Dewas हिन्दू नववर्ष पर संस्था देववासिनी द्वारा आयोजित किया गया विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम…

• भारतीय संस्कृति सशक्त ओर समृद्धशाली, संस्था देववासिनी के तत्वाधान में होगी अयोध्या यात्रा : सोलंकी

देवास। भारतीय संस्कृति विश्व में सबसे सशक्त और समृद्धशाली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का जो दीप प्रज्जवलित हुआ है। उससे हमारी महान भारतीय संस्कृति ओर सशक्त हुई है। हमे इस पर गर्व होना चाहिए। बच्चों को अपनी संस्कृति का बोध कराना चाहिए, ताकि वे संस्कारवान बने। संस्था देववासिनी द्वारा हिन्दू नववर्ष की शाम को आयोजित विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम में यह विचार सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने व्यक्त किये।

गंगानगर स्थित हीरो शोरूम के समीप विराट कृपा परिसर में विराट सांस्कृतिक विरासत से सजे धजे देववासिनी के पांडाल में, हजारो की संख्या में उपस्थित भक्तजनों का पुष्पवर्षा करते हुए अभिनंदन किया गया। नृत्य के साथ सुमधुर श्रीगणेश वंदना मुस्कान गौस्वामी, अनुष्का जोशी, कृतिका बिजवा ने प्रस्तुत की। युवा शास्त्रीय भजन गायक प्रतीक गावशिंदे ने भजनों की कर्णप्रिय प्रस्तुतियॉ देते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में अनेक कलाकारों द्वारा मनमोहक प्रस्तुति दी गई।

श्रीराम हमारे आराध्य, देववासिनी के तत्वाधान में होगी अयोध्या यात्रा : देववासिनी के संरक्षक एवं  सांसद श्री सोलंकी ने मंच से अपने सांस्कृतिक एवं वैचारिक उदबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम हमारे प्राण है, आत्मा है, आराध्य है, आदर्श है। राम से ही हमारे देश की पहचान है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 500 वर्षो के संघर्ष के उपरांत अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ। 22 जनवरी को रामलला का विशाल प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया गया तो सारे देश में उत्सवी परिदृश्य दिखाई दिया। दीपावली से भी अधिक उत्साह के साथ रामलला का प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाया गया। श्री सोलंकी ने इस अवसर पर संस्था देववासिनी के तत्वाधान में रामलला के दर्शन हेतु अयोध्या यात्रा की घोषणा भी की।

देववासिनी की आरती का विमोचन, यूटयूब चेनल लांच : हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष में मॉ देववासिनी की महाआरती के एल्बम का विमोचन संस्था के संरक्षक, सांसद महेन्द्रसिंह सोलंकी के करकमलो से रिमोर्ट का बटन दबाकर किया गया।

सुन मेरी देवी, देववासिनी… महाआरती का लेखन जयंत जैन ओर शेखर कौशल द्वारा किया गया है ओर इसे स्वरबद्ध शुभांगी जलोरे, प्रवीण वर्मा द्वारा किया गया है। महाआरती में देववासिनी पर्वत, टेकरी पर प्रतिष्ठित देवी-देवताओं का बखुबी वर्णन किया गया है। एल्बम में चित्रण पप्पू चौहान, हर्ष वर्मा द्वारा किया गया। संस्था देववासिनी के नाम से यूटयुब चेनल भी लांच किया गया। कार्यक्रम का सारगर्भित एवं गरिमामय संचालन सुभांगी जलोरे, शेखर कौशल ने किया। आभार संस्था देववासिनी के सचिव महेश चौहान ने व्यक्त किया। यह जानकारी इस आयोजन के संयोजक अजय तोमर द्वारा दी गयी।

Dewas किसानों द्वारा कुआं निर्मित कर उसकी मुंडेर नहीं बनाने पर की जा रही है एफ आई आर दर्ज

