उज्जैन। उज्जैन नगर में निकलने वाली महाँकालेश्वर की सवारी को देखने के लिए उज्जैन ही नही अपितु आस पास के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में नागरिक उज्जैन पहुँचते है। पिछले दो वर्षों से कोरोना के कारण महाँकाल सवारी का परंपरागत मार्ग बदलकर छोटा कर दिया गया था। जिसके बाद जब से ही उसी परिवर्तित मार्ग पर यात्रा निकल रही थी। लेकिन अब महाकाल की सवारी फिर अपने पुराने और परंपरागत रूट पर निकलना शुरू हो चुकी है।
भगवान महाकालेश्वर की मार्गशीर्ष (अगहन) माह की पहली सवारी आज सोमवार को निकली है। कोविड-19 के प्रतिबंध हटने के बाद आज महाकाल की सवारी परंपरागत मार्ग से निकाली गयी है। कार्तिक-मार्गशीर्ष (अगहन) माह की चार सवारियों के क्रम में यह तीसरी सवारी है। इसके बाद एक और सवारी निकलेगी।
प्रशासन व पुलिस ने नगर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि भीड़ में निकलते वक्त ट्रैफिक जाम व अन्य परेशानियां न हों।
आज की सवारी अपने परंपागत मार्ग श्री महाकालेश्वर मंदिर से निकलकर और गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहाँ शिप्रा के जल से भगवान श्री चन्द्रमौलीश्वर का अभिषेक उपरांत सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार, होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
