Dewas चापड़ा के बनने वाला एयरपोर्ट खटाई में..!अंतिम मंजूरी फाइल केंद्र ने की वापिस..

• वैकल्पिक स्थानो का होगा सर्वे, चापडा से ज्यादा उपयुक्त होने पर अटक सकता है यहां मामला

देवास। जिले के चापडा एयरपोर्ट के अंतिम मंजूरी की फाइल को केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट के वैकल्पिक स्थानों के सर्वे ना होने के कारण लौटा दिया है। अब वैकल्पिक स्थानों का सर्वे कराया जाएगा। वैकल्पिक स्थान में इंदौर जिले के देपालपुर के पास बनेडिया और धार जिले के दिग्ठान में सर्वे कराया जाएगा जिसके लिए एमपीआईडीसी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को कहा है। अगर वैकल्पिक स्थान चापडा से उपयुक्त रहता है तो चापड़ा में बनने वाला प्रस्तावित इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बनना अब खटाई में पड सकता है। नए सिरे से सर्वे करने के लिए एमपीआईडीसी ने 40 लाख से ज्यादा की फीस राशि भी जमा कर दी है।
बताया जा है इंदौर के नेताओ द्वारा यहां हस्तक्षेप करके इसकी इंदौर से दूरी अधिक बताई थी.संभावना है की जल्द ही वैकल्पिक स्थानों का सर्वे शुरू किया जवेगा।

मध्य्प्रदेश औद्योगिक विकास निगम इंदौर ने चापड़ा गांव के पास बनने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए चापड़ा में 2100 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए जमीनें जुटाने व अधिग्रहण करने का काम मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम इंदौर को दिया था जिसमे एक दर्जन से ज्यादा गांवों की जमीनें चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया था।

68 गांव के किसानों ने किया था विरोध
अक्टूबर माह ने देवास जिले के करीब 68 गाँव के किसानों ने भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में प्रस्तावित एयरपोर्ट एवं निवेश क्षेत्र का विरोध किया था। किसानों द्वारा बताया गया था कि देवास तहसील के 32 गांव निवेश क्षेत्र एवं हाटपीपल्या के 12 गांव प्रस्तावित एयरपोर्ट मेंं व 24 गांव ग्रीन सिटी लाजिस्टिक हब में जा रहे हैं। इसमें किसानों की हजारों हेक्टेेयर उपजाऊ भूमि छीनी जा रही है। इससे लाखोंं परिवार प्रभावित हो रहे हैं। विरोध में किसानों ने मंडी से लेकर कलेक्टोरेट तक ट्रैक्टर रैली निकाली थी। विरोध रैली 700 से ज्यादा ट्रैक्टर शामिल हुए थे। किसानो ने कलेक्टोरेट परिसर में नारेबाजी कर संगठन के पदाधिकारियों व किसानों ने तत्कालीन कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला को ज्ञापन सौपा था।

ग्रामीणों की जमीनें अधिगृहीत करने के लिए 12 गांवों रमलखेड़ी, लालीपीपल्या, खजूरियाबीना, गुरिया, पीतावली, बिलबली, लसूडिय़ाला, देवपीपल्या, महूखेड़ा, उड़ानपुरा, पीपल्यासांव, अमरपुरा की जमीनें चिह्नित की गईं थी। शासन की गाइड लाइन के हिसाब से इसका मूल्य लगभग 800 करोड़ रुपए था।