को चित्रित करती है, वहीं कश्यप ऋषि जिनके कारण कश्मीर का नामकरण हुआ एवं जगदगुरू शंकराचार्य की तपस्थली एवं हिन्दू तीर्थो का उल्लेख करते हुए इस सत्य से भी अवगत कराती है कि कश्मीर सदियों से भारतवर्ष का अभिन्न अंग रहा है।
भाजपा महिला मोर्चा की सैकड़ों कार्यकर्ता ने देखी “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म

देवास। बुधवार को भाजपा महिला मोर्चा की सैकड़ों महिला कार्यकर्ता उज्जैन रोड स्थित टॉकीज में “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म देखने पहुंची। भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल और भाजपा जिला महामंत्री राजेश यादव की उपस्थिति में सभी ने भारत माता की जय वंदे मातरम और कश्मीर हमारा है के नारे लगाए।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने कहा कि हमने महिला शक्ति से आग्रह किया था कि कश्मीर का जो सच है उसे जानने के लिए “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म जरूर देखें और सभी माता बहनों से भी आग्रह करें जिसको लेकर आज महिला मोर्चा मंडल की कार्यकर्ता एवं छात्राएं फिल्म देखने आई है। वहीं उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में टॉकीज में जाकर ही देखना चाहिए जिससे राष्ट्रवाद को भी बढ़ावा मिले और ऐसी फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर का भी प्रोत्साहन हो।














