देवास। मालव भूषण पूज्य आचार्य श्री नवरत्नसागरसूरीश्वरजी म.सा. के सुशिष्य पूज्य आचार्य श्री मृदुरत्नसागरसूरी जी म.सा. का 20 वर्ष के लम्बे अन्तराल के बाद देवास नगर में आगमन हुआ। पूज्य श्री के मंगल नगर प्रवेश का भव्य सामैया मण्डी धर्मशाला से प्रारंभ होकर शंखेश्रर पार्श्वनाथ मन्दिर होते हुए आदेश्वर जैन श्वेतांबर प्राचीन मन्दिर पर समाप्त हुआ। सामैये के पश्चात आराधना भवन में पुज्यश्री के मंगल प्रवचन हुए। प्रवचन में आचार्यश्री नें कहा -साधूनां दर्शनं पुण्यं तीर्थभूता हि साधव:।कालेन फ़लते तीर्थं सद्य: साधुसमागम:।।साधू भगवंत का दर्शन मात्र भी महा पुण्य के उदय से होता है। मुनिराज के दर्शन वन्दन से कई आत्माओ ने केवल ज्ञान, सम्यग दर्शन और मोक्ष सुख को प्राप्त किया है। आचार्य भगवंत ने अति प्राचीन महिमावंत दादा अदिनाथ के दर्शन कर तथा पुण्य भूमि देवास के तीर्थक्षेत्र की स्पर्षना कर अपने आप को धन्य माना। त्रि-दिवसीय प्रवचन शृंखला का आयोजन आदेश्वर मंदिर आराधना भवन में प्रात: 9.30 बजे होगा।आगामी कार्यक्रम-दिनांक 15 दिसंबर 2020 को प्रात: 9.30 बजे से नूतन माह की सर्व संकट चुरक, मनवांछित पूरक, विध्न विनाशक, आधी-व्याधी-उपाधि नाशक, महाप्रभावी, चमत्कारी महा मांगलिक का आयोजन आराधना भवन में होगा। तत्पश्चात विशिष्ट संघ पूजन तथा सहभोज होगा। आदेश्वर मंदिर ट्रस्ट मंडल ने सकल श्री संघ से सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सभी कार्यक्रम में पधारने की विनंती है।














