Dewas: “शहर की हवा गुणवत्ता पहले से हुई खराब” पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

देवास। शहर की हवा की गुणवत्ता पहले से खराब हुई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। 2017 में शहर की हवा का PM 10 औसतन स्तर 75 था। वही 2021-22 में यह बढ़कर 81 हो गया है।

दरअसल देशभर में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2019 में एक दीर्घकालिक, समयबद्ध, राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वायु प्रदूषण की रोकथाम के साथ वायु गुणवत्ता प्रबंधन के साथ देशभर में 2024 तक PM 10 के स्तर को 20 से 30% की कमी के लक्ष्य को प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है। इस प्रोग्राम को देश के 132 शहरों में लागू किया गया था।

इसी कार्यक्रम के अंतर्गत विगत दिनों नगर निगम द्वारा इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काई के अवसर पर वायु गुणवत्ता सुधार के लिए ई- रिक्शा वाहन रैली का आयोजन किया गया था। जिसमे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए नागरिकों को इलेक्ट्रीक या सीएनजी वाहनों का उपयोग करने का संदेश देते हुए बड़ी संख्या में इलेक्ट्रीक वाहन शहर के मुख्य मार्ग से गुजरे थे, साथ ही ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पौधारोपण भी किया गया। जिसमे महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल, नगर निगम सभापति रवि जैन, निगम स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष धर्मेंद्रसिंह बैस, निगम आयुक्त विशालसिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए थे।

इस NCAP कार्यक्रम में शामिल 132 शहरो के वर्ष 2017 और वर्ष 2021-22 के औसतन PM 10 की रिपोर्ट सूची जारी की जिसके बाद पता चला की 2017 की तुलना में वर्ष 2021-22 में 95 शहरों के हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। लेकिन देवास सहित करीब 30 से ज्यादा शहरो की हवा की गुणवत्ता पहले से खराब हुई है। योजना में मध्यप्रदेश के शामिल 7 शहरो में से ग्वालियर को छोड़ 6 शहरो की हवा की गुणवत्ता 2017 के मुकाबले खराब देखने को मिली है जिसमे इंदौर, उज्जैन, देवास, भोपाल, जबलपुर और सागर शामिल है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में शहर और उनके 2017 और 2021-22 के औसतन PM 10 स्तर की जानकारी