HINGOT: दीपावली के बाद पड़वा पर हुआ हिंगोट युद्ध

हिंगोट युद्ध में युवाओ ने किया एक दूसरे पटाखों से वार

भौरासा (अभय नागर)। नगर में पड़वा के रोज देपालपुर में होने वाले हिंगोट युद्ध से खतरनाक तरीके से मनाई जाती है पड़वा एक दूसरे के ऊपर पटाखे फेंके जाते हैं चल समारोह निकलता है गाय बैलों को लेकर के तो उनके ऊपर भी गंगा जमुना सुतली बम राकेट से हमले किए जाते हैं पर यहां पर कोई ध्यान नहीं होती जिस तरह से हिंगोट युद्ध ढाल लेकर के देपालपुर में लड़े जाते हैं जैसा भौरासा नगर में देखने को नहीं मिला हिंगोट युद्ध मैं तो और भी बचाव के लिए ढाल हैं यहां पर बगैर ढाल और तलवार के भोरासा नगर के लोग अपने गायकों को लेकर निकलते हैं और उनके ऊपर बम वर्षा होती है कई लोग जल्दी जाते हैं मगर परंपराओं का निर्वाह कर रहे हैं वही बरसों पुरानी परंपरा देपालपुर का हिंगोट युद्ध कोरोना को देखते हुए आपकी बात प्रशासन ने नहीं होने दिया मगर इसके पहले कई बार इस हिंगोट युद्ध का विरोध भी हुआ मगर राजनीति की भेंट चढ़ने के कारण नेताओं के हस्तक्षेप के बाद भी यह हिंगोट युद्ध परंपराओं का निर्माण करता रहा मगर भौरासा नगर में भी भौरासा नगर में परंपराओं का बरसों से चली आरही है पहले राकेट से आमने सामने की लड़ाई होती थी मगर जैसे जमाना आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे इसके संसाधन में बदलते गए सुतली बम रेल और अब गंगा जमुना एक दूसरे के ऊपर फेकी जाती है सुतली बम भी इसी तरह से युवा एक दूसरे पर फेंकते है वही कभी-कभी इन पटाखों से जल जाते हैं यह परंपरा कब तक चलती रहेगी।