सुन्द्रेल, बिजवाड,(दीपक शर्मा)। गोवर्धन नाथ हमारे नाथों के नाथ पूर्व में जगन्नाथ दक्षिण में रामेश्वर पश्चिम में द्वारिका नाथ और उत्तर में बद्रीनाथ है इन चारों के मध्य में है गोवर्धन नाथ वो हम सबका स्वामी है वह चारों दिशाओं का देव है या विचार ग्राम सुंद्रेल के राधा कृष्ण मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन गोवर्धन धारण प्रसंग पर पंडित लाल शंकर मेहता शाजापुर ने कही आपने कहा भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया और कहा जिस पर्वत पर गाय एवं गोवंश हरा चारा खा कर हमें अमृत मई दूध पिला रही हो माखन खिलाती हैं इसकी पूजा करना हमारा धर्म और संस्कृति है गोवर्धन की परिक्रमा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पर्यावरण को शुद्ध रखना और गोवंश की रक्षा करना है तो पर्वतों एवं जंगलों को बचाना होगा 15 सितंबर को श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की कथा होगी 16 सितंबर को सुदामा चरित्र के साथ कथा विराम होगी विशाल शोभायात्रा के पश्चात सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन होगा दूर-दूर से श्रद्धालु जन भागवत कथा का रसपान करने आ रहे हैं















