देवास। श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ मंदिर के अंतर्गत टेकरी स्थित शत्रुंजयावतार आदेश्वर जैन मंदिर पर गुरूदेव भुवनभानु सूरि जी एवं नाकोड़ा भैरवजी की प्रतिष्ठा धूमधाम से संपन्न हुई। विशाल संख्या में उपस्थित श्रद्धालु संपूर्ण महोत्सव के दौरान झूमते नाचते गाते रहे। पूज्य अनुयोगाचार्य श्री वीररत्न विजयजी, साध्वीजी विजयप्रभा श्रीजी एवं साध्वीजी स्वर्णज्योति श्रीजी केे सानिध्य में यह प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ।
प्रतिष्ठा के पूर्व विभिन्न दुर्लभ औषधियों द्वारा प्रभु का 18 अभिषेक महाविधान किया गया। इसके पश्चात विजय मुहूर्त में 12.39 बजे देव एवं गुरू की प्रतिमा को दिव्य उद्घोष केे साथ प्रतिष्ठित किया गया। गुरूदेव भुवनभानु सूरि की संपूर्ण प्रतिष्ठा का लाभ विनय विकेश प्रेमचंद जैन ने लिया। नाकोड़ा भैरवजी का देहरी निर्माण प्रमिला दलीचंद बाफना पुनावाले ने किया। भैरवजी की प्रतिमा भराने का सौभाग्य देवाशीष कोठारी एवं अशोक जैन इंदौर ने प्राप्त किया। नाकोड़ा भैरवजी की प्रतिष्ठा इंदरमल केशरीमल कैलाश कुमार भोमियाजी द्वारा की गई। संपूर्ण त्रिदिवसीय महोत्सव का आयोजन अभय सुभाष अरूण नितिन मांगीलाल जैन भाग्यश्री परिवार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उपदेशित करते हुए अनुयोगाचार्य श्री ने कहा कि इस प्रतिष्ठा महोत्सव के स्मृति रूप में हमें प्रभु से यही प्रार्थना करना है कि मंदिर के साथ प्रभु, देव एवं गुरू हमारे मन मंदिर में भी प्रतिष्ठित हो जाए। हम अभिषेक तो प्रभुुु का करते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि प्रभु तो सुविशुद्ध ही है। वास्तव में तो अभिषेक प्रभु का होता है लेकिन शुद्ध एवं निर्मल हम हो जाते हैं। प्रभु के प्रति पूूर्ण समर्पण भाव रखते हुए प्रभु को स्वयं का बनाते हुए हम स्वयं को प्रभु के समान ही बनना है, यही प्रण आज हमें यहां से लेकर जाना है।
प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर बालक एवं बालिका मंडल द्वारा प्रेरक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई साथ ही भुवनभानु की जीवन गाथा नामक प्रेरणास्प्रद डाक्युमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया।














