Dewas ‘लुटेरी दुल्हन’ गैंग का पर्दाफाश, शादी के 10 दिन बाद भागी थी पत्नी, पुलिस ने महाराष्ट्र से 2 दलाल किए गिरफ्तार

देवास (Dewas News) मध्य प्रदेश के देवास जिले में शादी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बरोठा थाना पुलिस ने ‘लुटेरी दुल्हन’ (Luteri Dulhan) मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र से दो आरोपियों (दलालों) को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने लाखों रुपये लेकर एक युवक की शादी करवाई थी, लेकिन शादी के महज 10 दिन बाद ही दुल्हन घर से फरार हो गई।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • दलालों ने लाखों रुपये लेकर कराई थी युवक की शादी।
  • शादी के मात्र 10 दिन बाद ही घर से फरार हो गई ‘लुटेरी दुल्हन’।
  • देवास की बरोठा पुलिस ने महाराष्ट्र में दबिश देकर 2 आरोपियों को दबोचा।
  • मुख्य आरोपिया (दुल्हन) और अन्य की तलाश जारी।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस अधीक्षक देवास पुनीत गेहलोद द्वारा अपराधों पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे ‘360 – पुलिसिंग’ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। 17 मार्च 2026 को ग्राम बरखेड़ा कोतापाई के रहने वाले राहुल पिता श्यामसिंह पंवार (32 वर्ष) ने बरोठा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। फरियादी ने बताया कि कुछ दलालों ने उससे पैसे लेकर उसकी शादी पूजा नामक महिला से करवाई थी। लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही दुल्हन अचानक गायब हो गई और दलालों का भी कोई सुराग नहीं मिल रहा था।

मामला दर्ज कर पुलिस ने बनाई विशेष टीम

फरियादी की रिपोर्ट के आधार पर बरोठा पुलिस ने दुल्हन पूजा और दलालों के खिलाफ अपराध क्रमांक 80/2026 के तहत धारा 318(3), 61(2), 83 बीएनएस (BNS) का मामला दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री जयवीर सिंह भदौरिया और डीएसपी श्रीमती बबिता बामनिया के मार्गदर्शन में बरोठा थाना प्रभारी श्रीमती सविता सिंह जाटव के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।

महाराष्ट्र से ये दो आरोपी हुए गिरफ्तार

विशेष पुलिस टीम और सायबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर महाराष्ट्र में दबिश दी और गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया:

  1. रोहित (23 वर्ष) पिता अप्पु सेठी – निवासी तल पिंपरी, छत्रपति सम्भाजी नगर (महाराष्ट्र)।
  2. सुनिता (36 वर्ष) पति विनोद पंवार – निवासी संगमनेर, श्रीराम नगर, जिला अहिल्या नगर (महाराष्ट्र)।

पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि फरार दुल्हन और अन्य साथियों का पता लगाया जा सके। अग्रिम वैधानिक कार्रवाई जारी है।

इनकी रही सराहनीय भूमिका

इस ‘लुटेरी दुल्हन’ गैंग का पर्दाफाश करने में बरोठा थाना प्रभारी निरीक्षक श्रीमती सविता सिंह, सउनि हरिश कुमार, सउनि शारदा ठाकुर, प्र.आर राजेश लुवानिया, तेजसिंह सिन्हा, आर. विजेन्द्र सिसोदिया, म.आर देवप्रभा तिवारी, आर. अजयपाल सिंह, सैनिक शेखर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही, सायबर सेल देवास प्रभारी शिवप्रताप सिंह सेंगर और प्र.आर सचिन चौहान की भी विशेष भूमिका रही।

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नरवाई जलाएं नहीं, इसे ‘सोना’ बनाएं: किसान करें खेतों की गहरी जुताई – धर्मेंद्र सिंह राजपूत

देवास। गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई (फसल अवशेष) को जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का सौदा भी है। मप्र जन अभियान परिषद ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राजपूत ने किसानों को जागरूक करते हुए एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसान नरवाई का सही प्रबंधन करें, तो यह उनके खेतों के लिए सोना” साबित हो सकती है।

जैविक खाद में बदल सकती है नरवाई

धर्मेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार, नरवाई से बेहतरीन जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता (Fertility) बढ़ती है, बल्कि आने वाली फसल के उत्पादन में भी शानदार वृद्धि होती है।

कैसे करें नरवाई का सही उपयोग?

उन्होंने नरवाई प्रबंधन के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए:

  • रोटावेटर का प्रयोग: नरवाई को जलाने के बजाय रोटावेटर चलाकर उसे बारीक टुकड़ों में काट लें।
  • मिट्टी में मिलाएं: बारीक कटी हुई नरवाई को मिट्टी में मिला देना चाहिए, जिससे यह प्राकृतिक खाद का रूप ले लेती है।
  • गहरी जुताई: खेतों की गहरी जुताई करने से नरवाई जमीन के अंदर दब जाती है और सड़कर खाद बन जाती है, जो जमीन की गुणवत्ता में सुधार करती है।

नरवाई जलाने के नुकसान

राजपूत ने आगाह किया कि नरवाई जलाने से दोहरा नुकसान होता है:

  1. पर्यावरण प्रदूषण: इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है जो स्वास्थ्य के लिए घातक है।
  2. जैव विविधता का नाश: आग लगाने से मिट्टी के भीतर मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव (Micro-organisms) और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेत की सेहत बिगड़ती है।

किसानों से अपील

उन्होंने किसानों से पारंपरिक लेकिन हानिकारक तरीके को छोड़कर आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने की अपील की। इससे न केवल अगली फसल का उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि खेत की उपजाऊ शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहेगी।