Dewas, बैंक मैनेजर द्वारा व्यापार ऋण में की धोखाधड़ी

ग्राहक द्वारा मना करने पर भी किया 1 करोड़ का ऋण स्वीकृत, उक्त राशि दुसरे खाते में की ट्रांसफर

देवास। बैंक मैनेजर द्वारा एक करोड़ रूपये के व्यापार ऋण में धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। पक्षकार के वकील दीपक चौधरी ने प्रेस वार्ता में बताया कि मेरे पक्षकार शुभम धानेचा ने व्यापार के लिये ऋण की आवश्यकता होने पर फरवरी 2020 में स्टेट बैंक आफ इंडिया शाखा एस एम ई कालानीबाग में आवेदन किया था। बैंक द्वारा 1 करोड़ की सी सी (केश क्रेडिट) लिमिट और 50 लाख रूपए की बीजी ( बैंक गारंटी) स्वीकृत की। बैंक मैनेजर के कहने पर 22 फरवरी 2020 प्रापर्टी बैंक के नाम रजिस्टार कार्यालय में जाकर बंधक करवाई। बैंक मैनेजर ने कागजी कार्यवाही पूर्ण होने पर केश क्रेडिट लिमिट की राशी शुभम धानेचा के खाते में ट्रांसफर करने और बैंक गारंटी पत्र देने की बात कही। कागजी कार्यवाही पूर्ण होने पर बैंक मेनेजर सुशील अग्रवाल ने केश क्रेडिट लिमिट के लिए प्रोसेसिंग फीस रूपए 50 हजार जमा करने का बोला। इसके बाद बैंक मैनेजर ने बैंक गारंटी पत्र मांगने पर  25 प्रतिशत फिक्स डिपाजिट की मांग की। इस पर बैंक मैनेजर एवं शुभम धानेचा के बीच बहस हो गयी। धानेचा ने मना कर दिया कि मुझे ऋण नहीं लेना है। मैनेजर ने कहा कि आप लिखित में या  रजिस्टर्ड मेल आयडी से बैंक की रजिस्टर्ड मेल आयडी पर लिख कर भेज दो। मौखिक एवं  28 फरवरी 2020 को मेल द्वारा मना करने के उपरांत 31 मार्च 2020 को मेरे फोन पर एक मेसेज आया कि मेरे खाते में करोड़ रूपए की राशी जमा हुयी है। घानेचा ने कहा कि मेरे मना करने के बावजूद आपने मेरा घोखाधडी से मेरी सहमति के बगेर लोन कर दिया। अब यह राशी कही और ट्रांसफर न कर देना। इसके कुछ देरी पश्चात मैसेज आया कि  मेरे खाते से यह राशी किसी और के खाते यह ट्रांसफर कर दी गयी है। सम्पर्क करने पर बैंक मैनेजर ने फोन नहीं उठाया। मेल किया जिस पर भी उत्तर नहीं आया। कुछ दिन पश्चात बैंक मैनेजर का शभम के पिताजी को फोन आया कि यह लोन गलती से हो गया है, इस राशी की रिवर्स इंट्री कर दुगा थोडा समय दीजिये, बैंक की बदनामी हो रहीं है। काफी समय बाद भी कुछ नहीं होने पर Þ1 अगस्त 2020 को शहर कोतवाली देवास में एक आवेदन दिया। जाँच अधिकारी सब इस्पेक्टर का कहना है की जांच चल रही है। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया के मैनेजर सुशील अग्रवाल ने ने व्यापारी की बगेर सहमति ऋण कर राशि धोकाधडी हेराफेरी करते हुए ट्रांसफर कर दी, जबकि केश क्रेडिट लिमिट की शर्त होती है। एड. श्री चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि बैंक मेनेजर या सम्बंधित अधिकारी की मंशा  राशी में हेराफेरी करना है। फरियादी द्वारा बैँक के दोषी अधिकााियो के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की मांग की गयी।