देवास के महाराज विक्रम सिंह पवार का जन्मदिन आज शहर भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है युवा नेतृत्व पवार के जन्मदिन को देखते हुए उनके समर्थकों द्वारा शहर भर में होल्डिंग लगाकर कर बधाई प्रेषित की जा रही है। सुबह से ही समर्थकों का शुभकामनाएं देना का सिलसिला शुरू हो गया। विभिन्न जगहों पर भोजन वितरण का आयोजन भी रखा गया है लगभग 100 से ज्यादा मंचो से जरिये आज विक्रम सिंह पंवार का केक काटकर व आतिशबाजी कर जन्मदिन मनाया जाएगा।
देवास महाराज विक्रम सिंह पवार के जीवन का छोटा सा अंश
देवास रियासत के वर्तमान महाराज विक्रम सिंह पवार 2 का जन्म 3 मई 1989 को हुआ। विक्रम सिंह पावर देवास सीनियर के 10वें महाराज है। वह तेज़-तर्रार और होनहार के साथ राजनेता ही नहीं, बल्कि हर उस युवा वर्ग का प्रतीक हैं, जिनमें हुनर भी है और आगे बढ़ने का जौहर भी। विक्रम सिंह पावर ने अपनी पोस्ट मैट्रिक तक कि पढ़ाई इंदौर स्थित डेली कॉलेज से की, वही उच्चशिक्षा के लिए बॉम्बे, पुणे और विदेश का रुख किया। पवार शार्प शूटिंग खेल के बेहतरीन खिलाड़ी है पवार ने इस खेल में 5 बार नेशनल प्रतियोगिता में अपना जौहर दिखाया है। देवास रियासत के महाराज तुकोजीराव पवार का 19 जून 2015 को इंदौर के हॉस्पिटल में निधन हो गया। जिसके बाद किले के भीतर एक निजी राजशाही समारोह में 20 जून को विक्रम सिंह का राज्याभिषेक हुआ। 2018 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में देवास विधानसभा में मिली जीत व 2020 में सम्पन्न हुए उपचुनावों में पैलेस का दबदबा कायम रहा। महाराज विक्रम सिंह पँवार ने युवाओ की बड़ी लॉबी के साथ उपचुनावों में मालवा की हाटपिपल्या विधानसभा सीट, आगर विधानसभा व इंदौर की साँवेर विधानसभा सीटों पर खूब काम किया। दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को विजय भी मिली। वही साथ ही विक्रम सिंह पवार दिसंबर 2020 में प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान डेली कॉलेज इंदौर के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए व अप्रैल 2022 में पावर डेली कॉलेज के अध्यक्ष नियुक्त हुए।विक्रम सिंह पंवार के पिता तुकोजीराव पवार मध्यप्रदेश की राजनीति में अति सक्रिय थे तुकोजीराव पवार 6 बार विधायक(1990-2015) व 3 बार मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री की पद और रहे। तुकोजीराव पवार के 6 बार लगातार विधायक पर विजय प्राप्त करने पर देवास विधानसभा को भाजपा का गढ़ कहा जाने लगा। श्री मंत के निधन के बाद देवास विधानसभा की खाली सीट पर उनकी पत्नी श्रीमती गायत्री राजे पवार विधायक का चुनाव लड़ी व भारी मतों से विजय हासिल की।
विक्रम सिंह पवार के पूर्वजो ने लगभग 250 वर्षो तक देवास पर शासन किया। जिनकी गिनती मध्य भारत के अमीर राजघरानों में होती थी। अंग्रेजों के शासन में इस परिवार को 15 तोपों की सलामी जी जाती थी। जानकारी अनुसार वर्तमान में यह राजघराना 4 पैलेस व 3 किलो का मालिक है। 4 पैलेस में सागर महल, जामगोद हाउस, राघोगढ़ पैलेस तथा आंनद भवन पैलेस है। आंनद भवन पैलेस में उन्होंने अपना आवास बना रखा है। 3 किलो में महाराष्ट्र में सुपागढ़ी, आलोट में आलोटगढ़ी व एक अन्य किले के मालिक है। साथ ही इसके अलावा इनके आधिपत्य में 453 हेक्टेयर का विशाल जंगल व लगभग 100 हेक्टेयर के कृषि भूमि भी है। आज भी इस राजघराने की संपत्ति का सही आकलन करना संभव नही है। वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव की उम्मीदवारी करते हुए तत्कालीन महाराजा तुकोजीराव पवार ने एफिडेविट में लिखा था की पवार वंश के पास सोना-चांदी व और अन्य कीमती घातुओं का इतना बड़ा भंडार है कि उसकी कीमत का आकलन करना सम्भव नही है। देवास का एक मात्र शासकीय कॉलेज इसी वंश की जमीन पर बना हुआ है व विक्रम सिंह पंवार के पूर्वज कृष्णाजीराव पवार के नाम पर है।
