मध्यप्रदेश मे खाली पड़े सरकारी मकान प्रवासी मजदूर अन्य श्रमिक व निम्न आय वर्ग के लोगों को न्यूनतम किराए पर मिलेंगे

मध्यप्रदेश में अब बाहरी राज्य के प्रवासी मजदुर व अन्य श्रमिकों के साथ निम्न आय वर्ग के लोगों को सरकार के सरकारी खाली पढ़े एलआईजी-ईडब्ल्यूएस मकान किराए पर मिलेंगे। यह सारे मकान राजीव गांधी आवास योजना और जेएनएनयूआरएम के तहत बनने के बाद से ही खाली पड़े हैं। राज्य सरकार इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के मॉडल पर संचालित करेगी। मध्यप्रदेश कैबिनेट ने इस अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम को 8 सितंबर को मंजूरी दे दी। फिलहाल रिक्त पड़े मकान इंदौर, ग्वालियर और सागर शहर में हैं। इनकी संख्या लगभग 500 के करीब है। स्कीम में उन्हीं रिक्त मकानों को लिया जा रहा है, जो पूरे टावर में खाली हों। नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पीपीपी मॉडल में निजी संस्था को 25 साल के लिए पूरा टावर दिया जाएगा। इसके मेंटेनेंस व संचालन का जिम्मा भी निजी संस्थान का ही होगा। संस्थान गरीबों से न्यूनतम किराया लेगी। किराया की दर ज्यादा न हो इसलिए इस पर विभाग भी नजर रखेगा। इस स्कीम में एक और मॉडल रखा जाएगा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस बनाना चाहे और किराए पर श्रमिकों को दे तो अप्रोच रोड, पेयजल के साथ सीवेज व अन्य मूलभूत सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी। इसका नियमानुसार शुल्क लिया जाएगा।