• यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का नि: शुल्क पंजीकरण अनिवार्य
देवास। पांच कैलाशों में से एक मणिमहेश यात्रा पारंपरिक एवं आधिकारिक तौर पर 19 अगस्त से लेकर 2 सितंबर 2022 तक होगी। यात्री/श्रद्धालु के बेस कैम्प हडसर में मैडिकल चैकअप में अस्वस्थ पाए जाने पर यात्रा पर जाने की अनुमति नही होगी।
यात्रा के लिए पंजीकरण करना अनिवार्य है बिना पंजीकरण के यात्रा करने पर किसी भी बेस कैम्प से वापिस भेजा जा सकता है।
यात्रा के लिए प्रशासन ने पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया है। शिवभक्त यात्रा के लिए पोर्टल पर अपना नि:शुल्क पंजीकरण करवा सकते हैं। सुरक्षा कारणों से मणिमहेश यात्रा के इस वर्ष सभी श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क पंजीकरण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। देवास शहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश की यात्रा पर जाते है जिसमे से एक बड़ा हिस्सा शहर के मां शिव शक्ति सेवा मंडल के सदस्यों का रहता है।
जानकारी देते हुए मां शिव शक्ति सेवा मंडल के विनोद जैन और भूपेंद्र ठाकुर ने बताया की मणिमहेश झील हिमाचल प्रदेश में प्रमुख तीर्थ स्थान में से एक बुद्धिल घाटी में भरमौर से 21 किलोमीटर दूर स्थित है। झील कैलाश चोटी पर 18,564 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हर साल, भाद्रपद के महीने में हल्के अर्द्धचंद्र आधे के आठवें दिन, इस झील पर एक मेला आयोजित किया जाता है, जो कि हजारों लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, जो पवित्र जल में डुबकी लेने के लिए इकट्ठा होते हैं। भगवान शिव इस मेले/ जातर के अधिष्ठाता देवता हैं। कैलाश पर्वत को अजेय माना जाता है। कोई भी अब तक इस चोटी को माप करने में सक्षम नहीं हुआ है, इस तथ्य के बावजूद की माउंट एवरेस्ट सहित बहुत अधिक ऊंची चोटियों पर विजय प्राप्त की जा चुकी है।
मणिमहेश झील के एक कोने में शिव की एक संगमरमर की छवि है, जो तीर्थयात्रियों द्वारा पूजी जाती जो इस जगह पर जाते हैं। पवित्र जल में स्नान के बाद, तीर्थयात्री झील के परिधि के चारों ओर तीन बार जाते हैं। झील और उसके आस-पास एक शानदार दृश्य दिखाई देता है। झील के शांत पानी में बर्फ की चोटियों का प्रतिबिंब छाया के रूप में प्रतीत होता है।
मणिमहेश विभिन्न मार्गों से जाया जाता है:

लाहौल-स्पीति से तीर्थयात्री कुगति पास के माध्यम से आते हैं। कांगड़ा और मंडी में से कुछ कवारसी या जलसू पास के माध्यम से आते हैं। सबसे आसान मार्ग चम्बा से है और भरमौर के माध्यम से जाता है। वर्तमान में बसें हडसर तक जाती हैं। हडसर और मणिमहेश के बीच एक महत्वपूर्ण स्थाई स्थान है, जिसे धन्चो के नाम से जाना जाता है जहां तीर्थयात्रियों आमतौर पर रात बिताते हैं। यहाँ एक सुंदर झरना है
मणिमहेश झील से करीब एक किलोमीटर की दूरी पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री नामक दो धार्मिक महत्व के जलाशय हैं, जहां लोकप्रिय मान्यता के अनुसार गौरी और शिव ने क्रमशः स्नान किया था | मणिमहेश झील को प्रस्थान करने से पहले महिला तीर्थयात्री गौरी कुंड में और पुरुष तीर्थयात्री शिव क्रोत्री में पवित्र स्नान करते हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान क्या करेंः-
- यात्री अपना पंजीकरण आवश्य करवाएं।
- यात्रियों से अनुरोध किया जाता है कि चिकित्सा प्रमाण पत्र अपने साथ लेकर आए तथा बेस कैम्प हडसर में स्वास्थ्य जांच आवश्य करवाएं। पूर्णतय स्वस्थ होने पर ही यात्रा करें।
- अकेले यात्रा न करें केवल साथियों के साथ ही यात्रा करें।
- चढाई धीरे-धीरे चढे, सांस फूलने पर वहीं रूक जाएं।
- छाता, बरसाती, गर्म कपडे, गर्म जूते, टार्च एवं डंडा अपने साथ आवश्य लाएं।
- प्रशासन द्वारा निर्धारित रास्तों का प्रयोग करें।
- किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धि समस्या हेतु निकटतम कैम्प में सम्पर्क करें।
- सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- दुलर्भ जडी बूटियों एवं अन्य पौधों के संरक्षण में सहयोग करेें।
- इस यात्रा को पिकनिक अथवा मौज मस्ती के रूप में न लें व केवल भक्तिभाव एंव आस्था से ही तीर्थ यात्रा करें।
- किसी भी प्रकार का दान अथवा चढावा केवल ट्रस्ट के दान पात्रों में ही डालें।
- यात्री मास्क तथा सेनिटाइजर साथ लाएं।
- कोविड-19 नियमों का पालन करें।
- यात्री अपना पहचान पत्र/आधार कार्ड यात्रा के दौरान साथ रखें।
मणिमहेश यात्रा के दौरान क्या न करेंः-
- सुवह 04 बजे से पहले और शाम 05 बजे के बाद बेस कैम्प हडसर से यात्रा न करें।
- बिना पंजीकरण एंव चिकित्सकीये रूप से फिट न होने पर यात्रा न करें।
- अपने साथियों का साथ न छोडे जबरदस्ती चढाई न चढें व फिसलने वाले जूते न पहने यह घातक हो सकता है।
- खाली प्लास्टिक की बोतलें एवं रैपर इत्यादि खुले में न फेकें बल्कि अपने साथ वापिस लाकर कूडादान में डाले।
- जडी बूटियों एंव दुर्लभ पौधों से छेड छाड न करें।
- किसी भी प्रकार के नशीलें पदार्थो मांस मदिरा झ्त्यादि का सेवन न करें। यह एक धर्मिक यात्रा है इसकी पवित्रता का ध्यान रखें
- पवित्र मणीमहेश डल झील के आस-पास कच्चरा, गीले कपडे और स्नान उपरान्त अपने अधोवस्त्र इधर-उधर न फैकें तथा इन्हे नजदीक स्थापित कूडादान में डालें।
- छः सप्ताह से ज्यदा गर्भवती महिलाएं यात्रा न करें।
- यात्रा के दौरान चप्पलों के बजाय जूतों का प्रयोग करें, क्योंकि रास्ता दुर्गम होने की वजह से चोट इत्यादि लग सकती है।
- किसी भी प्रकार के छोटे रास्ते (Short Cut) का प्रयोग न करें।
- प्लास्टिक का प्रयोग न करें।
- यात्रा के दौरान कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे वातावरण दूषित हो तथा पर्यावरण को किसी प्रकार की कोई हानी न हो।
- यात्रा के दौरान मौसम खराब होने पर हडसर व डल झील के बीच धन्छो, सुन्दरासी, गौरीकुण्ड एवं डल झील पर सुरक्षित जगह पर रूकें। मौसम अनुकूल होने पर ही यात्रा आरम्भ करें।














