• नामांतरण में आपत्ति होने एवं न्यायालय में केस चलने के बाद भी कर दिया नामांतरण, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
देवास। नामांतरण में आपत्ति होने एवं न्यायालय में केस चलने के बाद भी जिला परिवहन अधिकारी ने फर्जी तरीके से नामांतरण कर दिया। उक्त आरोप जिले के ग्राम खेड़ी राजपुरा निवासी राधेश्याम सोनी ने लगाते हुए जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।
शिकायतकर्ता राधेश्याम ने बताया कि वर्ष 2015 में चोला मण्डल फाइनेंस कंपनी से लोन प्राप्त कर ट्रेक्टर क्रमांक एमपी 41 एबी 6580 क्रय किया था, जिसकी किश्त मेरे द्वारा नियमित रूप से कंपनी में जमा की जाती रही है। एक किस्त बाकी हो जाने पर फायनेंस कम्पनी द्वारा मेरा ट्रेक्टर फर्जी तरीके से कब्जे में लेकर बेच दिया। कम्पनी के विरूद्ध शिकायत कोतवाली पुलिस को आवेदन देकर की। तदोपरांत परिवाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया गया, जिसे माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया, जो वर्तमान में विचाराधीन है। फायनेंस कम्पनी द्वारा ट्रैक्टर अवैधानिक रूप से बेचे जाने के संबंध में जिला परिवहन अधिकारी के समक्ष मेरे ट्रैक्टर को अंतरित/ट्रांसफर किए जाने के संबंध में विधिवत आपत्ति प्रस्तुत की गई थी। साथ ही न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण के प्रमाणित प्रति भी प्रस्तुत की गयी। जिला परिवहन अधिकारी द्वारा मुझे दिनांक 20/02/2020 को नोटिस भेजा गया जिस पर में जिला परिवहन अधिकारी के समक्ष दिनांक 29/02/2020 को उपस्थित होकर लिखित जवाब प्रस्तुत किया। जिसकी प्राप्ति जिला पंजीयक महोदय स्वयं के हस्ताक्षर से दी गयी। उपरांत दिनांक 16/08/2020 को पुन: नोटिस जारी किया, जिसका जवाब व आपित्त मेरे द्वारा दिनांक 01/09/2021 को स्वयं जिला पंजीयक अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत की गयी। उपरांत दिनांक 23/11/2021 को पुन: उनके द्वारा मुझे नोटिस जारी किया जिस पर से मेरे द्वारा दिनांक 06/12/2021 को मेरे द्वारा उपस्थित होकर जिला परिवहन अधिकारी के समक्ष जवाब व आपत्ति प्रस्तुत की। जिनके द्वारा मुझे प्राप्ती प्रदान की गयी है । 03 यह कि मेरे द्वारा जिला परिवहन अधिकारी को फायनेंस कम्पनी के विरूद्ध प्रस्तुत फोजदारी प्रकरण के प्रमाणित दस्तावेज व मेरे द्वारा फोरम मे प्रस्तुत परिवाद आदि के संबंध में जानकारी दी जाकर आपत्ति लिखित में मय दस्तावेजों के प्रस्तुत की गयी। उपरांत जिला परिवहन अधिकारी व उनके अधिनस्थ कर्मचारी ने असत्य रूप से उक्त ट्रेक्टर को अंतरित कर दिया गया। जिसकी जानकारी मुझे प्राप्त होने पर जिला परिवहन अधिकारी से सम्पर्क कर मेरे उक्त ट्रेक्टर के अंतरण में प्रस्तुत आपत्ति की चर्चा करने व उक्त ट्रेक्टर के अंतरण की फाईल देखने पर मुझे ज्ञात हुआ कि जिला परिवहन अधिकारी ने मेरी आपत्ति के संबंध में तथा उनके द्वारा दिये गये प्राप्ति आदि के संबंध में कोई उल्लेख नहीं कर फर्जी तरीके से रूपये लेकर उक्त ट्रेक्टर को अंतरित कर दिया। जिसके कारण मुझे अपरिमित क्षति कारित हुई है तथा न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिला परिवहन अधिकारी ने जान बूझकर उक्त कृत्य किया है तथा मुझसे अभ्रद्रता कर मुझे अपशब्द कहे है। राधेश्याम सोनी ने कलेक्टर से आवेदन के माध्यम से मांग की है कि उक्त मामले की जाँच कराकर उचित कार्यवाही की जाए।