देवास। जिले में किसानों द्वारा खेतों की मेड़ पर कुआं निर्मित किया जाता है लेकिन उसकी मुंडेर नहीं बनाई जाती है। ऐसे किसानों को चिन्हित कर उन पर धारा 188 व अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। इसी के तहत बरोठा पटाडी मार्ग के ग्राम रतेड़ी में स्थित कृषक प्रहलाद पिता गेंदालाल, अशोक कुमार पिता गेंदालाल, ताराचंद पिता गेंदालाल की भूमि में बिना मुंडेर के कच्चा कुआ स्थित है जो बरोठा पटाडी मार्ग से लगा हुआ है। साथ ही भूमि स्वामी संजय पिता हरिमोहन, उमेश पिता हरिमोहन कलाबाई पति हरिमोहन एव छगनलाल पिता रामाजी की कृषि भूमि पर बिना मुंडेर के कुए है। कृषको द्वारा इस संबंध में लगातार लापरवाही की जा रही थी और कुएं की मुंडेर को पक्का नहीं किया जा रहा था। इस संबंध में कार्रवाई करते हुए धारा 188 के तहत नायब तहसीलदार बरोठा द्वारा कृषको पर एफआईआर दर्ज की गई है।

chaitra navratri 2024 : चैत्र नवरात्रि 2024 का शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त : सुबह 5 बजकर 52 मिनट से लेकर 10 बजकर 4 मिनट तक पहला कलश स्थापना मुहूर्त बन रहा है। इसके बाद 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक घट स्थापना कर सकेंगे।नवरात्रि की पूजन सामग्री: पूजा के लिए मां दुर्गा की तस्वीर, लाल रंग का कपड़ा, फल, फूल, माला, आम का पत्ता, लौंग, सुपारी, इलायची, बंदनवार, हल्दी की गांठ, रोली, मौली, कमल गट्टा, सूखा नारियल, नैवेध, शहद, घी, शक्कर, पंचमेवा, जावित्री, गंगाजल, दूध, दही, नवग्रह पूजन के लिए रंग-बिरंगे चावल, धूप-दीप, वस्त्र और पूजा की थाली समेत सभी सामग्री एकत्रित कर लें।

मां दुर्गा की श्रृंगार सामग्री: मां दुर्गा को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने के लिए लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, काजल, मेहंदी, शीशा, बिछिया, इत्र, मंगलसूत्र, लिपस्टिक, नथ, गजरा, कंघी, कान की बली समेत 16 श्रृंगार की सामग्री रख लें।

कलश स्थापना की सामग्री: कलश स्थापित करने के लिए मिट्टी का घड़ा, मिट्टी, मिट्टी का ढक्कन, नारियल, जल, गंगाजल, मिट्टी का दीपक, हल्दी-अक्षत और लाल रंग का वस्त्र चाहिए।

कलश स्थापना की विधिः नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठें। स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करें।इसके बाद घर के मंदिर को साफ करें। मंदिर को फूलों से सजाएं। घट स्थापना के लिए एक मिट्टी के कलश में पानी भरकर रख दें। कलश में सिक्का, सुपारी, आम का पत्ते जरूर डालें। इसके बाद एक लाल कपड़ा बिछाकर उसपर चावल का ढेर बनाएं।अब चावल के ढेर पर कलश स्थापित करें। कलश पर कलावा बांध दें।इसके साथ ही कलश पर स्वास्तिक भी बनाएं। फिर एक मिट्टी के बर्तन में मिट्टी और जौ मिलाएं। इसमें थोड़ा पानी छिड़कें और इसे भी स्थापित कर दें। अब मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। सभी देवी- देवताओं कआ आह्वान करें।सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें और सभी मां दुर्गा समेत सभी देवी-देवताओं की आरती करें।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Chaitra Navratri 2024 : चैत्र नवरात्रि शुरू, जाने चैत्र नवरात्रि से जुड़ी सारी बाते

चैत्र नवरात्री 2024 : चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को शुरू होती हैं नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माँ दुर्गा की नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) की पूजा करते हैं और उनकी आराधना करते हैं। इसके दौरान भक्त ध्यान, भक्ति और त्याग के माध्यम से अपने आत्मा को शुद्ध करते हैं और भगवान की कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस वर्ष चैत्र नवरात्री 9 अप्रैल 2024 से शुरू होकर 17 अप्रैल को रामनवमी के साथ पूर्ण होंगी।

