देवास। अमानक कीटनाशक विक्रय करने पर तीन कीटनाशक औषधी विक्रेताओं मैसर्स न्यू अमरजीत एग्रो सतवास विकासखंड कन्नौद, मैसर्स मां नर्मदा एग्रो इंटरप्राइजेस खातेगांव, मैसर्स महिमा कृषि सेवा केंद्र खातेगांव के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। उपसंचालक कृषि नीलमसिंह चौहान ने बताया कि गुण नियंत्रण कार्यक्रम अन्तर्गत खरीफ वर्ष-2020 में जिले के कृषकों को पौध संरक्षण औषधी आदान सामग्री उच्च गुणवत्ता की मिल सके, इसलिए मैसर्स न्यू अमरजीत एग्रो सतवास विकासखण्ड कन्नौद, मैसर्स मां नर्मदा एग्रो इंटरप्राइजेस खातेगांव, मैसर्स महिमा कृषि सेवा केंद्र खातेगांव का जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा 10 अगस्त 2020 को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर निरीक्षण के दौरान कीटनाशी नियम 1971 की धारा 10 डी, 15 (2), 10 (4), 15 (1) एवं 15 (ए) का स्पष्ट उल्लंघन होना पाया गया। उन्होंने बताया कि कीटनाशक अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 की धारा-14 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए तीन कीटनाशक औषधी मैसर्स न्यू अमरजीत एग्रो सतवास विकासखण्ड कन्नौद, मैसर्स मां नर्मदा एग्रो इंटरप्राइजेस खातेगांव, मैसर्स महिमा कृषि सेवा केंद्र खातेगांव के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किये गए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
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नाबालिक लड़की के अपहरणकर्ता की गिरफ्तारी न होने से आदिवासी समाज के लोग पुलिस थाने में हुवे एकत्रित,10 दिन में उचित कार्रवाई ना होने पर किया जाएगा उग्र आंदोलन
कांटाफोड़ – पुलिस थाना कांटाफोड़ के अंतर्गत ग्राम तुमड़ीखेड़ा से 4 अगस्त को भंडारिया का दिनेश पिता जलाल लड़की को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया जिसकी रिपोर्ट 5 अगस्त को पुलिस थाना कांटाफोड़ में दर्ज की गई आज दिनांक 11 अगस्त तक 6 दिन बीत जाने पर भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई जिस पर आदिवासी समाज में रोष व्याप्त है। यह जानकारी देते हुए समाज के लोगो ने बताया की मंगलवार को हम समाज के लोगों के साथ थाना कांटाफोड पर पहुंचे यहां पर हमारे समाज के लोगों में रोष व्याप्त है कि लड़की के अपहरणकर्ता को आज दिनांक तक भी पुलिस के द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया जबकि लड़की नाबालिक है और मार्कशीट के आधार पर 9 सितंबर को लड़की पूर्ण रूप से बालिक हो जाएगी इसके आधार पर यदि आरोपी द्वारा लड़की को किसी प्रकार से डरा धमकाकर बहला फुसलाकर अपने पक्ष में गवाही देने के लिए बाध्य कर लिया गया तो हमारे समाज की एक और लड़की अन्य समाज की गिरफ्त में आ जाएगी और दूसरे समाज का हिस्सा बन जाएगी। हमारा आदिवासी समाज ताना बाना सुचारु रुप से बरकरार रहे और रिती रिवाज परंपरा और विवाह संबंधों में अन्य समाज का दखल ना हो। इस मामले में उचित कार्रवाई कर जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्त में लेकर कठोर सजा दिलवाई जाए।साथ ही 10 दिनों के अंदर संबंधित आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया तो समाज के लोग उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
मशहूर शायर राहत इंदौरी नहीं रहे,सुबह ही आई थी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव, दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत
कोटोना संक्रमण के कारण वे अस्पताल में सुबह
भर्ती हुए थे और इसकी जानकाटी उन्होंने खुद
अपने फेसबुक अकाउंट पर भी दी थी। शाम को
अचानक उन्हें तीन दिल के दौरे आए और उन्होंने
अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। डाक्टरों के
अनुसार दोनों फेफड़ों में कोटोना का संक्रमण,
किडनी में सूजन थी और सांस लेने में तकलीफ
