देवास । मेट्रोपोलिटन एरिया मतलब चारो तरफ विकास इस माना जाता है इसी संदर्भ में पूर्ववर्ती कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने भोपाल एवं इन्दौर को लेकर महानगरीय क्षेत्र बनाने की बड़ी पहल की थी, जिसमें इंदौर के लिए इंदौर, पीथमपुर,महू, देवास, उज्जैन को मिलाकर महानगरीय क्षेत्र (मैट्रोपोलिटन एरिया) बनाने की प्लानिंग थी। इसी तरह भोपाल, रायसेन, मंडीदीप को मिलाकर भोपाल को मेट्रोपोलिटन एरिया बनाने की पहल की जा चुकी थी। इसके लिए तत्कालीन कमलनाथ सरकार एक्शन मोड में भी आ गई थी। निश्चय ही भोपाल-इंदौर जैसे अंगड़ाई लेते महानगरों को महानगरीय क्षेत्र घोषित कर,इन्हें मेट्रोपोलिटन एरिया के रूप में विकसित किया जाता, इनमें आसपास के कस्बाई मानसिकता वाले शहरों को शामिल कर लिया जाता है तो इनकी भी रंगत बदल सकती थी। कमलनाथ सरकार ने इंदौर के सहारे पीथमपुर,महू, उज्जैन, देवास की रंगत बदलने का सपना देखा था। निश्चय ही इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया में देवास को शामिल किया जाता तो देवास का कायाकल्प हो जाता, देवास को महानगरीय सुविधाओं की सौगात मिल जाती, देवास के विकास को पंख लग जाते और देवास को कस्बाई मानसिकता के लाच्छन से मुक्ति मिल जाती, हमारा देवास भी महानगरीय तौर तरीकों से कदमताल करता नजर आता
लेकिन भाजपा की वर्तमान शिवराज सरकार ने अपनी पिछली केबिनेट बैठक में इस महती परियोजना से देवास का नाम हटाकर, देवास के हितों पर कुठाराघात किया है। यदि देवास भी महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा होता तो यहां रोजगार, व्यापार की अपार संभावनाएं उभरकर सामने आती। मेट्रो ट्रेन से लेकर संचार, आवागमन और औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में देवास को कई अवसरों की प्राप्ति हो सकती थी, लेकिन शिवराज सरकार ने इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया से देवास का नाम बाहर कर,देवास के साथ अन्याय किया है। देवास के साथ हुए अन्याय पर देवासवासियों का मौन रह जाना, देवास के साथ महा अन्याय होगा। पूछा तो जाना चाहिए कि देवास को शिवराज सरकार ने इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया से बाहर क्यों किया? जनप्रतिनिधि यदि देवास हितैषी है, देवास के हित उनके लिए सर्वोपरि है तो उन्होंने आगे आकर शिवराज सरकार से पूछना चाहिए कि उसने इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया परियोजना से देवास का नाम बाहर क्यों किया? इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया से देवास को बाहर करने वाली प्रदेश सरकार के सामने देवास की धरती से पुरजोर विरोध दर्ज होना चाहिए। देवास का समूचित विकास हो ही नहीं पाया। जिसने देखो उसने,वोट बैंक की राजनीति की है, देवास के विकास को केंद्र में लेकर,या रखकर कभी राजनीति नहीं की।प्रदेश सरकार ने देवास को इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया से बाहर कर कितना बड़ा आघात पहुंचाया है और देवास के जनप्रतिनिधि प्रतिक्रियाविहीन बनकर बैठे हैं। देवास के साथ होते अन्याय पर जनप्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार के सामने विरोध दर्ज कराना चाहिए। देवास के आम नागरिक, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, साहित्यकारों व्यापारियों, विद्यार्थियों सबने विरोध दर्ज कराना चाहिए, क्योंकि इंदौर मेट्रोपोलिटन एरिया से देवास को बाहर करना, देवास से विकास का अधिकार छीन लेना है। हांलांकि इस संदर्भ में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी जिनका नाम देवास नगर में समाजसेवा करने वाले जप्रतिनिधियो में अग्रणी रहता है उन्होने पत्र लिखकर सभी से इस संदर्भ में समर्थन मांगा है, इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर विचार करने की आवश्यकता है।।