जाने चैत्र नवरात्रि 2024 के मुहूर्त एवं स्थापना विधि से जुड़ी सारी जानकारी

नवरात्रि का नाम ‘नव’ और ‘रात्रि’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इस त्योहार के दौरान, भक्तों को माँ दुर्गा की नौ रूपों की पूजा करनी चाहिए, जिन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है। ये नौ रूप माँ दुर्गा के निमित्त कुछ खास गुणों को प्रतिनिधित्व करते हैं, जैसे कि शक्ति, शांति, संजीवनी, धैर्य, स्नेह, तपस्या, विवेक, ज्ञान, और श्रद्धा।
चैत्र नवरात्रि का महत्व है कि यह वसंत ऋतु के आरंभ के साथ आता है और उत्तेजना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करता है। इसके अलावा, यह धर्म, संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें हमारी सांस्कृतिक विरासत की महत्वता को समझाता है।

  • चैत्र नवरात्र 2024 का कैलेंडर:
  • 9 अप्रैल 2024 मां शैलपुत्री की पूजा
  • 10 अप्रैल 2024 मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 11 अप्रैल 2024 मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 12 अप्रैल 2024 मां कुष्मांडा की पूजा
  • 13 अप्रैल 2024 मां स्कंदमाता की पूजा
  • 14 अप्रैल 2024 मां कात्यायनी की पूजा
  • 15 अप्रैल 2024 मां कालरात्रि की पूजा
  • 16 अप्रैल 2024 मां महागौरी की पूजा
  • 17 अप्रैल 2024 मां सिद्धिदात्री की पूजा, राम नवमी

नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन एक विशेष माँ दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है, जिसका प्रतिनिधित्व नौ रूपों में किया जाता है। नीचे दिए गए हैं नवरात्रि के नौ दिनों और उन दिनों में किस माँ दुर्गा की पूजा होती है, उनके बारे में अधिक जानकारी के साथ।

  1. प्रथम दिन – शैलपुत्री: (First Day of Navratri ) प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। यह माँ दुर्गा का प्रथम रूप है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। वह एक कमल की योनि में विराजमान हैं और एक त्रिशूल और कुंडली धारण करती हैं।
  2. द्वितीय दिन – ब्रह्मचारिणी: (Second Day of Navratri ) इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। वह दो मुख वाली और कदम-कदम पर जाती हैं।
  3. तृतीय दिन – चंद्रघंटा: (Third Day of Navratri ) तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो चांद के रूप में प्रतिष्ठित हैं। वे एक कमल की सवार होती हैं और एक चंद्रमा की प्रतिमा के साथ अपने मुख में एक त्रिशूल धारण करती हैं।
  4. चतुर्थी दिन – कूष्मांडा: (Fourth Day of Navratri ) इस दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जो सूर्य के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
  5. पंचमी दिन – स्कंदमाता: (Fifth Day of Navratri ) पंचमी दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो कार्तिक मास के पांचवें दिन पैदा हुए थे।
  6. षष्ठी दिन – कात्यायनी: (Sixth Day of Navratri ) इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो कात्यायन ऋषि की पुत्री हैं।
  7. सप्तमी दिन – कालरात्रि: (Seventh Day of Navratri ) सप्तमी दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो माँ दुर्गा का सबसे भयानक रूप मानी जाती है।
  8. अष्टमी दिन – महागौरी: (Eighth Day of Navratri ) अष्टमी दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, जो दुखों और दुर्गुणों का नाश करती हैं।
  9. नवमी दिन – सिद्धिदात्री: (Ninth Day of Navratri ) नवमी दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सिद्धियों की दात्री मानी जाती हैं।

इन नौ दिनों के दौरान भक्तों को नौ रूपों में माँ दुर्गा की पूजा करने का मौका मिलता है और उन्हें अपने जीवन में शक्ति, सामर्थ्य और आनंद का अनुभव होता है।

चैत्र नवरात्र के इन नौ दिनों में, लोग ध्यान, ध्यान, भजन-कीर्तन, और दान करके मां दुर्गा को खुश करते हैं। यह पर्व साधकों को सुख, समृद्धि, और आनंद की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है।

