चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ा कदम: अमलतास विश्वविद्यालय और विक्रम विश्वविद्यालय के बीच MoU हस्ताक्षरित


देवास। चिकित्सा अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा को बढ़ावा देने के लिए देवास के अमलतास विश्वविद्यालय और उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग समझौता दोनों ही संस्थानों के संकाय (फैकल्टी) और विद्यार्थियों के लिए प्रगति के नए द्वार खोलेगा। इस ऐतिहासिक समझौते के माध्यम से मुख्य रूप से चिकित्सा, फार्मेसी, जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी), स्वास्थ्य चिकित्सा, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे उन्नत विषयों में शोध और विकास को गति दी जाएगी।

इस सहभागिता के अंतर्गत दोनों संस्थान अपनी प्रयोगशालाओं और शोध सुविधाओं का साझा उपयोग करेंगे, जिससे क्लीनिकल और बायो-मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे। इस समझौते से फैकल्टी और छात्रों को संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम करने का बेहतरीन अवसर मिलेगा। साथ ही, रिसर्च पब्लिकेशन और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम और रिसर्च गाइडेंस की सुविधा भी दी जाएगी। दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए संयुक्त रूप से विशेष ट्रेनिंग, सेमिनार, जॉइंट वर्कशॉप और कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा, जिससे उन्हें उन्नत सेवाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
इस गरिमामयी और ऐतिहासिक अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षाविद विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनमें विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफ़ेसर अर्पण भारद्वाज, अमलतास विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. आर.के. सिंह, प्रो-चांसलर डॉ. सलिल भार्गव सहित डॉ. नीलम खान, डॉ. आस्था नागर और डॉ. रत्ना शर्मा शामिल थे। सभी शिक्षाविदों ने इस समझौते को क्षेत्र में चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा के स्तर को अधिक सुदृढ़ और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर अमलतास विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया जी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। हमारा मुख्य उद्देश्य छात्रों और फैकल्टी को वैश्विक स्तर की शोध सुविधाएं और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है। विक्रम विश्वविद्यालय के साथ इस साझेदारी से चिकित्सा और बायो-मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नए आविष्कार होंगे, जिसका सीधा लाभ समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा। उन्होंने दोनों संस्थानों की टीम को इस सराहनीय पहल के लिए बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Dewas, अमलतास हॉस्पिटल में दिव्यांग बच्चों के लिए निःशुल्क स्पेशल स्कूल

देवास। जानकारी देते हुए अमलतास हॉस्पिटल प्रबंधक विजय जाट द्वारा बताया गया कि दिव्यांग बच्चों के स्वास्थ्य लाभ हेतु ऑक्यू पेशनल थैरेपी स्पेशल स्कूल में पुनर्वास केंद्र चेयरमैन मयंक राज सिंह भदौरिया के निर्देशन में खोला गया ।जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की शारीरिक एवम मानसिक बीमारियों का इलाज थैरेपी द्वारा किया जाता हैं। स्पेशल स्कूल की डॉ जया वर्मा ने बताया की स्कूल में सेरेब्रल पाल्सी ,मानसिक व शारीरिक पक्षाघात , ओटीज्म ,मेंटल रिटार्डेशन,झटके की बीमारियों का इलाज , ऑक्यू पेशनल थैरेपी, सेंसर इंट्रीग्रेशन थैरेपी ,स्पीच थैरेपी व स्पेशल एजुकेशन द्वारा किया जाता हैं । कार्यक्रम का आयोजन स्पेशल स्कूल की संचालिका डॉ जया वर्मा ( ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट एवम क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट ) के दिशा निर्देशानुसार संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अमलतास हॉस्पिटल डीन डॉ. शरद चन्द्र वानखेड़े ,मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ प्रशांत वडग बालकर,मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ जगत रावत ,डॉ नेहा काकानी , डॉ सागर मुद्गल,डॉ अंकुर गुप्ता,डॉ चांदनी , अमरेंद्र उपाध्याय ,कविता जी एवम समस्त नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति में किया गया ।कार्यक्रम के अंत में डॉ जया वर्मा द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

Amaltas, अमलतास अस्पताल को मिली नशा मुक्ति केन्द्र की मान्यता, मरीजों का होगा निःशुल्क ईलाज

