प्रीमीयर कंपनी के बंद होने से नाराज मजदूरों ने कलेक्ट्रेट में किया विरोध प्रदर्शन
उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक कर हिसाब जलाएं – एआई यूटीयूसी
देवास। देवास जिले के औद्योगिक क्षेत्र का हाल बेहद चिंताजनक होता जा रहा है कंपनी मालिक केवल अपने मुनाफे को पक्का करने के लिए आए दिन मजदूरों को नौकरी से निकाल रहे हैं या अपनी कंपनी कानूनों का उल्लंघन कर बंद कर मजदूरों का बकाया पैसा सब खा रहे हैं। प्रीमीयर कंपनी की भी कुछ ऐसी दास्तान है जिसके विरोध में आज कंपनी के तमाम समय को ने कलेक्टर कार्यालय में विरोध प्रदर्शन कर वेतन व अन्य भुगतान जल्द से जल्द कराने की मांग की। प्रीमीयर कंपनी में काम करने वाले डेढ़ सौ से अधिक मजदूर आज बेरोजगार हो गये हैं। कंपनी के द्वारा साजिश पूर्ण तरीके से खुद को नुकसान में दिखाकर पूरा प्लांट हरियाणा शिफ्ट कर यहां के मजदूरों को ठेंगा दिखा दिया गया नियमानुसार कंपनी बंद करने की स्थिति में मजदूरों को हिसाब कर पैसा दिया जाना चाहिए था। लेकिन इस कंपनी ने मजदूरों को फरवरी माह से वेतन ही नहीं दिया। लॉकडाउन के कारण आर्थिक स्थिति खराब होने का बहाना बनाकर मजदूरों के हक का पैसा खाने वाली इस कंपनी का मंथन व अन्य नाम से खाद्य उत्पाद बाजार में भरपूर मात्रा में बिक रहा है। सभी जानते हैं लॉकडाउन के दौरान खाद्य सामग्री से जुड़ी कंपनियों ने ऊंचे दामों पर अपने सामान को बेचा ऐसे में प्रीमियर कंपनी खुद को घाटे में बता रही है। यह बात एआईटीयूसी के जिला अध्यक्ष हिमांशु श्रीवास्तव ने विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहि। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला सह सचिव ओम प्रकाश अहिरवार ने कहा कि आज तमाम सरकारें केवल कंपनियों के हित के लिए नियम कानून बना रहे हैं और जो कानून मजदूरों के हित के लिए दिखाए जा रहे हैं उनमें भी बारीक छेद छोड़े गए, ताकि कंपनियां मजदूरों का पैसा डकार सकें और उसका ही फायदा उठाकर यह कंपनी आज देवास से भाग खड़ी हुई है। इसके खिलाफ मजदूरों का आंदोलन ही एकमात्र समाधान है। आज देवास के तमाम मजदूरों को चाहे वह किसी भी कंपनी के हो, ठेके पर हो, या स्थाई नौकरी पर सबको मिलकर एक साथ आंदोलन करने की जरूरत है, ताकि सरकार ने मजदूरों के हित में सख्त कानून बनाएं और श्रम विभाग के अधिकारी कंपनियों पर मजदूरों के हित में कार्रवाई कर सके। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से मजदूरों को काम पर वापस लेने, हिसाब कर रिटायरमेंट तक का संपूर्ण वेतन देने, पीएफ वेतन ईएसआई आदि में संपूर्ण भुगतान जमा करने की मांग को उठाया गया। साथ ही जिला कलेक्टर से उच्च अधिकारी की उपस्थिति में कंपनी के साथ बैठक कर पूरे मामले को सात दिवस में निपटाने की भी मांग की गयी। ऐसा ना होने पर सड़कों पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गयी। विरोध प्रदर्शन में कंपनी के तमाम मजदूर उपस्थित थे।















