देवास। अतिथि विद्वानों का लॉकडाउन अवधि का वेतन व नियुक्ति अधर में लटकी हुई है। देवास शहर के अतिथि विद्वान दर-दर की ठोकरे खा रहे है। कई बार जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी अभी तक लाकडाउन अवधि का बकाया वेतन व नियुक्ति नही मिल पाई है। जिससे सभी अतिथि विद्वानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। व्याख्याता दिप्तांशु पंड्या ने बताया कि कोरोना ने एक ओर तो कमर तोड़ के रख दी है। वही दूसरी ओर रोजगार प्राप्त लोगों को उनके मेहनत का फल समय पर नही मिल रहा है। मामला देवास के शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय का है। देवास में स्थित शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय में सेवा देने वाले अतिथि शिक्षक जो कि व्याख्याता के तौर पर पिछले कई वर्षों से पदस्थ हैं, अपने वेतन के लिए भटक रहे हैं। वर्षों से सेवा देने के पश्चात भी हमें शासन के 23 मई 2020 को जारी आदेशानुसार पूर्वव्यवस्था के अनुसार मार्च, अप्रैल और मई माह का मानदेय पूर्व आवंटित कालखंड के अनुसार नही दिया गया व न ही नियुक्ति प्रदान की गई। प्रदेश में केवल देवास के ही शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय के अतिथि विद्वानों का मानदेय व नियुक्ति रूकी हुई है, जबकि प्रदेश के अन्य सभी शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालयों में पूर्वव्यवस्था के अनुसार मानदेय दिया जा चुका है व नियुक्ति भी प्रदान की जा चुकी है। लेकिन जब हमने उक्त मानदेय का आवेदन पत्र प्राचार्य श्रीमति सोनल भाटी को दिया तो उन्होंने इस मानदेय व नियुक्ति देने देने से इनकार कर दिया। हमने प्राचार्य को तीन बार यह आवेदन दिया, लेकिन उन्होंने इस विषय में कोई भी कार्यवाही नही की। उल्टा तानाशाही रवैया अपनाते हुए पदरिक्त करने की मांग की। कोरोना काल में सभी शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालयों में पूर्वव्यवस्था अनुरुप मानदेय व नियुक्ति दे दी गई है। लेकिन केवल देवास के ही अतिथि विद्वानों के साथ भेदभाव किया गया। इस तानाशाही के लिए अतिथि विद्वानो ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की थी, लेकिन कोई उचित न्याय नही मिल सका। मानदेय नही मिलने से समस्त अतिथि व्याख्याता आर्थिक व मानसिक रुप से परेशान हैं। इनमें महेन्द्र पाटीदार, गणेशप्रसाद मस्करे, नितिन जैन, नवीन पाटीदार, प्रियंका जैन, रज्जू जूमलेकर कई वर्षों से शासकीय पॉलिटेक्नीक महाविद्यालय में सेवा दे रहे हैं। कई समय से समस्या का समाधान नही होने से अतिथि विद्वानो ने 5 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय में पुन: आवेदन पत्र देकर उक्त विषय मे न्याय की मांग की है।

















