लॉकडाउन के साथ 24 मार्च को बंद हुए धर्मस्थलों के दरवाजे 189 दिन बाद मंगलवार को आम भक्तों के लिए खोल दिए गए। कलेक्टर मनीष सिंह ने सोमवार शाम आदेश जारी कर कहा कि आमजन सोशल डिस्टेंसिंग के साथ, मास्क लगाकर दर्शन, प्रार्थना कर सकते हैं। मंदिर के पट खुलते ही सुबह से ही भक्तों का मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इंदौर में खजराना गणेश, रणजीत हनुमान मंदिर, बड़ा गणपति सहित सभी मंदिरों में भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन किए। इंदौर के साथ ही उज्जैन में भी बाबा महाकाल मंदिर परिसर स्थित अन्य मंदिर दर्शन के लिए खोल दिए गए। हालांकि कोरोना को देखते हुए तिलक लगाने और नाड़ा बांधने की मनाही है। कलेक्टर के आदेशानुसार मंदिर में जाने वाले भक्तों और पुजारियों को कोविड-19 के नियमों का पालन करना होगा। जिसमें भक्तों के बीच 2 गज की दूरी गर्भगृह में प्रवेश पर मनाही है। सभी भक्तों, पुजारी के लिए अनिवार्य होगा कि वह मास्क ठीक से नाक के ऊपर लगाएं, गर्भगृह में प्रवेश नहीं होगा और एक दूरी बनाकर
ही दर्शन कर सकेंगे। धर्मस्थलों पर चलने वाले अन्न क्षेत्र भी शुरू होंगे, लेकिन छह फीट की दूरी रखना जरूरी होगा। सैनिटाइजर भी रहेगा, हाथ धोना अनिवार्य रहेगा। महाकाल परिसर के भी सभी मंदिर खुले सहायक प्रशासक प्रेम नारायण उदेनिया ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते महाकाल मंदिर के साथ-साथ मंदिर परिसर के सभी मंदिरों पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे मंगलवार से हटा लिया गया। श्रद्धालु अब बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में बने सिद्धि विनायक, राधा कृष्ण, नवग्रह मंदिर व अन्य मंदिरों में पूजन-अर्चन और दर्शन का लाभ ले सकते हैं। अब एक बार फिर महाकाल मंदिर प्रांगण में रौनक दिखने लगी है। वहीं, मंदिर परिसर में घूमने व दर्शन के
दौरान सभी दर्शनार्थियों, कर्मचारियों, पुजारी, पुरोहितों को कोविड-19 के सभी सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। हालांकि तिलक लगाने और नाड़ा बांधने की मनाही है।














