सभी रसों का समन्वय है श्री कृष्ण की कथा- जया किशोरी जी

देवास। श्री कृष्ण पूर्णानंद है, कृष्ण ने जो भी किया अद्भुत किया। जन्म लिया तो कारावास में, गोकुल गए यमुना पार करके, बाल लीला में दिखाएं चमत्कार, श्री कृष्ण की अद्भुगत बाल लीला रही तो वे बालकृष्ण हो गए। गाय से प्रेम किया तो गोपाल कृष्ण बन गए। प्रेम का इससे बड़ा उदाहरण संसार में और क्या होगा कि जब भी कोई प्रेम प्रसंग आता है तो राधाकृष्ण, गोपी कृष्ण का प्रेम संसार में दिखाई देता है। उनकी महारास लीला अद्भुत रही है। कृष्ण ने राजनीति की तो उनसे बड़ा कोई राजनीतिज्ञ नही है। युद्ध किया महाभारत से बड़ा कोई युद्ध नहीं है। ज्ञान की बात आती है गीता से बड़ा कोई उपदेश और ज्ञान नहीं हो सकता। जिनकी की कथा में रजत, तमस और सात्विक किसी भी प्रवृत्ति का मनुष्य हो श्री कृष्ण की कथा में आनंद प्राप्त कर सकता है।

श्रीकृष्ण भोगी भी है और योगी भी। सुखदेव जी जैसे महान योगी ने जिसकी कथा से आनंद प्राप्त किया हो। उन भगवान श्रीकृष्ण की कथा कितनी अद्भुत होगी। कृष्ण जो गृहस्थाश्रम भी है और संन्यस्ताश्रम दोनो का समन्वय होकर व्यास पूजा के अग्र स्थान पर विराजित रहते है। श्रीकृष्ण लीला में हर रस है चाहे वो हास्य हो, करूण रस हो, वीर रस हो, श्रृंगार हो, वीभत्स हो, चाहे कोई भी रस हो। वो अलौकिक प्रेम रस की प्राप्ति ही करायेंगे। हर रस में श्रीकृष्ण की भक्ति जीवन को सफल बनाती है। सभी रसो का समन्वय है श्रीकृष्ण की कथा। यह अध्यात्मिक विचार पुलिस ग्राउण्ड में माँ गंगा जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा में जया किशोरी जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाललीला के वर्णन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आपने कहा कि भगवान हर इंसान को सुधरने का मौका देता है। फिर भी वो सुधरता नही है तो उसे वो छोड़ता नही। भगवान का भक्त बनना है तो परीक्षा से तो गुजरना पड़ेगा। जो भक्त भगवान की कसौटी पर खड़ा उतर जाता है उसका उद्धार हो जाता है।

कथा प्रसंग में श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप दर्शन करने आए महादेव जी की कथा का वर्णन, पुतना वध के प्रसंग में आपने कहा कि जिसका शरीर सुंदर है और हृदय विष से भरा है वो पूतना है। भगवान कृष्ण और बलराम के नामकरण की सुंदर कथा का बखान किया। भगवान कृष्ण के माखन चोरी का वर्णन इतना रोचक व रसमय कर दिया कि सारा वातावरण गोकुलमय हो गया। आपने इंद्र और ब्रह्मा जी के अंहकार को नष्ट करने की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने देवता और मनुष्य दोनो के ही अहंकार को नष्ट किया है। धरती पर किसीकी पूजा होगी और किस कर्म से क्या फल प्राप्त होगा इसे भगवान कृष्ण ने सुनिश्चित किया है। गोवर्धन की पूजा करवाकर आपने इंद्र के कोप से ब्रजवासियों को बचाते हुए गोवर्धन पर्वत उठा लिया तब से आपका नाम गिर्राजधरण हो गया। कथा में प्रमुख यजमान ने व्यासपीठ की पूजा की। इस अवसर पर महंत कमलपुरी गोस्वामी ने श्रोताओं के समक्ष अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कथा आप सभी के सहयोग से हो रही है। परिस्थितियां विषम हो जाने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए समिति आप सब से क्षमा चाहती है। कथा निरंतर चलेगी। यह सौभाग्य हमें जया किशोरी जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ है। आप सब श्रद्धालु दोपहर 3 बजे से कथा में पधारकर कथा का आनंद ले।