बरोठा(नितेश नागर) । आज शनिवार को हिन्दू जागरण मंच द्वारा बरोठा थाना क्षेत्र के सघन आबादी में स्थित मस्जिद में अवैधानिक रूप से बिना उचित अनुमति लिए लाउड स्पीकर अथवा एम्लीफायर आदि , लगाकर की जा रही अजान से उत्पन्न पब्लिक न्यूसेंस अथवा हो रही जान लेवा ध्वनि प्रदूषण को पूर्णतः प्रतिबंधित किये जाने बाबद बरोठा थाना में ज्ञापन दिया। हिन्दू जागरण मंच द्वारा आज जिलेभर सहित शहर के विभिन्न थानों पर इस प्रकार से ज्ञापन दिया जा रहा है।
मंच द्वारा दिये गए ज्ञापन में कहा गया….
निवेदन है कि बरोठा थाना के क्षेत्र की मस्जिद में लाउड-स्पीकर से आम जनता के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। अन्य ध्वनि प्रदूषण मस्जिद में लगे, लाउडस्पीकर एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रो से ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है । गाँव के रहवासी इलाके मे जहां सभी आयु वर्ग के व्यक्ति निवास करते है, कार्य करते है। वे सब उक्त तीव्र ध्वनि से होने वाले प्रदूषण से आम जनता पीढित है। अधिकांश समय मस्जिद में प्रतिदिन मानक ध्वनि नियमों से अधिक का ध्वनि प्रदूषण होता है। जिसके कारण स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव पड़ता है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश क्र. 4792/2005 राजेन्द्र कुमार वर्मा विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन में ध्वनि प्रदूषण से जीवन की हानि को जोड़ा गया। इसी प्रकार अनुच्छेद 51 ए (जी) के मौलिक कर्तव्यों में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है। इस प्रकार ध्वनि विस्तारक यंत्र जिसमें एम्पलीफायर के उपयोग होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी जानलेवा माना गया है जो कि व्यक्ति के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का हनन है। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पारित मौलाना मुफ्ती सईद विरूद्ध स्टेट आफ पश्चिम बंगाल मामले में निर्णित किया गया है । कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता तो है। परन्तु इसके तहत किसी को भी ध्वनि प्रदूषण करने का लाईसेंसी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। वर्ष 1991 सर्वोच्च न्यायालय के एक चर्च ऑफ गॉड इन इण्डिया विरूद्ध के. के. आर. मैजेस्टिक कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएसन के मामले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है ,कि किसी भी सभ्य समाज में ध्वनि प्रदूषण को किसी भी धार्मिक मामले से ऊपर नहीं रखा जा सकता । इसके तहत इससे होने वाली हानियों का भी स्पष्ट लेख किया गया है। उक्त की स्थिति में पर्यावरण के लिये एवं उसकी सुरक्षा के लिये भारत के समस्त नागरिकों को भारतीय संविधान में उनके धर्म के ऊपर रख गया है ,और पर्यावरण संरक्षण को समस्त भारतीय नागरिकों की जिम्मेदारी बताया गया है।
लाउड स्पीकर, एम्पलीफायर एवं अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र का प्रयोग थाना क्षेत्र की सघन बसाहट के क्षेत्र में स्थित मस्जिदों में होने वाली अजानों से आस-पास के रहवासियों को तीव्र मानसीक एवं शारीरिक परेशानियों का सामना क्षेत्र वासियों जिसमें वृद्ध, बच्चे, मरीज, विद्यार्थी शामिल है को करना पड़ रहा है। उक्त मामला भा.द.वि. की धारा 268 के तहत ध्वनि प्रदूषण एक पब्लिक न्यूसेंस उक्त कृत्य है। सिजकी सजा भा.द.वि. की धारा 290 मे वर्णित है। उक्त प्रकरण के ध्वनि से उत्पन्न आमजन के मध्य न्यूसेंस की स्थिति में पुलिस एक्ट 1861 के तहत कार्यवाही भी की जाती है।
