देवास। 1 अप्रैल को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। इसे भूतड़ी अमावस्या अमावस्या भी कहा जाता है।भूतड़ी अमावस्या पर सिद्ध क्षैत्र नेमावर में पुण्य सलीला मॉ नर्मदा जी में स्रान के लिये लाखो की संख्या में श्रद्धालुजन एकत्रित होते है। नेमावर में नर्मदा स्रान के लिये जाने वाले श्रद्धालुओ का सिलसिला दो दिन पूर्व बुधवार से ही प्रारंभ हो गया।
जिला मुख्यालय पर चामुण्डा माता टेकरी पर नेमावर अमावस्या पर्व स्रान के लिये वाले श्रद्धालुओ की भारी भीड़ दिखाई दी। श्रद्धालुओ ने मॉ तुलजा भवानी, चामुण्डा माता के दर्शन किये। वैसे देखा जाए तो हिंदू धर्म में अमावस्या का बहुत अधिक महत्व होता है। भूतड़ी अमावस्या श्रद्धालु नर्मदा में स्नान करने आते हैं। इसके अलावा जिस भी व्यक्ति पर बाहरी बाधा (भूतप्रेतो) का साया रहता है उन व्यक्तियों को नर्मदा में स्नान करारकर बुरी बाधा से मुक्त कराया जाता है। बताया गया है कि छोटी भूतड़ी अमावस्या पर सुबह से लेकर रात ढोल-ढमाकों और अजीबो तरह की आवाजा सुनाई देती है।

• 31 मार्च एवं 1 अप्रैल दोनो दिन अमावस्या
ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष दोनों दिन अमावस्या तिथि रहेगी। 31 मार्च को श्राद्ध कर्म की अमावस्या और 1 अप्रैल को स्नान और दान की अमावस्या मनाई जा रही है। 31 मार्च, गुरुवार को श्राद्ध कर्म के लिए अमावस्या सही मानी जा रही है और स्नान और दान के लिए शुक्रवार को अमावस्या सही रहेगी। विगत दो वर्षो से कोरोना संक्रमण काल के चलते नेमावर में नर्मदा पव स्रान प्रतिबंधित था। इस वर्ष कोरोना महामारी से छुटकारे के कारण नर्मदा जी स्रान के लिये नेमावर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पंहुचने की संभावनाएॅ है। बुधवार को ही चामुण्डा माता टेकरी पर नर्मदा जी में स्रान के लिये नेमावर जाने वाले श्रद्धालुओ की भीड़ को देखते हुए प्रशासन को आवागमन एवं व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करना होंगे।
नर्मदा तट पर बाहरी बाधाओं से मिलती है मुक्ति
अमावस्या पर्व स्रान, दान पूण्य के साथ ही एैसी मान्यता है कि जिन लोगो को भूत, प्रेत अर्थात बाहरी बाधाएॅ घेर लेती है। नर्मदा जी में स्रान से एैसे व्यक्तियों को बाहरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। नेमावर में नर्मदा के घाटों पर जगह जगह अमावस्या की रात्रि में जानकारो, पंडों का डेरा जमता है। बाहरी बाधाओं से घिरे लोग झुमते, किलकारी भरते नजर आते है।