होने के कारण वे अस्पताल में भर्ती हुए थे।
इससे पहले उन्होंने लिखा था कोविड के शुरुआती
लक्षण दिखाई देने पर मेटा कोटोना टेस्ट किया
गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अरविंदो
अस्पताल में एडमिट हूं, दुआ कीजिए जल्द से
जल्द इस बीमाटी को हटा दूं। एक और इल्तेजा है,
मुझे या घट के लोगों को फोन ना करें, मेटी
खैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती
रहेगी। इस ट्वीट के
राहत इंदौटी के चाहने वाले
जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की दुआ के साथ
मैसेज लिख रहे थे लेकिन देर शाम उनके निधन
की खबर आई।
देवास- रियासतकालीन दिण्डी यात्रा नहीं निकलेगी,राजबाडे पर ही होगी पूजा अर्चना
देवास। श्री कृष्णजन्माष्टमी पर निकलने वाली रियासतकालीन दिण्डी यात्रा को कौराना महामारी के चलते स्थगित कर दिया गया है। स्मरण रहे लगभग 100 वर्षों से भी अधिक समय से निकलने वाली दिण्डी यात्रा राजबाडे से प्रारम्भ होकर शहर के प्रमुख मार्गो से मीठा तालाब पहुंचती हैं । पालकी में सवार होकर भगवान श्रीकृष्ण भ्रमण पर निकलते हैं। दिण्डी यात्रा के दौरान मार्ग के दोनों और खडे होकर शहर की जनता पालकी और भगवान का पूजन अर्चन कर पुष्प वर्षा करती हैं। दिण्डी यात्रा में राज परिवार के महाराज पैदल चलकर जनता का अभिवादन स्वीकार करते है। लेकिन इस वर्ष कौराना महामारी के चलते दिण्डी यात्रा को स्थगित करने का निर्णय राजपरिवार द्वारा लिया गया है। परम्परागत तरीके से होने वाले जन्माष्टमी के पर्व को राजबाडे पर ही मनाया जायेगा तथा पूजा अर्चना की जावेगी। पूजा अर्चना के पश्चात स्थानीय मीठा तालाब पर भी पूजन कर पूजन सामग्री का विर्सजन किया जायेगा। कोरोना महामारी को देखते हुए उपरोक्त कार्यक्रम में सार्वजनिक सहभागिता नहीं रहेगी। केवल राजपरिवार के लोग ही कार्यक्रम में सम्मिलित रहेगे।
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भोपाल मां चामुण्डा दरबार के पुजारी गुरु पंडित रामजीवन दुबे एवं ज्योतिषाचार्य श्री विनोद रावत ने बताया कि भादपद कृष्ण पक्ष अष्टमी बुधवार 12 अगस्त को जन्माष्टमी का 5247वां मध्य रात्रि 12 बजे त्यौहार धूमधाम से मनाया जावेगा।पूरे देशभर में जगह-जगह मटकी फोड़ का आयोजन भी किया जावेगा। रात को कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहेगी। खीर, मिश्री, मक्खन, फलों का प्रसाद वितरण होगा। भगवान कृष्ण का जन्मदिन बुधवार ही था। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को इस बार रोहिणी की जगह कृतिका नक्षत्र रहेगा। मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्मलिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। कथा : द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे।गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था। एक समय कंस अपनीबह बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है? कंस ने
देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डालदिया। वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव- देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ माया थी। जिस कोठरी में।देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े।
तब भगवान ने उनसे कहा- अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है। फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी। उसी समय वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए। कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए। अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो
देश के सभी पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार का तोहफा,पत्रकार वेल फेयर स्कीम’ में सरकार ने किया संशोधन
नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को मजबूती प्रदान करने के लिए ‘पत्रकार वेलफेयर स्कीम’ में संशोधन कर दिया है, यह देश भर के सभी पत्रकारों के लिए लागू हो गया है, दरअसल केंद्र सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए इस स्कीम को फरवरी 2013 में लागू किया गया था, अब इसमें संशोधन किया गया है, जिसका फायदा सभी जर्नलिस्ट्स ले सकेंगे।यदि किसी जर्नलिस्ट का निधन हो जाता है या फिर वह विकलांग हो जाता है, तो इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार उसके आश्रितों को 5 लाख रुपए की सहायता देगी। वहीं, इलाज के लिए भी पत्रकार को सरकार की ओर से 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।इस योजना की पात्रता के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है। जिसके संरक्षक केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री होंगे। वहीं, विभाग के सचिव अध्यक्ष, प्रधान महानिदेशक, एएस एंड एएफ, संयुक्त सचिव समिति के सदस्य हैं।वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उप सचिव अथवा निदेशक सदस्य संयोजक हैं।इस समिति का काम होगा कि ये पीड़ित पत्रकार या फिर उनके परिजनों के आवेदन पर विचार करे तथा उसके मुताबिक आर्थिक सहायता देने का फैसला ले।इस योजना के तहत एक अच्छी बात यह है कि इसमें केंद्र या राज्य सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकार होने का कोई बंधन नहीं है।यह योजना पत्रकारों से संबंधित 1955 के एक अधिनियम “Working Journalists and other Newspaper Employes (Condition of service) And Miscellaneous Provision Act 1955” के तहत पत्रकार की श्रेणी में आने वाले देश भर के जर्नलिस्ट पर लागू किया गया है।*वेब न्यूज़ और टीवी जर्नलिस्ट्स को भी होगा लाभ,*वहीं अब इस योजना का लाभ टेलीविजन और वेब जर्नलिस्ट्स भी ले सकेंगे, न्यूज पेपर्स के बाद टेलीविजन जगत में क्रांति आई और टीवी न्यूज चैनल्स की शुरुआत हुई। वहीं अब वेब जर्नलिज्म का जमाना आ गया है और वेब पर भी अच्छी पत्रकारिता की जा रही है। इसके साथ ही सभी न्यूज पेपर्स के एडिटर, सब एडिटर, रिपोर्टर, फोटोग्राफर, कैमरामैन, फोटो जर्नलिस्ट, फ्रीलांस जर्नलिस्ट, अंशकालिक संवाददाता और उन पर आश्रित परिजनों को भी स्कीम के दायरे में रखा गया है। इसका लाभ लेने की शर्त यह है कि कम से कम 5 साल तक पत्रकार के रूप में सेवाएं दी गई हों। स्कीम के तहत यह जानकारी भी दी गई है कि एक से पांच लाख की सहायता किन परिस्थितियों में पीड़ित पत्रकार या उनके परिजनों को दी जाएगी,*अधिक जानकारी के लिए-*
http://pib.nic.in/prs/JWSguidelinesEnglish.pdf?Sel=17&PSel=2
इस लिंक पर जा सकते हैं, अथवामहानिदेशक (मीडिया एवं संचार), प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, ‘ए’ विंग, शास्त्री भवन, नई दिल्ली- 110001 से भी संपर्क किया जा सकता है।जिन पत्रकारों या उनके परिजनों को सहायता चाहिए, वे विहित फॉर्म पर अपने आवेदन दिए गए पते पर भेज सकते हैं।तीन पृष्ठों के इस फॉर्म का नमूना प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पत्र सूचना ब्यूरो) की वेबसाइट pib.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं।
देश के सभी पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार का तोहफा,पत्रकार वेल फेयर स्कीम’ में सरकार ने किया संशोधन
नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को मजबूती प्रदान करने के लिए ‘पत्रकार वेलफेयर स्कीम’ में संशोधन कर दिया है, यह देश भर के सभी पत्रकारों के लिए लागू हो गया है, दरअसल केंद्र सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए इस स्कीम को फरवरी 2013 में लागू किया गया था, अब इसमें संशोधन किया गया है, जिसका फायदा सभी जर्नलिस्ट्स ले सकेंगे।यदि किसी जर्नलिस्ट का निधन हो जाता है या फिर वह विकलांग हो जाता है, तो इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार उ)सके आश्रितों को 5 लाख रुपए की सहायता देगी। वहीं, इलाज के लिए भी पत्रकार को सरकार की ओर से 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।