देवास। मध्यप्रदेश में संचालित 108 एंबुलेंस में कार्यरत कर्मचारियो को लंबे संघर्ष लगभग 6 वर्ष के बाद विभिन्न आंदोलन, रैलियां, व कम्पनी से लंबी लड़ाई के बाद अंतत: न्यायालय से न्याय मिला। 108 एंबुलेंस के कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों को इस बात से ऐतवार था की उनसे कामतो 12-12 घंटे लिया जाता है, लेकिन वेतन का भुगतान मात्र 8 घंटे का ही किया जाता है। इस मुद्दे पर 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने 100 से अधिक बार विभाग व सरकार को ज्ञापन दिया एवं अपने प्रदेश स्तरीय संघ 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ मधयप्रदेश के बैनर तले कर्मचारियो ने आंदोलन कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश भी की, लेकिन सरकार व विभाग ने उनकी एक न सुनी। इस प्रकार से सफलता नहीं मिलते देख अंतत: कर्मचारियों ने न्यायालय जाकर अपनी लड़ाई जारी रखी और अब 6 वर्ष पश्चात कर्मचारीयों को उनका वास्तविक हक पूर्व की संचालन 108 कंपनी जीवीके ईएमआरआई का ओवर टाइम की राशि बंशीलाल चौहान, कृपालसिंह, गणेश पटेल, सुनील पटेल, सुनील मालवीय, जयदीप सिंह ठाकुर, विजन बकोरिया, संतोष मालवीय, अनिल आर्य, अभिषेक चौहान, सत्यनारायण सोलंकी, दीनदयाल चौहान, स्वर्गीय श्री राजीव चौधरी की पत्नी सहित कई कर्मचारियों के अपने खाते प्राप्त हुई।
जो विवाद 8 वर्षों से चला आ रहा था विवाद श्रम न्यायालय देवास में निर्णित हुआ एवं इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल इंदौर के आदेशोपरांत कर्मचारियो को उनके ओवरटाइम के 4 घंटे की राशिका भुगतान कर्मचारियों के खाते में जमाकर दिया गाया है। नई कंपनी जो वर्तमान में प्रदेश में 108 एंबुलेंस का संचालन कर रही है जिसका नाम जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड है इसके आने के बाद भी 108 एंबुलेंस कर्मचारियों के ड्यूटी के घंटों का विवाद लगातार चलता रहा, कंपनी से कई बार कर्मचारीयों की मीटिंग हुई, कर्मचारी एवं संघ के द्वारा सरकार को ज्ञापन दिए गए हड़ताल भी हुई लेकिन कंपनी ने इस बात को मानन ेसे सीधा इंकार कर दिया कि कर्मचारियों की ड्यूटी 12 घंटे की नहीं 8 घंटे की है, पिछले दिनों 2 अप्रैल 2018 को इसी विवाद में कंपनी के द्वारा 480 कर्मचारियो को कार्य करने से रोक भी दिया गया जिसमें देवास जिले से 52 कर्मचारी होल्ड पर हैं जिगित्सा हेल्थ केयर अप्रैल 2018 से अप्रशिक्षित ड्राइवर एवं एएमटी पैरा मेडिकल स्टाफ से काम करवा रही है, हालांकि लेबर कमिश्नर इंदौर के द्वारा 11 अप्रैल 2018 को आदेश निकाले गए थ ेकि किसी भी कर्मचारी को कार्य से रोका नहीं जा सकता यदि रोका गया है तो उन्हें कार्य पर लिया जाय, लेकिन कंपनी अपने अडिय़ल रवैया के कारण किसी आदेश को ना मानते हुए कर्मचारियों को कार्य से निकाल दिया, जिसका मामला भी न्यायालय में लंबित है। अब कर्मचारियों को ओवरटाइम के भुगतान होने के बाद यह साबित हो गया ह ैकि कर्मचारियों की लड़ाई सही थी और इस लड़ाई में कर्मचारियों को कार्य से निकाल देना पूरी तरह गलत है।














