देवास। जिले सहित शहर में बीते 2 सालों से आपराधिक गतिविधियों का आलम चरम सीमा पर जारी है अब तक ज़िले में बलात्कार, चोरी, चाकूबाजी की घटना देखने को मिलती आ रही है परन्तु बीते दिनों शहर के जिला अस्पताल में महज 3 दिन की नवजात बच्ची की चोरी की घटना सामने आई है।

बता दे कि गुरुवार देर रात शाजापुर निवासी दंपति की 3 दिन की नवजात बच्ची को जिला अस्पताल से अज्ञात लोगों द्वारा अपहृत कर लिया गया। जैसे ही शुक्रवार सुबह घटना का पता चला ज़िला प्रशासन में खलबली सी मच गई।

परिजनों द्वारा AB रोड पर चक्काजाम कर जमकर विरोध किया गया। देखते ही देखते बच्ची चोरी की घटना सुनते ही राजनैतिक दल, स्थानीय नागरिक घटना की विरोध में उतर आए व कलेक्टर, एसपी सहित तमाम अधिकारी सक्रिय हो गए।

बच्ची के परिजन द्वारा स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही व पैसे मांगने का आरोप लगाया गया। शुक्रवार सुबह 10 बजे भाजपा व कांग्रेस ने कार्यकर्ता विरोध करने पुनः AB पर उतर गए नारेबाजी कर चक्का जाम किया गया।

विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे बढ़ने लगा व CMHO के अनुपस्थिति पाए जाने और CMHO कार्यालय पर ताला भी लगाया गया। एक तरफ जहाँ नागरिकों द्वारा विरोध किया जा रहा था व प्रशासन द्वारा घटना की जांच की जा रही है। दोपहर को सेन समाज के कार्यकर्ताओं द्वारा इस मामले में कलेक्टर से कार्यवाही की मांग की गई।


कलेक्टर द्वारा जांच के लिए 27 दलों का गठन करा गया व सीएमएचओ डॉ. एमपी शर्मा और सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. विजय कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया व आरएमओ डॉ मनोहर सिंह गौसर एवं नर्सिंग ऑफिसर सुश्री पूजा रोजे को अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही/उदासीनाता एवं गंभीर अनियमितता बरतने पर निलंबित किया । कलेक्टर शुक्ला ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जो भी लापरवाही करेगा उस पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। कलेक्टर शुक्ला ने जिला चिकित्सालय में बेहरत सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे शीघ्र ठीक करने के निर्देश भी दिये है।
कलेक्टर श्री शुक्ला ने जिला चिकित्सालय देवास में प्रसूति वार्ड में बच्चा गुम होने की घटना घटित होने पर अस्पताल में प्रशासकीय नियंत्रण, सुरक्षा एवं अन्य बेहतर व्यवस्था के लिए एसडीएम श्री प्रदीप सोनी को जिला चिकित्सालय का प्रशासकीय अधिकारी नियुक्त किया है।

बता दे कि बीते साल ही जिला अस्पताल का लाखो रुपए की लागत विकासीकरण/ कायाकल्प किया गया था। ज़िला अस्पताल में लगातार अनियमितताओं का आलम जैसे भ्रष्टाचार, दवाई चोरी सहित कार्य मे लापरवाही देखी जाती थी। परन्तु अब नवजातों का चोरी होने बहुत ही निंदनीय है, लाखो रुपए cctv व सुरक्षा और खर्च किए जाते है परन्तु न cctv सही से काम कर रहे न ही सुरक्षा गार्ड, ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिला अस्पताल के जिम्मेदार क्या कर रहे है ?

घटना में बाद एक तरफ कलेक्टर द्वारा घटना की निंदा करते हुए बच्ची को तलाशने के आश्वासन दिया गया वही पुलिस द्वारा cctv फुटेज भी तलाशी गयी व देर रात एसपी ने जिला अस्पताल का निरक्षण भी किया व जो सुराग मिले है उनकी जांच भी की। परन्तु ज़िला अस्पताल के जिम्मेदार कहे जाने वाली CMHO शर्मा पूरी घटना में न कही दिखे और न कोई बयान दिया ऐसे में CMHO की कार्यशैली पर बहुत से सवाल खड़े होते है, सोशल मीडिया पर CMHO की कार्यशैली पर बहुत से सवाल खड़े हुए है व निलंबित की मांग भी की गई है। फिलहाल पुलिस को घटना के पुख्ता सुराग मिले है। पुलिस अधीक्षक शिवदयाल सिंह ने जांच के बाद जल्द ही घटना का खुलासा करने का कहा है।