इस योजना की पात्रता के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है। जिसके संरक्षक केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री होंगे। वहीं, विभाग के सचिव अध्यक्ष, प्रधान महानिदेशक, एएस एंड एएफ, संयुक्त सचिव समिति के सदस्य हैं।वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उप सचिव अथवा निदेशक सदस्य संयोजक हैं।इस समिति का काम होगा कि ये पीड़ित पत्रकार या फिर उनके परिजनों के आवेदन पर विचार करे तथा उसके मुताबिक आर्थिक सहायता देने का फैसला ले।इस योजना के तहत एक अच्छी बात यह है कि इसमें केंद्र या राज्य सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकार होने का कोई बंधन नहीं है।यह योजना पत्रकारों से संबंधित 1955 के एक अधिनियम “Working Journalists and other Newspaper Employes (Condition of service) And Miscellaneous Provision Act 1955” के तहत पत्रकार की श्रेणी में आने वाले देश भर के जर्नलिस्ट पर लागू किया गया है।*वेब न्यूज़ और टीवी जर्नलिस्ट्स को भी होगा लाभ,*वहीं अब इस योजना का लाभ टेलीविजन और वेब जर्नलिस्ट्स भी ले सकेंगे, न्यूज पेपर्स के बाद टेलीविजन जगत में क्रांति आई और टीवी न्यूज चैनल्स की शुरुआत हुई। वहीं अब वेब जर्नलिज्म का जमाना आ गया है और वेब पर भी अच्छी पत्रकारिता की जा रही है। इसके साथ ही सभी न्यूज पेपर्स के एडिटर, सब एडिटर, रिपोर्टर, फोटोग्राफर, कैमरामैन, फोटो जर्नलिस्ट, फ्रीलांस जर्नलिस्ट, अंशकालिक संवाददाता और उन पर आश्रित परिजनों को भी स्कीम के दायरे में रखा गया है। इसका लाभ लेने की शर्त यह है कि कम से कम 5 साल तक पत्रकार के रूप में सेवाएं दी गई हों। स्कीम के तहत यह जानकारी भी दी गई है कि एक से पांच लाख की सहायता किन परिस्थितियों में पीड़ित पत्रकार या उनके परिजनों को दी जाएगी,*अधिक जानकारी के लिए-* http://pib.nic.in/prs/JWSguidelinesEnglish.pdf?Sel=17&PSel=2 इस लिंक पर जा सकते हैं, अथवामहानिदेशक (मीडिया एवं संचार), प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, ‘ए’ विंग, शास्त्री भवन, नई दिल्ली- 110001 से भी संपर्क किया जा सकता है।जिन पत्रकारों या उनके परिजनों को सहायता चाहिए, वे विहित फॉर्म पर अपने आवेदन दिए गए पते पर भेज सकते हैं।तीन पृष्ठों के इस फॉर्म का नमूना प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पत्र सूचना ब्यूरो) की वेबसाइट pib.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं।
नई शिक्षा नीति का मध्यप्रदेश में होगा आदर्श क्रियान्वयन- मुख्यमंत्री श्री चौहान,मुख्यमंत्री श्री चौहान और केन्द्रीय मंत्री श्री निशंक ने की वेबिनार में भागीदारी-स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यवस्थाएं की जाएंगी और अधिक मजबूत
देवास। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिस तरह मध्यप्रदेश ने बीते वर्षों में बिजली, पानी और कृषि के क्षेत्र में विकास के नए रिकार्ड बनाए हैं, उसी तरह अब स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करने के प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप निर्माण के लिए वेबिनार श्रृंखला के माध्यम से किए जा रहे मंथन के तीसरे दिन स्वास्थ्य और शिक्षा वेबिनार का शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशन में भारत की नई शिक्षा नीति के तीन प्रमुख उद्देश्यों ज्ञान-कौशल और संस्कार को प्राप्त करने के सोच से तैयार की गई है। मध्यप्रदेश इसका आदर्श तरीके से क्रियान्वयन करेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आयुष्मान भारत योजना में नया सहारा दिया है। यह योजना मार्गदर्शक सिद्ध हो रही है। मध्यप्रदेश में दूरस्थ ग्रामीण अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि तकनीकि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में 600 करोड़ की लागत से सिंगापुर के सहयोग से ग्लोबल स्किल पार्क के विकास की योजना है। इसके क्रियान्वयन की गति बढ़ायी जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की प्राप्ति के लिए नीति आयोग के निर्देशन में इस वेबिनार श्रृंखला के माध्यम से रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। तीन वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा।
