देवास। धर्मनगरी देवास के पांच युवाओं ने जैन धर्म के शाश्वत सर्वोच्च तीर्थ पालिताणा (गुजरात) की पावन धरा पर कठिन तपस्या कर नगर का गौरव बढ़ाया है। इन तपस्वियों ने सिद्धाचल (पालीताणा) पर्वत पर ‘चौविहार छठ’ (दो दिवसीय निर्जला उपवास) कर सात यात्राएं 7 बार पर्वत पर चढ़कर और उतर कर पूर्ण कर अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया।
रेलवे स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब

तपस्या पूर्ण कर नगर आगमन पर प्रणीत अमित जैन, उत्कर्ष मुकेश तरवेचा, दीपेश विनोद जैन, वर्धन राजेश जैन एवं पारस सतीश जैन का रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया। देवास श्री संघ के सदस्यों ने ढोल-धमाकों, रंग-गुलाल और पुष्पहारों के साथ तपस्वियों की अगवानी की। समाजजनों में युवाओं की इस कठिन साधना को लेकर भारी उत्साह देखा गया।
मंदिर जी में हुआ पाद-प्रक्षालन

स्टेशन से तपस्वी सीधे श्री आदेश्वर मंदिर पहुंचे, जहां भक्तिमय वातावरण में वरिष्ठों द्वारा तपस्वियों के पाद-प्रक्षालन (पैर धोने की विधि) किए गए। यह दृश्य अत्यंत भावुक और श्रद्धा से भरा था। इस अवसर पर तपस्वियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भगवान आदिनाथ की भक्ति और मन की दृढ़ता से ही यह कठिन साधना संभव हो पाई।
सेवाभावी युवाओं का सम्मान

तपस्या को निर्विघ्न पूर्ण कराने में सहयोगी रहे श्री अभिषेक जैन एवं श्री विकास जैन की वैयावच्च (सेवा) की भी समाज ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। श्री आदेश्वर ट्रस्ट मंडल ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और तप की शक्ति की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के पदाधिकारी, आदेश्वर ट्रस्ट मंडल के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में तपस्वियों की ‘बारंबार अनुमोदना’ की और युवाओं को धर्म से जुड़कर आगे के भविष्य को उज्जवल बनाने का आशीर्वाद दिया। उक्त जानकारी भरतेश जैन ने दी।
