देवास। अमलतास अस्पताल के लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में नये आयाम स्थापित हो रहे हैं। अमलतास अस्पताल को शासन द्वारा नशा मुक्ति केन्द्र की मान्यता मिली है। अस्पताल प्रबंधक विजय जाट ने कहा कि अस्पताल के संस्थापक सुरेशसिंह भदौरिया और चैयरमेन मयंकराजसिंह भदौरिया के प्रयासों से अमलतास अस्पताल को नशा मुक्ति की दिशा में मान्यता प्राप्त हुई है। नशा मुक्ति के लिए आने वाले मरीजों का निःशुल्क ईलाज करने के लिए अमलतास अस्पताल को मान्यता मिली है। इसमें लगभग सभी प्रकार के नशों का ईलाज अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया जाएगा।
डॉ. सागर मुद्गल (विशेषज्ञ नशा मुक्ति विभाग) ने जानकारी देते हुए बताया कि अमलतास अस्पताल को नशा मुक्ति केन्द्र की मान्यता मिलने से कई मरीजों को लाभ होगा साथ ही आयुष्मान कार्डधारियों का ईलाज भी यहां किया जा सकेगा। नशा मुक्ति केन्द्र में ईलाज के लिए हमने एक व्यवस्थित समय सारिणी बनाई है जिसमें मरीजों पर सतत मॉनीटरिंग की जाऐगी साथ ही दवाईयों के साथ उन्हें मेडिटेशन आदि से भी ठीक करने के उपाय किये जाएंगे।

Amaltas hospital dewas, आयुष्मान कार्ड द्वारा हुआ 2 लाख खर्च वाला रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर का ऑपरेशन

• अमलतास में हुआ जिले में पहली बार हुआ नवीन तकनीक से रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर का ऑपरेशन

देवास। अमलतास अस्पताल के प्रबंधक विजय जाट ने जानकारी देते हुए बताया की श्रीमती बबीता सक्सेना उम्र 40 वर्ष निवासी भेरूगढ़ उज्जैन उत्साह के साथ अपने पुत्र के विवाह की तैयारियो में व्यस्त थी। अचानक बबीता सक्सेना घर पर ही सीढ़ियों से उतरते समय पैर फिसला और वो नीचे आ गिरी ,इस दुर्घटना में न सिर्फ उनको सिर में चोट लगी बल्कि उनकी रीढ़ की हड्डी में भी फ्रेक्चर हो गया। इमरजेंसी मे परिजन तत्काल उन्हें उज्जैन के एक निजी अस्पताल में ले गए जहा उन्हे 7 – 8 दिन भर्ती रहकर रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन की सलाह दी गई जिसका अनुमानित खर्च 2 लाख रू. लगभग बताया गया। परिजन मरीज को अमलतास अस्पताल लेकर आए और उन्हे यहा स्पाईन सर्जन डॉ. अर्पित उपाध्याय को दिखाया परिवार की परिस्थिति को देखकर डॉ अर्पित उपाध्याय द्वारा उन्हें तुरंत भर्ती कर रात में ही आयुष्मान कार्ड द्वारा उनकी रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर का ऑपरेशन नवीनतम मिनिमल इनवेसिव तकनीक के द्वारा किया गया। इस तकनीक से रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन होने के कारण मरीज श्रीमती बबीता सक्सेना को दूसरे ही दिन अपने पैरो पर चलवा दिया गया और ऑपरेशन के तीसरे दिन ही वो अमलतास से डिस्चार्ज होकर अपने पुत्र के विवाह में सम्मिलित हो सकी ।

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मरीज की रीढ़ की हड्डी में इतना बड़ा फ्रेक्चर था जिसे 8 स्क्रू से फिक्स करना था इस तकनीक में मरीज की पीठ में लम्बा चीरा न लगाकर अलग – अलग जगह से 8 अत्यंत छोटे छिद्र बनाकर उनमें से 8 स्क्रू के द्वारा रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर को फिक्स कर दिया गया। जिससे आपरेशन के दौरान रक्तस्त्राव नही होने से ना मरीज को रक्त चढ़ाने की जरूरत हुई, ना कमजोरी जिसके कारण कई दिनों तक बिस्तर पर लेटे रहना पड़ता है और ना ही लंबे समय तक दवाइया लेना पड़ेगी। ऑपरेशन के तीसरे दिन ही मरीज स्वयं चलकर अपने घर चली गई ।
मिनिमल इनवेसिव तकनीक से इस प्रकार की स्पाईन सर्जरी अमलतास में और सम्पूर्ण देवास जिले में पहली बार की गई ।अमलतास अस्पताल के चेयरमैन मयंक राज सिंह भदौरिया ने अमलतास देवास के युवा सर्जन डॉ अर्पित उपाध्याय को इस उपलब्धि पर बधाई दी।