केन्द्रीय मंत्री श्री निशंक ने की वेबिनार आयोजन की प्रशंसा
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए वेबिनार का आयोजन प्रशंसनीय है। विचार-विमर्श से महत्वपूर्ण सुझाव मिलते हैं। भारत की नई शिक्षा नीति के लिए करीब सवा दो लाख सुझाव प्राप्त हुए। नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट स्थान पर 5+3+3+4 फार्मेट लागू होगा। स्वतंत्र भारत के बाद हुए सबसे बड़े नवाचार में अनेक शिक्षाविद् और कुलपति आदि ने परामर्श देने का कार्य किया। श्री निशंक ने भारत की नई शिक्षा नीति की विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख किया। श्री निशंक ने बताया कि कक्षा छठवीं से विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई बच्चा शिक्षा से नहीं छूटेगा। करीब ढाई करोड़ विद्यार्थी के ड्राप आउट को समाप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब पहली से पांचवी कक्षा तक मातृभाषा का उपयोग किया जाएगा। विश्व के अनेक देशों में मातृभाषा को इस तरह का महत्व दिया गया है। भारत में पहली बार आठवीं अनुसूची में शामिल भारतीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ा गया है। विद्यार्थी स्वयं का मूल्यांकन करेगा। उसे रिपोर्ट कार्ड नहीं प्रोग्रेस कार्ड प्राप्त होगा। वोकेशनल विषयों को सुनने का विकल्प दिया गया है। विज्ञान के विद्यार्थी भी संगीत और मनोविज्ञान पढ़े सकेंगे। पाठ्यक्रम पूरा न हो पाने पर भी प्रमाण पत्र, डिप्लोमा और डिग्री शिक्षा प्राप्त करने की अवधि के अनुसार प्रदान की जाएगी। स्टडी इन इंडिया, स्टे इन इंडिया के तहत भारत के विद्यार्थियों को प्राप्त शिक्षा भारत के काम आए, यह प्रयास होंगे। अब पाठ्यक्रम नवाचार के साथ लागू होंगे। शोध की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। केन्द्र सरकार ने मिड-डे मील पर 580 करोड़, केंद्रीय विद्यालयों को सक्षम बनाने पर 6495 करोड़, नवोदय विद्यालय की व्यवस्था करने के लिए 803 करोड़ रुपए की राशि दी है। केंद्रीय मंत्री श्री निशंक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश स्थित केंद्रीय संस्थानों को सक्षम बनाकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के टारगेट को पूरा करने में सहयोग दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान के संबोधन के प्रमुख बिन्दु-
शिक्षा-
• केंद्र सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति का मध्यप्रदेश में आदर्श क्रियान्वयन करेंगे।
• मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ विद्यार्थियों को कौशल भी मिले यह लक्ष्य है।
• शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने पर ध्यान देंगे। नई शिक्षा नीति के आलोक में केन्द्रीय मंत्री श्री निशंक को आश्वस्त करता हूँ कि मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन होगा।
• शिक्षा सर्व सुलभ हो, हर बच्चा स्कूल जाए लेकिन बच्चों पर बस्ते का बोझ न हो, उनका बोझ घटे, यह लक्ष्य है।
• नये स्कूल खोलने फैशन बढ़ गया है, नगण्य विद्यार्थी संख्या के बावजूद विद्यालय प्रारंभ करना उचित नहीं।
• कोरोना काल में ‘हमारा घर-हमारा विद्यालय’ के अंतर्गत बच्चों को घर बैठे सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा पहुँचाई गई।
• प्रधानमंत्री श्री मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों को कौशल ज्ञान भी दिया जाएगा।
