नाकेदार के घर को वन विभाग की टीम ने सील करने के बाद डीएफओ पी एन मिश्रा के दबाव में ताबड़तोड़ कार्यवाही करने में रुकावट पैदा की सूत्र
29 दिसंबर2020 को नाकेदार का घर बिजवाड़ वन परीक्षेत्र पानीगांव कैंपस में सील किया गया था!
31 दिसंबर की सुबह 11:00 बजे तक नहीं कर पाए थे कार्रवाई कई घंटे बीत जाने के बाद भी वन विभाग की नाक कटने व वन विभाग की बदनामी के डर से नाकेदार को बचाने में लगा पूरा अमला।
सूत्रों से मिली जानकारी 29 -30दिसंबर 2020 की रात में वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से नाकेदार के घर के पीछे से सागवान की लकड़ीया व फर्नीचर का जखीरा रफा-दफा करने की जानकारी मिल रही है।
नाकेदार के यहां रखी लकड़िया फर्नीचर रफा-दफा करने के बाद वन विभाग आज दिनांक 31 दिसंबर गुरुवार को ताला तोड़ कर जांच पड़ताल कर जिम्मेदारी निभाने का नाटक करने की संभावना जताई जा रही है।
देवास: वन परिक्षेत्र पानीगांव के अंतर्गत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विगत कई लंबे अरसे से रेंजर के संरक्षण और मिलीभगत से नाकेदार के द्वारा वन विभाग के कैंपस में सागवान की अवैध लकड़ियों से फर्नीचर बनाने का काम किया जा रहा था। जिसकी मुखबिरी दिनांक 29 दिसंबर 2020 को मुख्य वन संरक्षक उज्जैन अजय यादव को की गई मुखबिर ने मुख्य वन संरक्षक अजय यादव को इस से भी अवगत कराया गया था कि जिला वन मंडल अधिकारी देवास पीएन मिश्रा को हम यह जानकारी बताना नहीं चाहते और हमें उन पर विश्वास नहीं है । वह कार्यवाही नहीं करेंगे और नकाब डालने का काम करेंगे जिसके बावजूद मुख्य वन संरक्षक उज्जैन के द्वारा देवास जिला वन मंडल अधिकारी पीएन मिश्रा को सूचना दी गई जिसके बाद देवास के वन विभाग के एसडीओ संतोष शुक्ला के द्वारा देवास से ही रेंजर देवेंद्र सिंह चौहान को सूचना दी गई देवेंद्र सिंह चौहान के द्वारा नाकेदार को सूचना करके मोबाइल बंद कर षडयंत्र पूर्वक लापता कर दिया गया।
सवाल यह भी उठता है कि नाकेदार का घर सील किया गया तो नाकेदार के द्वारा दो दिवस में आपत्ति क्यों नहीं ली गई ।नाकेदार मुंह छुपाकर मोबाइल बंद करके भागता क्यों रहा। नाकेदार इंदर सिंह रावत की ड्यूटी कहां पर थी 2 दिन कहां पर लापता रहे। वन विभाग के द्वारा शासकीय मोबाइल दिया गया था जिसको बंद नहीं किया। इसके लिए क्या विभाग कार्यवाही करेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेंजर के घर के सामने ही नाकेदार का भी शासकीय आवास है जहां परअवैध सागवान की लकड़ी यों का काम चल रहा था इसमें रेंजर की मिलीभगत और संरक्षण की भूमिका सीधे-सीधे नजर आ रही है। जिसके कारण वन विभाग मुंह दिखाने लायक नहीं रहता जिसके चलते रात अंधेरे का फायदा उठाकर नाकेदार के घर के पीछे से लकड़ियों को रफा-दफा किया गया है ऐसी सूचना मिल रही है। जिला वन मंडल अधिकारी देवास पी एन मिश्रा को भी पूरी घटनाक्रम अवगत कराया गया तो वह भी झूठ बोलते नजर आए कह रहे थे कि बागली के वन विभाग के एसडीओ अमित सोलंकी को लिखित में निर्देश दिए गए हैं कार्रवाई की जाने की प्रक्रिया चल रही है। बागली वन विभाग एसडीओ अमित सोलंकी से चर्चा की गई तो उन्हें जिला वन मंडल अधिकारी देवास के द्वारा 30 दिसंबर 2020 की रात तक कोई लिखित में निर्देश देने की जानकारी नहीं होने की बात कही। पी एन मिश्रा जिला वन मंडल अधिकारी ने यह भी कहा कि हमारी इच्छा हम चाहेंगे तो नाकेदार पर बचा लेंगे हम चाहेंगे तो कार्यवाही करेंगे यह सरकार की नौकरी करके वनों का गला घोटने वाले वन रक्षकों का हमदर्द बनने की बात कही गई थी। जिला वन मंडल अधिकारी पी एन मिश्रा की कार्यप्रणाली पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं उज्जैन में तत्कालीन जिला वन मंडल अधिकारी के रहते अमृता योजना में पौधारोपण व अन्य मामलों में घोटाले पर करोड़ों रुपए की जांच शासन स्तर से कराई गई थी। जिला वन मंडल अधिकारी पीएन मिश्रा के द्वारा अनेकों मामले में अपना रवैया विवादित रहा है गौरतलब रहे कि पानीगांव रेंजर देवेंद्र सिंह चौहान का तबादला 4 दिसंबर को देवास होने के बाद भी आज दिनांक तक कार्य मुक्त नहीं किया गया। कन्नौद रेंजर को 4 दिसंबर को है तबादला होने के कुछ घंटे के बाद ही रिलीव कर दिया गया। पानीगांव एवं कन्नौद-खातेगांव में प्रभारी रेंजर के भरोसे काम चल रहा है।
?️चंचल भारतीय














