देवास। मध्यप्रदेश के बजट में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा नहीं होने से प्रदेश के कर्मचारियों में निराशा है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि राजस्थान सरकार एवं अन्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा कर देना के बाद मध्यप्रदेश में भी पुरानी पेंशन लागू कर दी जाएगी, किंतु मध्यप्रदेश के बजट में वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने पुरानी पेंशन पर कोई विचार नहीं किया। जबकि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों के लिए जारी बजट में पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर दी गई।
उक्त जानकारी देते हुए पुरानी पेंशन बहाली संघ मध्यप्रदेश के जिलाध्यक्ष सहज सरकार ने बताया कि वर्ष 22 के बजट से मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को काफी उम्मीद थी, किंतु बजट सत्र में पुरानी पेंशन बहाली संबंधी में कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों में रोष व्याप्त है और यह आक्रोश आने वाली 13 मार्च को भोपाल में दिखेगा।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2005 से मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन योजना लागू कर दी गई, जिसके तहत कर्मचारियों के कुल वेतन का 10 प्रतिशत अंशदान कर्मचारी का तथा 12 प्रतिशत अंशदान शासन की ओर से मिलाकर शेयर मार्केट में लगा दिया जाता है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य शेयर मार्केट पर निर्भर हो गया है।
रिटायरमेंट के समय कुल जमा राशि का 60 प्रतिशत कर्मचारी को नगद दिया जाता है, जिस पर आयकर भी लगता है तथा शेष 40 प्रतिशत राशि के ब्याज से कर्मचारियों को पेंशन दी जाती है। इस नई पेंशन योजना के तहत रिटायर होने पर कर्मचारी को 600 से लेकधयर 1200 रुपए प्रतिमाह तक पेंशन मिलती है जो उनके जीवन यापन के लिए बहुत ही कम है। जिससे वृद्धावस्था में सेवानिवृत्ति के पश्चात कर्मचारी को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। वही पुरानी पेंशन योजना यदि लागू कर दी जाती है तो कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे अंतिम वेतन का आधा पेंशन के रूप में मिलता है तथा समय-समय पर महंगाई भत्ता भी बढ़ता है जिससे रिटायरमेंट के पश्चात कर्मचारी आसानी से अपना जीवन यापन कर सकते हैं।
पुरानी पेंशन योजना सरकारी कर्मचारियों के लिए बंद कर दी गई, किंतु माननीय सांसदों और विधायकों के लिए अभी भी पुरानी पेंशन योजना ही लागू है यदि कोई जनप्रतिनिधि 1 दिन के लिए भी विधायक अथवा सांसद बनता है तो उसे पुरानी परिवार पेंशन दी जाती है, जबकि आजीवन सरकार की सेवा करने वाले कर्मचारी से यह हक छीन लिया गया है। इतना ही नहीं रक्षा सेवा में लगे बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवानों को भी पुरानी पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा जो कतई न्यायोचित नहीं है।
जिला संघ के पदाधिकारी वर्षा सिंह, जितेंद्र सिंह ठाकुर, नीला रायकवार, हंसा चौधरी, मनोज चौधरी, कमल सोलंकी, दुर्गेश जाजू, साबिर शेख, जितेंद्र मालवीय, अर्जुन सिंह चावड़ा, हिमरत सिंह तोमर, नफीस खान, केदार सांवले, नंदकिशोर दय्या, सुरेश रानिया, ओमप्रकाश जाट, योगेश जाट, मनोज उपाध्याय, साजिदा परवीन, परवीन शेख, दुर्गा जोशी, रीना विजयवर्गीय, अनिता सोलंकी, मोहम्मद हुसैन, अंजली खरडीकर, नेहा देशपांडे, सुनीता खत्री, सीमा चौधरी, चंद्रभान सिंह चौहान, महेश राठौर, राजेंद्र चौहान, गजेंद्र परमार, निजाम कुरैशी, राधेश्याम गहलोत, विक्रम मालवीय, रिजवाना खान, संतोष बारोलिया, विशाल गुप्ता, प्रकाश वर्मा, वीना गोलेच्छा, राधेश्याम सोलंकी, सुमित्रा परमार, इंदराज मोहन, लाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह सेंधव, अजय श्रीवास्तव, धर्मेंद्र सिंह सेंगर, जितेंद्र देथलिया, माखनलाल कुंभकारा, गिरधारी लाल चौहान, अजय वर्मा, हजारीलाल चौहान, शेखर देथलिय सहित देवास जिले के समस्त पेंशन विहीन अधिकारी कर्मचारियों ने प्रदेश के पेंशन विहीन अधिकारियों कर्मचारियों से अपील की है कि 13 मार्च को भोपाल के नेहरू नगर स्थित कलियासोत ग्राउंड में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को मजबूती प्रदान कर मध्यप्रदेश सरकार को कर्मचारी हितों के रक्षण हेतु तत्काल योग्य निर्णय हेतु शांतिपूर्ण आंदोलन को सफल बनाएं।