• नैतिक शिक्षा पर भी हम पर्याप्त ध्यान देंगे। पूर्व में नैतिक शिक्षा पर जोर दिया जाता रहा है। इसे पुन: महत्व दिया जाएगा।
• ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय तक जाने के लिए सड़क हों, परिवहन साधन भी हों, पर्याप्त स्टाफ हो और लेबोरेटरी भी हों, इस पर ध्यान देंगे ।
• व्यवसायिक शिक्षा के अंर्तगत कक्षा छठवीं से बच्चों के हाथ में कौशल मिले, यह प्रयास होंगे।
• संगीत नृत्य और योग की शिक्षा देना भी प्राथमिकता होगी।
• यदि किसी विषय में विशेषज्ञता अर्जित करना तब ही पीजी कक्षा में प्रवेश लें विद्यार्थी। सिर्फ फैशन के लिए मास्टर डिग्री ज्वाइन न करें। आज प्रत्येक स्थान पर कॉलेज के लिए मांग आती है। लेकिन पाठ्यक्रम की उपयोगिता सिद्ध हो, विद्यार्थी इसे ध्यान में रखें।
• शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।
• तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी गुणवत्ता में सुधार के प्रयास होंगे।
• तकनीकी ज्ञान हासिल करने वाले बच्चे शत-प्रतिशत प्लेसमेंट का लाभ लें। सभी कार्यों के लिए प्रायः लोग नहीं मिलते दूसरी तरफ बेरोजगारी की बात सुनते हैं। हमें इस गैप को पाटना है ।
स्वास्थ्य –
• पहला सुख निरोगी काया है। स्वास्थ्य ही व्यक्ति को जीवन देता है।
• राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी व्यवस्थाएं बनायी हैं। शासकीय अस्पताल चिकित्सक विहीन न हों, इसके प्रयास किए गए। चिकित्सकों की कमी को दूर करने का कार्य हुआ है।
• जांच और उपचार की व्यवस्थाएं बढ़ाई गई हैं।
• कोरोना काल में अनेक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के गत चार माह में निरंतर प्रयास हुए हैं।
• एम्बूलेंस सेवाएं बेहतर बनाने का प्रयाय किया गया है। यह प्रयास जारी रहेंगे।
• स्वास्थ्य सूचकांकों के सुधार पर ध्यान दिया जाए। शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में कमी आए।
• यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का लक्ष्य हो।
• प्रदेश के शासकीय अस्पताल विशेष रुप से जिला अस्पताल पूर्ण सक्षम हों। रोगी को रेफर करने की जरूरत न हो।
• प्रदेश में 13 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की पहल की गई। नये प्रारंभ मेडिकल कॉलेजों से जनता को सुविधा प्राप्त हुई है।
• डॉक्टर्स के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर हो। यह भी पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जांच की व्यवस्था साथ ही उपकरण को ऑपरेट करने के लिए ऑपरेटर भी हो, तभी स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का लक्ष्य पूरा होगा।
• एलोपैथी के साथ योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और अन्य पद्धतियों का प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।
• ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्थाएं ज्यादा अच्छी हों। यह प्रयास रहेगा।
• अभी कोरोना काल में करोड़ों परिवारों तक काढ़ा पहुँचा दिया गया। इम्यूनिटी बढ़ाने के प्रयास किए गए। लोग बीमार ही न हों, ऐसी परिस्थिति निर्मित हो। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे।
• जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों से जुड़े अस्पतालों में और बेहतर व्यवस्था का लक्ष्य है।