चैत्र नवरात्र 2024 के दौरान, लोगों को मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण को मजबूत करने का अवसर मिलता है। इस उत्सव के दौरान, धार्मिक सामग्री की खरीदारी, पंडालों की सजावट, और भजन-कीर्तन की ध्वनि सड़कों में सुनाई देती है। इसके अलावा, लोग एक दूसरे के साथ खुशियों का आनंद लेते हैं और परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर पर्व का महत्व मनाते हैं।

चैत्र नवरात्र 2024 के पर्व के दौरान, लोग विशेष रूप से ध्यान, प्रार्थना, और सेवा में जुटे रहते हैं। इस पर्व के दौरान, धार्मिक संगठनों और मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। यहां तक कि कई स्थानों पर नृत्य और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है ताकि लोग उत्सव का आनंद ले सकें।

चैत्र नवरात्र 2024 के पर्व के दौरान, लोग नौकरी, व्यापार, और व्यक्तिगत जीवन में सफलता और सुख की प्राप्ति के लिए मां दुर्गा की कृपा की कामना करते हैं। वे नौवीं दिन को समर्पित करते हैं और सिद्धिदात्री मां की पूजा करते हैं, जो भगवान शिव और पार्वती की रूप में जानी जाती हैं। इस दिन को राम नवमी भी कहा जाता है, जो प्रभु राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

इस तरह, चैत्र नवरात्र 2024 का उत्सव धार्मिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और यह हिंदू समाज में एक गहना रूप में शामिल है। इस पर्व के दौरान, लोग अपने आप को पुनर्जीवित करते हैं, अपने आप को धार्मिकता में समर्पित करते हैं, और मां दुर्गा की कृपा की कामना करते हैं।

Dewas संस्था देववासिनी द्वारा विशाल स्वरूप में धूमधाम से मनाया जाएगा हिन्दू नववर्ष…

गुढी पड़वा पर देववासिनी परिवार मिलन समारोह का आयोजित

देवास । शौर्य दिवस से संस्था देववासिनी द्वारा चामुण्डा माता टेकरी पर काशी के गंगा घाट पर होने वाली प्राचीन गंगा आरती की तरह निरंजनी महाआरती प्रारंभ की गई। वर्तमान में महाआरती में प्रति शनिवार, रविवार को हजारों की संख्या में भक्तो का जनसमूह उमड़ रहा है।

संस्था सचिव महेश चौहान ने बताया कि संस्था देववासिनी द्वारा चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा का पर्व विशाल स्वरूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। श्री चौहान ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि हिंदू नववर्ष से अनेक धार्मिक, पौराणिक संदर्भ जुड़े हुए है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी द्वारा इसी दिन सृष्टि की उत्पत्ति की गई थी। चैत्र नवरात्र का प्रारंभ होता है। विजय का प्रतीक गुड़ी पड़वा पर्व मनाया जाता है। भगवान श्री राम का राज्याभिषेक, धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक इसी दिन हुआ था। विक्रम संवत्सर का प्रारंभ, भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव अर्थात चैतीचण्ड उत्सव मनाया जाता है। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिन अथवा वर्ष प्रतिपदा उत्सव इसी दिन मनाया जाता है। इन महान संदर्भों से जुड़े हिन्दू नववर्ष पर विशाल कार्यक्रम संस्था देववासिनी के संरक्षक सांसद महेन्द्र सिंह सोलंकी के संरक्षण, प्रसिद्ध समाजसेवी अशोक खंडेलिया की अध्यक्षता में विराट कृपा भवन हीरो शोरूम के पिछे, गंगानगर, ए बी रोड पर आयोजित किया गया है। अपनी संस्कृति, अपना दर्शन, तजें (छोडे) विदेशी आकर्षण, इस विचार के साथ 9 अप्रैल को शाम 6 बजे से प्रारंभ होने वाले देववासिनी द्वारा आयोजित हिन्दू नववर्ष परिवार मिलन कार्यक्रम के संयोजक पार्षद अजय तोमर है। सह संयोजक पार्षद संजय दायमा, निलेश वर्मा, भूपेश ठाकुर, श्रीमती ऋतु सवनेर, प्रवीण वर्मा, गोपाल खत्री, सोनू परमार, प्रतीक सोलंकी, संजय ठाकुर है। हिन्दू नववर्ष पर आयोजित विशाल कार्यक्रम में हजारों की संख्या में सनातनी हिन्दू समाज जनों के एकत्रित होने का अनुमान है। संस्था देववासिनी द्वारा लक्ष्य रखा गया है कि 6 दिसंबर से चामुण्डा माता टेकरी पर हो रही निरंजनी महाआरती में शहर के समस्त वार्डो से जिन भक्तो ने हिस्सा लिया है, वे परिवार व इष्ट मित्रों सहित अधिक से अधिक संख्या में हिन्दू नववर्ष के विशाल कार्यक्रम में सम्मिलित हो कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बने। इसके लिए संस्था देववासिनी के कार्यकर्ताओं हरि सिंह धनगर, शंभू अग्रवाल, शेखर कौशल, पंकज वर्मा, जयेश पडियार, खिलेश शिंदे, अशीष दवे, पंडित योगेश, मनीष जैन, शुभम चौहान, देवेंद्र माली, अनुज शर्मा, दीपेश शर्मा, पंकज सोनी, रितेश उपाध्याय, रोहित द्वारा पिछले सप्ताह से शहर के विभिन्न वार्डो में बैठके की जा रही है।

