DCGI ने कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन को आपातकाल इस्तेमाल की अंतिम मंजूरी दी

कोरोना वैक्सीन पर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी कि DCGI ने बड़ा ऐलान किया है. DCGI ने सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकाल इस्तेमाल की अंतिम मंजूरी दे दी है. अब ये वैक्सीन देश में आम लोगों को लगाए जा सकेंगे. इससे पहले SEC ने 1 जनवरी को कोविशील्ड और 2 जनवरी कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश DCGI से की थी. DCGI ने इस पर आज मुहर लगा दी है.

DCGI के निदेशक ने बताया कि दोनों ही वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और इसका इस्तेमाल इमरजेंसी की स्थिति (Restricted use in emergency conditions) में किया जा सकेगा. DCGI के मुताबिक दोनों ही वैक्सीन की दो दो डोज इंजेक्शन के रूप में दी जाएगी.

DCGI के निदेशक

बता दें कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया जब किसी दवा, ड्रग, वैक्सीन को अंतिम अनुमति देता है, तभी इन दवाओं, वैक्सीन का सार्वजनिक इस्तेमाल हो सकता है. ऐसी इजाजत देने से पहले DCGI वैक्सीन पर किए गए परीक्षण के आंकड़ों का कड़ाई से अध्ययन करता है. जब DCGI इस रिपोर्ट से संतुष्ट होता है तभी वह वैक्सीन के सार्वजनिक इस्तेमाल की इजाजत देता है.इधर देश में 2 जनवरी से कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन किया गया. ड्राई रन के रिजल्ट काफी सकारात्मक रहे. इस दिन वैक्सीन को देने की पूरी प्रक्रिया को रियल टाइम में किया गया.

https://twitter.com/narendramodi/status/1345607881366728705?s=08

कोवैक्सिन की क्या है खासियत ?

कोवैक्सिन के फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे 23 दिसंबर को सामने आए थे। ट्रायल्स 380 सेहतमंद बच्चों और वयस्कों पर किए गए।

3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फॉर्मूले तय किए गए। दो ग्रुप्स बनाए गए। उन्हें दो डोज चार हफ्तों के अंतर से लगाए गए।

फेज-2 ट्रायल्स में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की। दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी।

ट्रायल के नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक कायम रहती है।

एंटीबॉडी यानी शरीर में मौजूद वह प्रोटीन, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट्स के हमले को बेअसर कर देता है।

कंपनी का दावा है कि फेज-3 के लिए देशभर में सबसे ज्यादा 23 हजार वॉलंटियर्स पर ट्रायल हुआ।

कोवीशील्ड की क्या है खासियत?

कोवीशील्ड के क्लिनिकल ट्रायल्स के एनालिसिस से बहुत अच्छे नतीजे सामने आए हैं। वॉलेंटियर्स को पहले हॉफ डोज दिया और फिर फुल डोज। किसी को भी हेल्थ से जुड़ी कोई गंभीर समस्या देखने को नहीं मिली है।

जब हॉफ डोज दिया गया तो इफिकेसी 90% मिली। एक महीने बाद उसे फुल डोज दिया गया। जब दोनों फुल डोज दिए गए तो इफिकेसी 62% रही।

दोनों ही तरह के डोज में औसत इफिकेसी 70% रही। सभी नतीजे आंकड़ों के लिहाज से खास हैं। इफिकेसी जानने के लिए वैक्सीन लगाने के एक साल बाद तक वॉलेंटियर्स के ब्लड सैम्पल और इम्युनोजेनिसिटी टेस्ट किए जाएंगे। इंफेक्शन की जांच के लिए हर हफ्ते सैम्पल लिए जा रहे हैं।

कोवीशील्ड अन्य वैक्सीन के मुकाबले सस्ती भी है।