वेबिनार में नीति आयोग के एडिशनल सेक्रेटरी डॉ. राकेश सारवाल ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से शिशु और मातृ मृत्यु दर की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 88 प्रतिशत आधार कार्ड इनरोल है। श्री सारवाल ने बताया कि प्रदेश में नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप डॉक्टरों की संख्या कम है। इसे बढ़ाये जाने की तत्काल आवश्यकता है। नीति आयोग के श्री सारवाल ने माना कि मध्य प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की संख्या निरंतर बढ़ रही है। लेकिन इन सबके बावजूद प्रदेश मे प्रायवेट सेक्टर में मेडिकल कॉलेज शुरू किये जाने को प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता में और सुधार किये जाने की आवश्यकता बताई। एडिशनल सेक्रेटरी नीति आयोग ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधा को बढ़ाने में टेली मेडीसन मुख्य भूमिका हो सकती है। उद्घाटन सत्र के बाद वेबिनार में चार अलग उप समूह में चर्चा प्रारंभ हुई।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश सत्र के प्रारंभ में अपर मुख्य सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं में गिनी जाती है। आम जनता के मंशानुरूप इन सुविधाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हो। इसके लिये वेबिनार सत्र के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आपसी विचार विमर्श के बाद लक्ष्य निर्धारित किये है। उन्होंने बताया कि इन दो विषयों पर व्यापक चर्चा के लिये आज देश भर के 83 सब्जेक्ट एक्सपर्ट से भी वेबिनार के माध्यम से सुझाव लिये जा रहें है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि चर्चा के लिये चार उप समूह तैयार किये गये है। पहला समूह स्वास्थ्य, दूसरा समूह हायर एजुकेशन, तीसरा समूह स्कूल एजुकेशन और चौथा समूह कौशल विकास और टेक्नीकल एजुकेशन चर्चा करें। इसके साथ ही इन विषयों पर चर्चा में मंत्री परिषद के 13 सदस्य भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत कर रहे है। अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि जिन बिन्दुओं पर मुख्य रूप से चर्चा की जा रही है उनमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिये प्रायवेट सेक्टर की भागीदारी, तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाना, तकनीकी शिक्षा की भाषा का माध्यम क्या हो साथ ही प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में और कैसे सुधार हो, जैसे मुद्दो पर आपसी विचार विमर्श किया जाना है। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा में आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की पूर्ति कैसे पूरी हो। इस पर भी महत्वपूर्ण सुझाव लिये जा रहे है।
Dewas-आज आई 884 लोगों की रिपोर्ट में 16 लोगों की रिपोर्ट आई कोरोना पॉजिटिव
- 1 – आज लिये गये सैम्पल 555
- 2 -आज लैब से प्राप्त सैंपल रिपोर्ट संख्या 884
- 3 -आज प्राप्त सैम्पल रिपोर्ट में पाजिटिव संख्या 16
- 4 -आज प्राप्त कुल सैम्पल रिपोर्ट में नेगेटिव संख्या’ 866
- 5 -आज दिनांक तक कुल पाजिटिव संख्या 499
- 6 -आज दिनांक तक प्राप्त सैम्पल रिपोर्ट में नेगेटिव संख्या’ 21459
- 7 -आज कोरोना संक्रमित /पॉजिटिव ,मरीज उपचार उपरांत कोरोना मुक्त हुए संख्या 8
- 8 -आज दिनांक तक कोरोना संक्रमित/पॉजिटिव ,मरीज उपचार उपरांत कोरोना मुक्त हुए संख्या 421
- 9-आज दिनांक तक जिले मे कोरोना संक्रमित/पॉजिटिव, एक्टीव मरीजो की संख्या 65
◆ आज प्राप्त रिपोर्ट कोरोना संक्रमित (पाजिटिव) केसेस जानकारीः-
(डॉ एम.पी.शर्मा )
मुख्य चिकित्सा एव स्वास्थ अधिकारी
जिला-देवास
माताजी टेकरी की साफ-सफाई व्यवस्था का आयुक्त द्वारा निरीक्षण
देवास/ माताजी टेकरी पर नगर निगम द्वारा की जा रही साफ-सफाई व्यवस्थाओ का निरीक्षण नगर निगम आयुक्त विशालसिह चौहान द्वारा किया जाकर साफ-सफाई व्यवस्था को ओर अधिक चाक चौबंद रखने हेतु निगम के संबंधित अधिकारियो को निर्देश मौके पर ही दिये गये। इसी प्रकार आयुक्त द्वारा माताजी टेकरी पर उपलब्ध स्थानो मे वृह्द स्तर पर पौधारोण कर टेकरी को हरा भरा बनाने के निर्देश भी मौके पर ही दिये गये। आयुक्त के साथ निगम प्रभारी सहायक यंत्री सौरभ त्रिपाठी, प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी जितेन्द्र सिसोदिया व अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