Dewas ऑनलाइन फ्रॉड: शहर के युवक से की 90 हज़ार की ठगी…

देवास। ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं आजकल आम हो गई है। हर दिन कोई न कोई ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो जाता है। शहर में घर बैठे टास्क कंप्लीट कर पैसे कमाने के चक्कर में मोती बंगला निवासी युवक ठगी का शिकार हुआ है। पीड़ित ने मामले की कोतवाली थाने में पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में पीड़ित लवी शर्मा ने बताया की आरोपी ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर चैटिंग कर टास्क कंप्लीट कर मुनाफे का लालच देकर ऑनलाइन फ्रॉड किया टास्क के नाम पर मुझसे 90 हज़ार रुपए की ठगी कर ली। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा लगाते हुए अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

Dewas 77 साल के पड़ोसी व्यक्ति ने किया नाबालिका के साथ दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

देवास। शहर में शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जिसमे 77 वर्ष के व्यक्ति ने पड़ोस में रहने वाली नाबालिका के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने प्रकरण में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल शहर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के पालनगर में रहने वाले बुजुर्ग आरोपी रमेश वर्मा द्वारा पड़ोस में रहने वाली नाबालिका के साथ बीते जनवरी माह में करीब 8 दिन तक बार बार बलात्कार किया और किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने नाबालिक फरियादिया की फरियाद पर धारा 376, 506, पोक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं व एक्ट में अपराध दर्ज कर गुरुवार को कायमी करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

Dewas विश्व विख्यात कालीचरण महाराज पहुंचे देवास…

जो हिंदू हित की बात उसे ही हम मतदान करे: कालीचरण महाराज

देवास। विश्व विख्यात, कालीचरण महाराज का, देवास नगर आगमन हुआ। महाराज कॉलोनाइजर नवीन सोलंकी के निवास पहुंचे। जहां पर उन्होंने मीडिया के सामने लोकसभा निर्वाचन को लेकर कहा, कि जो लोग धर्मनिष्ट है सभी हिन्दुओं द्वारा उन्हें राजनीति में बड़े पदों पर भेजना चाहिए जिससे हम भारत को पुनः सोने की चिड़िया जिन राजाओं (विधायक सांसद) के हृदय में धर्म निष्ठा नही होगी वो निश्वय ही सिर्फ अपना घर ही भरेंगे। जिन राजाओं (विधायक सांसद) के हृदय में धर्म निष्ठा होगी वही देश को सोने की चिड़िया, जगत गुरु बना सकते है। इसलिए में आव्हान करना चाहता हु की जातिवाद, वर्णवाद का त्याग करते हुए सिर्फ हिंदू धर्म ध्वजा के लिए एकत्रित होवे। सभी हिन्दुओं को में कहना चाहता हु की जो हिंदू हित की बात करे उसे ही आप मतदान करे। वही माता टेकरी पर बना रहे देवीलोक के बारे में भी उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के लिए बहुत ही खुशी की बात है।

