देवास। सात साल पुराने मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला देवास द्वारा आरोपीयो को सजा सुनाई गई है।
दरअसल वर्ष 2015 में दिनांक 10 मई को आरोपी अनिल पिता देवानन्द एवं अन्तर सिंह पिता सिंधी गरोडिया द्वारा 4 नग गोवंश के बछडों को क्रूरतापूर्वक ढूंसकर हत्या करने हेतु इंदौर के रास्ते महाराष्ट्र की ओर ले जाया जा रहा था। तभी गस्त कर रहे पुलिसकर्मी को सूचना प्राप्त होने पर उन्होंने गाड़ी की जांच कर आरोपी को पकड़ा और तभी रिपोर्ट थाने पर पंजीबद्ध कर गौवंश को गौशाला में छोड़ मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
आज दिनांक 28 मई 2022 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला देवास द्वारा निर्णय पारित करते हुये आरोपीगण को विभिन्न धाराओं के अपराध में 01-01 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000-5000/- रूपये एवं 50-50/- रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
मामला कुछ इस प्रकार हे की देवास जिला के बरोठा के सहायक उपनिरीक्षक दिनांक 10 मई 2015 को अपने साथी आरक्षक के साथ देहात गश्त पर थे। उसी दौरान डबल चैकी के समीप उन्हें मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक सफेद रंग के टाटा 207 वाहन क्रमांक एम.पी.09 जी.एफ.8905 में तिरपाल से ढककर गौवंश के केडों (बछडों) को वध करने हेतु इंदौर के रास्ते महाराष्ट्र की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने पर उन्होंने राहगीर पंचानों को बुलाकर सूचना से अवगत कराया। सायं लगभग 07ः10 बजे टाटा 207 वाहन क्रमांक एम.पी.09 जी.एफ.8905 आता दिखा जिसे उन्होने साथी आरक्षक की सहायता से रोका और उसमें बैठे चालक और अंदर बैठे एक अन्य व्यक्ति का नाम पता पूछा तो उन्होने अपना नाम क्रमशः अनिल पुत्र देवानन्द गुप्ता एवं अन्तर सिंह पुत्र सिंधी गरोडिया बताया। वे वाहन में रखे सामान का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके तो वाहन का तिरपाल हटाकर देखने पर उसमें 04 नग गोवंश के बछडे क्रूरतापूर्वक ढूंसकर भरे हुए पाए गये जिनके मुंह रस्सी से बंधे थे। मौके पर पशुओं एवं वाहन से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण उक्त पंच साक्षियो के समक्ष अनुसंधान अधिकारी ने पशु एवं वाहन जप्त किये एवं अभियुक्तगण को गिरफ्तार किया गया। इसके उपरांत थाना वापस आकर इस मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर प्रकरण अन्वेषण में लिया गया। अन्वेषण के क्रम में जप्तशुदा पशुओं का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, वाहन के फोटोग्राफस लिए गये, जप्तशुदा पशुओं को स्थानीय खाटूश्याम गौशाल के सुपुर्द किया गया, साक्षियों के कथन लेखबद्ध किये एवं आवश्यक अन्वेषण उपरांत अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला देवास द्वारा दिनांक 28 मई 2022 को निर्णय पारित करते हुये आरोपीगण अनिल पिता देवानन्द एवं अन्तर सिंह पिता सिंधी गरोडिया को धारा धारा 6 सहपठित धारा 9 म.प्र. गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के अपराध में 01-01 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000-5000/- रूपये से दण्डित किया गया एवं धारा 11(घ) पशु क्रूरता निवारण अधिनियम,1960 में प्रत्येक आरोपीगण को 50-50/- के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
उक्त प्रकरण में शासन की ओर से श्री ऊदल सिंह मौर्य, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, जिला देवास द्वारा कुशल पैरवी की गई तथा आरक्षक साजन का विशेष सहयोग रहा।
उपरोक्त जानकारी जिला मीडिया सैल प्रभारी/एडीपीओ ऊदल सिंह मौर्य, जिला देवास द्वारा दी गई।