कार्यक्रम अथवा धार्मिक प्रार्थनाओं को लाऊड स्पीकर अथवा अन्य ध्वनि बडाने के यंत्र फायर आदि का उपयोग करने के पूर्व संबंधित थाना क्षेत्र तथा ग्राम पंचायत से अनुमति लेने की भी आवश्यकता है। बिना अनुमति लिये क्षेत्र में पूरे सप्ताह, पूरे वर्ष लगातार मस्जिदों से उत्पन्न ध्वनि से जन-जीवन प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त मस्जिद से जुडे स्थलों पर भी ध्वनि • विस्तारक यंत्र लगाकर तीव्र ध्वनि की जाती है जो कि मानव जीवन एवं स्वास्थ्य के लिये घातक है। पुलिए एक्ट 1861 की धारा 30 एवं धारा 32 के तहत पुलिस मस्जिद द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण एवं न्यूर्सेस सतत् उत्पन्न किये जाने पर दण्ड अधिरोपित किया जाने का प्रावधान है।
साऊदी अरेबिया जहां लगभग 94 हजार मस्जिदें है जिनमें से अधिकांश रहवासी क्षेत्र में है वहां के इस्लामिक माालों के मंत्रालय (Ministry of Islamic Affairs Saudi Arabia) ने इबादत हेतु लाऊड स्पीकर के माध्यम से बुलावे पर पूर्णतः रोक लगा दी है। यह रोक इस्लामिक राष्ट्र के लोगों द्वारा मज्जिदो से हो रहे शोर की शिकायतों के बाद लगाई गई है। मामला पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधित है इसका किसी धर्म विशेष से कोई ताल्लुकात नहीं है। पूजा, प्रार्थना अथवा इबादत का एक निश्चित समय मस्जिदों में तय है। इस प्रकार के लाऊड स्पीकर के प्रयोग को अवैधानिक एवं गैरकानूनी होने से पूर्णतः प्रतिबंधित करे। पर्यावरण संरक्षण एवं मानव जीवन के हित में तत्काल रोक लगाई जाये।
• बसाहट के क्षेत्र में तीव्र ध्वनि प्रदूषण उपरोक्त मस्जिदों से उत्पन्न हो रहा है जो कि, आमजन के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का हनन होने के साथ-साथ पब्लिक न्यूसेंस की श्रेणी में आता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित गाइड-लाईन अनुसार किसी भी संस्था अथवा व्यक्ति को निर्धारित डेसिबल से अधिक ध्वनि किये जाने का अधिकार नही है, चूंकि लाउड स्पीकरों के माध्यम से अत्यधिक मात्रा में अवैधानिक रूप से बिना उचित अनुमति प्राप्त किये ध्वनि प्रदूषण किया जा रहा है, जिसके डेसिबल को व्यवहारिक रूप से मापा जाना अलग-अलग क्षेत्रों में संभव नहीं होने से, उक्त का लाभ उठाकर कर सभी मस्जिदों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में लाउड स्पीकरों द्वारा अजान की जा रही है, जो कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों एवं विधिक प्रावधानों का उल्लघन है। इस हेतु क्षेत्राअंतर्गत स्थित समस्त मस्जिदे उपरोक्त कानुन की परिधि में आती है जिसके विरूद्ध पुलिस प्रशासन को अनुशासनात्मक एवं दण्डात्मक कार्यवाही जिसमें ऐसे स्थलों को नोटिस देकर त्वरीत कार्यवाही कर अवैधानिक एवं बिना अनुमति के लगे लाउड स्पीकरों को हटवाया जाये तथा मस्जिदों में लाउड स्पीकर के माध्यम से शोर को शीघ्र पूर्ण प्रतिबंध लगाया जावे। उक्त कृत्य को रोकने हेतु दोषियों पर कठोर कानूनी कार्यवाही करने का कष्ट करे।