Dewas : पुलिस ने चैन स्नेचिंग करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार, जांच दौरान चेक किए करीब 750 CCTV…

  • आरोपी पर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश में दर्ज है करीब 31प्रकरण,

देवास। पुलिस ने शहर तथा अनेक राज्यों में चैन स्नेचिंग की घटना को अंजाम देने वाले शातिर चोर को गिरफ्तार कर लिया है। जिसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने प्रेस वार्ता कर दी।

दरअसल बीते 17 मार्च को शहर के मोतीबंगला क्षेत्र में रहने वाली रिटायर्ड स्कूल टीचर उमा भारती कोतवाली की दोपहर करीबन 2.00 बजे उनके घर के सामने सब्जी के ठेले पर से सब्जी खरीदते समय बिना नंबर की मोटर साईकिल पर सवार एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके गले में पहनी हुई सोने की चैन को झपटा मारकर गले से चैन छीनकर भाग गया था।
कोतवाली थाना प्रभारी दीपक सिंह यादव एवं थाना टीम द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए शहर देवास से बाहर जाने वाले रास्ते एवं टोल के CCTV चैक किए गये। करीब 750 CCTV फुटेज को चैक करने के बाद पुलिस ने शातिर चैन स्नेचर फिरोज उर्फ लोटीया पिता शफीक खान साल निवासी भोपाल के रुप में आरोपी की पहचान हुई।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से घटना में प्रयुक्त पल्सर मोटर. सा. चोरी हुई सोने की चैन सहित अन्य सामान जब्त कीया। जब्त समान कुल कीमत करीब 2 लाख रूपये है।
आरोपी ने अन्य चैन की लूट करना भी स्वीकार किया है। उक्त आरोपी पर मध्यप्रदेश तथा उत्तरप्रदेश के अनेक शहरो में करीब 31 आपराधिक प्रकरण लूट व अन्य गंभीर धाराओ के दर्ज है।

Dewas फाग यात्रा : अयोध्या धाम (जवाहर चौक) से मथुरा धाम (सयाजी द्वार) तक निकली रंगारंग यात्रा…

• ब्रज की लठमार होली, श्री राधा कृष्ण की झांकी, पंजाबी भांगड़ा, भगोरिया नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र

देवास। शहर की फाग यात्रा अब अपनी एक अनूठी पहचान बना रही है। पिछले 2 दशकों से निकल रही फाग यात्रा में हर वर्ष भव्यता और अनुठापन देखने को मिलता है। परंतु इस वर्ष की फाग यात्रा की भव्यता और अनूठापन की बात ही कुछ और रही है।

प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी सामाजिक समरसता मंच के तत्वाधान में रंगपंचमी के अवसर पर पारंपरिक फाग यात्रा इस बार और भव्यता के साथ निकाली गई। इस वर्ष फाग यात्रा में अनूठा कार्यक्रम तय किया गया जिसमे शहर के जवाहर चौक को अयोध्या धाम और सयाजी द्वारा को मथुरा धाम बनाया गया। फाग यात्रा अयोध्या धाम (जवाहर चौक) से प्रभु श्री राम जी की आरती के साथ प्रारंभ हुई। जिसमें मातृशक्ति द्वारा ब्रज की लठमार होली के साथ रंग गुलाल और पानी के टैंकर द्वारा रंगो की बौछार हुई। श्री राधा कृष्ण जीवंत झांकी, पंजाबी भांगड़ा नृत्य, भगोरिया नृत्य टोली विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा पूरे यात्रा के समय प्रस्तुति दी गई यात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, बच्चे, जनप्रतिनिधि, बुजुर्ग और युवाओं ने बाद चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे यात्रा मार्ग में व्यापारी व सामाजिक संगठनों द्वारा जलपान की व्यवस्था की गई।

फाग यात्रा नयापुरा, तुकोगंज रोड, जनता बैंक चौराहा, सुभाष चौक, नावेल्टी चौराहा एमजी रोड होते हुवे श्री मथुरा धाम (सयाजी द्वार) पर श्री कृष्ण लला की आरती के साथ समाप्त हुई। यात्रा समापन के बाद अपल्हार (आलू बड़े) कि व्यवस्था भी रखी गई थी।