रामचरित्र मानस भारतीय धर्म व संस्कृति का प्रतिबिम्ब है- लखन महाराज
देवास। नौ दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ गुरूवार को मालीपुरा में हुआ। आयोजक पूर्व पार्षद सत्यनारायण माली ने बताया कि सर्वप्रथम पोथी व कलश यात्रा निकली गई। जो मालीपुरा गणेश मंदिर से विशेष पूजा अर्चना के पश्चात प्रारंभ हुई। नगर के प्रमुख मार्गो से बैण्ड बाजे के साथ श्री माली समाज धर्मशाला कथा स्थल पर पहुंची।
शुभारंभ अवसर पर व्यासपीठ पर विराजित होकर पंडित लखन जी महाराज ने धर्मालुजनों को रामकथा के महत्व से परिचित कराते हुए कहा कि रामचरित्र मानस भारतीय धर्म व संस्कृति का प्रतिबिम्ब है। रामचरित मानस केवल एक ग्रंथ नही, बल्कि आर्यावृत्त की धर्म व संस्कृति को प्रकट करने वाला विशिष्ट पुराण है। रामचरित मानस की रचना कर महर्षि तुलसीदास जी ने भारतवासियो पर अंनत उपकार किया है। यह ग्रंथ शिव व हरी विष्णु की महिमा को एकाकार करने की प्रेरणा देता है।
रामचरित मानस में शिव व पार्वती की कथा एवं उसके बाद प्रभु श्रीराम की कथा दोनो ग्रंथ में समाहित है। आपने कहा कि जो भी धर्मालुजन रामचरित मानस की पौथी का पूरे मन वचन काया से पूजन करते है तथा आपने अपने घरो में इसका पाठ करते है। उन्हे प्रभु शिव व प्रभु राम दोनों की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में जब भी रामकथा सुनने का अवसर मिले उस अवसर को नहीं चुकने दे। प्रभु राम भारत की भूमि पर निवास करने वाले करोडो लोगों की आस्था व विश्वास के प्रतीक है। श्रीरामकथा 11 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 1.30 से शाम 4.30 बजे तक चलेगी। कथा में आज शिव विवाह एवं शिव पार्वती संवाद का सचित्र प्रसंग होगा। आयोजक मण्डल के नितिन भारती, राहुल माली सहित समस्त सदस्यों ने श्रद्धालु भक्तों से कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।














